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बंगाल BJP के बढ़ते कद से परेशान टीएमसी, ममता का जंगलमहल और उत्तरी बंगाल पर ध्यान

अन्य इलाके जहां बनर्जी ज्यादा ध्यान दे रही हैं वह माल्दा और मुर्शीदाबाद हैं जहां पर टीएमसी का ट्रैक रिकॉर्ड कभी अच्छा नहीं रहा.  (फाइल फोटो: Shutterstock)
अन्य इलाके जहां बनर्जी ज्यादा ध्यान दे रही हैं वह माल्दा और मुर्शीदाबाद हैं जहां पर टीएमसी का ट्रैक रिकॉर्ड कभी अच्छा नहीं रहा. (फाइल फोटो: Shutterstock)

West Bengal Assembly Election: ममता यह अच्छी तरह से जानती हैं कि उत्तर बंगाल के 54 विधानसभा क्षेत्रों में से 50 में राजबंशी के वोट शेयर में कोई महत्वपूर्ण विभाजन उनके मिशन 'एकुश' (2021 विधानसभा चुनाव) के नतीजे तय कर सकता है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: February 4, 2021, 10:50 PM IST
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(सुजीत नाथ)

कोलकाता.
उत्तर बंगाल (North Bengal) और जंगलमहल (Jangalmahal) क्षेत्र में तेजी से बढ़ रहे भाजपा के कद को देखते हुए, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी (West Bengal CM Mamata Banerjee) ने भाजपा की सरकार बनाने की रणनीति पर रोक लगाने के लिए इन इलाकों में चुनाव प्रचार अभियान तेज कर दिया है. उत्तर बंगाल और जंगलमहल दोनों की क्षेत्रों में पश्चिम बंगाल की 294 सीटों में 98 सीटें हैं. सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस के लिए 2019 में हुए लोकसभा चुनावों में ये दोनों ही इलाके एक बुरा सपना बनकर उभरे. ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली टीएमसी ने इन इलाके में काफी बुरा प्रदर्शन किया. ऐसे में अब ममता बनर्जी पिछली गलतियों को न दोहराते हुए इस क्षेत्र पर ज्यादा ध्यान दे रही हैं.

अन्य इलाके जहां बनर्जी ज्यादा ध्यान दे रही हैं वह माल्दा और मुर्शिदाबाद हैं जहां पर टीएमसी का ट्रैक रिकॉर्ड कभी अच्छा नहीं रहा. लेकिन पिछले कुछ महीनों में, तृणमूल कांग्रेस शरणार्थियों, जानजातीय और राजबंशी समुदाय के इस इलाके में आक्रामक तरीके से प्रचार कर रही है. 14 सितंबर 2020 को ममता की 'जनजातीय साहित्य अकादमी' स्थापित करने की घोषणा इस साल होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले उठाया गया सोचा-समझा कदम थी. इसके साथ ही माना जाता है कि राज्य सरकार द्वारा रूपाश्री परिकल्प स्कीम के तहत गए सामूहिक विवाह कार्यक्रम (गण विवाह) के आयोजन से भी इलाके में पार्टी को खोई साख को वापस पाने में मदद निली है. सामूहिक विवाह कार्यक्रमों का निश्चित रूप से क्षेत्र की सामाजिक-आर्थिक पृष्ठभूमि को देखते हुए इसका सकारात्मक असर पड़ा है.
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उत्तर बंगाल में पासा पलट सकता है राजबंशी समुदाय
30 प्रतिशत से अधिक वोट शेयर के साथ राजबंशी समुदाय, उत्तर बंगाल में किसी भी राजनीतिक दल के लिए ताल ठोकने का निर्णायक कारक है. 2011 में टीएमसी के सत्ता में आने तक वे वाम शासन के निर्णायक कारक थे.  2019 में उनमें से अधिकांश ने भाजपा का पक्ष लिया था, जिसके कारण पिछले लोकसभा चुनावों में टीएमसी के लिए विनाशकारी परिणाम सामने आए थे.

