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दीदी ने डबल सेंचुरी और हैट्रिक से जीती बंगाल की जंग, अब होगा असली 'खेला'

दीदी ने डबल सेंचुरी और हैट्रिक से जीती बंगाल की जंग, अब होगा असली 'खेला'

ममता बनर्जी (फ़ाइल फोटो)

ममता बनर्जी (फ़ाइल फोटो)

West Bengal Assembly Election 2021: बीजेपी ने ममता को घरने के लिए पूरा प्लान तैयार किया किया था. बीजेपी को लगा कि मुस्लिम वोट बंट जाएंगे. और हिंदू उन्हें दिल खोल कर वोट देंगे. लेकिन ऐसा हुआ नहीं, मुसलमानों मे टीएमसी को वोट दिया.

    (एनसी सतपथी)

    नई दिल्ली. पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी (Mamta Banerjee) की जीत तुलना 2001 के भारत- ऑस्ट्रेलिया टेस्ट से की जा सकती है. कोलकाता के ऐतिहासिक ईडन गार्डन में खेले गए इस मैच में वीवीएस लक्ष्मण और राहुल द्रविड़ ने शानदार साझेदारी के बाद जीत दिलाई थी. इस बार के चुनाव में ममता ने अकेले दम पर तृणमूल कांग्रेस को जीत दिला दी. खास बात ये है कि दीदी ने यहां किसी के साथ कोई साझेदारी नहीं की और वो भी व्हीलचेयर पर बैठकर उन्हें जीत मिल गई. साल 2016 के मुकाबले इस बार उन्हें 2 ज्यादा सीटों पर भी जीत मिली. जीत के बाद ममता ने कहा कि लोग डबल इंजन सरकार की बात कर रहे थे और मैंने तभी कहा था कि मैं डबल सेंचुरी लगाऊंगी.

    साल 2019 में ही बंगाल में राजनीतिक हवा बदल गई थी. लोकसभा चुनाव में बीजेपी को 40 में से 18 सीटों पर जीत मिली थी. लिहाजा इस बार बीजेपी ने चुनाव जीतने के लिए पूरी ताकत झौंक दी. दिल्ली से पीएम मोदी के साथ-साथ कई नेताओं को बंगाल भेजा गया. पार्टी के कार्यकर्ता हर वर्ग से मिल रहे थे. जिसमें चाय बगान में काम करने वाले लोगों के साथ-साथ सारे समुदाय के लोग मौजूद थे.

    लेकिन दीदी इतनी आसानी से हार मानने वाली नेता नहीं है. साल 1985 में जादवपुर में वामपंथी दल के नेता सोमनाथ चटर्जी को हराने के बाद उन्होंने राजनीति में कदम रखा था. ममता भवानीपुर में आराम से जीत सकती थी. लेकिन उन्होंने नंदीग्राम से चुनाव जीतने के लिए चुनौती स्वीकार की. कई लोगों को लगा कि वो भवानीपुर से वो भाग रही हैं. लेकिन ऐसा नहीं था. हालांकि उन्हें नंदीग्राम में हार का सामना करना पड़ा.



    बीजेपी ने ममता को घरने के लिए पूरा प्लान तैयार किया किया था. बीजेपी को लगा कि मुस्लिम वोट बंट जाएंगे. और हिंदू उन्हें दिल खोल कर वोट देंगे. लेकिन ऐसा हुआ नहीं, मुसलमानों मे टीएमसी को वोट दिया. इसके अलावा हिंदू वोटरों पर भी ममता का ही कब्जा रहा. बता दें कि पिछले साल लॉकडाउन के दौरान ममता ने दूर्गा पंडाल के लिए 180 करोड़ रुपये दिए थे.

    कोरोना की दूसरी लहर से दिल्ली में तबाही मच गई. पीएम मोदी को बंगाल की रैली रद्द करनी पड़ी. कोलकाता, मुर्शिदाबाद, मालदा और बर्दवान में अंतिम तीन चरणों में सौ से अधिक सीटें पर मोदी के चुनाव प्रचार के बिना वोटिंग हुई. जिससे दीदी को फायदा हुआ. इसके अलावा बीजेपी के लिए कोई सीएम कैंडिडेट न होना भी भारी पड़ा. ममता के करिश्मे के आगे सब फीका पड़ गया.

    Tags: Assembly Election 2021, Mamta Banerjee, West Bengal Assembly Election 2021

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