ममता यह अच्छी तरह से जानती हैं कि उत्तर बंगाल के 54 विधानसभा क्षेत्रों में से 50 में राजबंशी के वोट शेयर में कोई महत्वपूर्ण विभाजन उनके मिशन 'एकुश' (2021 विधानसभा चुनाव) के नतीजे तय कर सकता है. गति को ऊंचा रखने के लिए, ममता एक बार फिर 2 फरवरी को उत्तर बंगाल में लोगों के पास पहुंचीं. उन्होंने अलीपुरद्वार जिले के फलकता में 'रूपश्री प्रकल्प' योजना के तहत राज्य सरकार द्वारा आयोजित एक सामूहिक विवाह समारोह में भाग लिया.

माओवादी समस्या से निपटने के बाद भी तृणमूल के लिए आसार ठीक नहीं
जंगलमहल में पार्टी के जनजातीय आधार को मजबूत करने के लिए, ममता गुरुवार को कोलकाता के गीतांजलि स्टेडियम में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के नेताओं के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक की अध्यक्षता कर रही हैं. जंगलमहल में 44 विधानसभा सीटें हैं, जिनमें बांकुरा में 12 सीटें और पुरुलिया में नौ, पश्चिम मिदनापुर में 19 और झारग्राम में चार गोपीबल्लपुर, झारग्राम, बिनपुर और नयाग्राम शामिल हैं.

मई 2011 में सत्ता में आने के तुरंत बाद जंगलमहल की माओवादी समस्या से निपटने में कामयाब रहने के बाद भी यह तृणमूल के लिए कभी भी अनुकूल क्षेत्र नहीं रहा.



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उत्तर बंगाल और जंगलमहल दोनों में 2019 के लोकसभा चुनावों में भारी भगवा लहर देखी गई और इस हिस्से में भाजपा की योजना को तोड़ने के लिए, ममता ने इन क्षेत्रों में अपना अभियान तेज कर दिया है.

इस बात की अधिक संभावना है कि आगामी चुनावों के पहले दो चरण उत्तर बंगाल और जंगलमहल के कुछ हिस्सों में होंगे और इसलिए, ममता ने अधिक से अधिक सीटें हासिल करने के लिए इस अभियान पर अपना ध्यान केंद्रित किया है.

लोकसभा में उत्तर बंगाल की आठों सीटों पर मिली थी ममता को हार
उत्तर बंगाल की आठ लोकसभा सीटों - कूचबिहार, अलीपुरद्वार, जलपाईगुड़ी, दार्जिलिंग, रायगंज, बालूरघाट, उत्तरी मालदा और दक्षिण मालदा में ममता एक भी सीट जीतने में नाकाम रहीं. यहां आठ में से सात सीटें भाजपा ने जीतीं जबकि मालदा दक्षिण की सीट दिवंगत कांग्रेसी नेता गनी खान चौधरी के भाई अबू हसीम खान चौधरी (कांग्रेस) ने जीती, जिन्हें 'दल्लू दा' के नाम से जाना जाता है.

उत्तरी मालदा में, बीजेपी के खगेन मुर्मू ने सांसद मौसिम नूर (पूर्व कांग्रेस सांसद लेकिन टीएमसी टिकट पर आखिरी लोकसभा चुनाव लड़ा) को हराया, जबकि मालदा दक्षिण में 'दल्लू दा' ने बीजेपी के श्रीरूपा मित्रा चौधरी को हराया. टीएमसी के मोहम्मद मोअज्जम हुसैन तीसरे स्थान पर रहे.

बाकी सीटों पर बीजेपी के निशीथ प्रमाणिक, जॉन बारला, जयंत कुमार रे, राजू सिंह बिष्ट, देवश्री चौधरी, सुकांता मजूमदार और खगेन मुर्मू ने क्रमशः कूच बिहार, अलीपुरद्वार, जलपाईगुड़ी, दार्जिलिंग, रायगंज बालुरघाट और उत्तरी मालदा सीटें जीतकर तृणमूल कांग्रेस को भारी झटका दिया.
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