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मणिपुर: रिहा हुए पत्रकार किशोरचंद्र वांगखेम, लगा था NSA, सेंट्रल जेल में थे बंद

मणिपुर: रिहा हुए पत्रकार किशोरचंद्र वांगखेम, लगा था NSA, सेंट्रल जेल में थे बंद

टीवी पत्रकार किशोरचंद्र वांगखेम को आखिरकार मणिपुर सेंट्रल जेल से रिहा कर दिया गया है. ( फोटो एएनआई )

टीवी पत्रकार किशोरचंद्र वांगखेम को आखिरकार मणिपुर सेंट्रल जेल से रिहा कर दिया गया है. ( फोटो एएनआई )

जाने-माने टीवी पत्रकार किशोरचंद्र वांगखेम को आखिरकार मणिपुर सेंट्रल जेल से रिहा कर दिया गया है. उनको राष्‍ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत जेल में बंद किया गया था. जानकारी के अनुसार उन पर मुकदमा इसलिए दर्ज किया गया था कि उन्होंने मणिपुर भारतीय जनता पार्टी के प्रमुख नेता टिकेंद्र सिंह की कोरोना से मौत के बाद फेसबुक पर एक पोस्ट डाला था. इस पोस्‍ट में लिखा था कि कोविड-19 का इलाज गोमूत्र और गोबर से नहीं हो सकता. इस पोस्ट के बाद भाजपा नेताओं की शिकायत के बाद पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार किया और देशद्रोह का चार्ज लगाया.

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    इंफाल. जाने-माने टीवी पत्रकार किशोरचंद्र वांगखेम को आखिरकार मणिपुर सेंट्रल जेल से रिहा कर दिया गया है. उनको राष्‍ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत जेल में बंद किया गया था. जानकारी के अनुसार उन पर मुकदमा इसलिए दर्ज किया गया था कि उन्होंने मणिपुर भारतीय जनता पार्टी के प्रमुख नेता टिकेंद्र सिंह की कोरोना से मौत के बाद फेसबुक पर एक पोस्ट डाला था. इस पोस्‍ट में लिखा था कि कोविड-19 का इलाज गोमूत्र और गोबर से नहीं हो सकता. इस पोस्ट के बाद भाजपा नेताओं की शिकायत के बाद पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार किया और देशद्रोह का चार्ज लगाया. इस वक्त मणिपुर में बीजेपी की ही सरकार है.

    जेल से रिहा होने के बाद पत्रकार किशोरचंद्र वांगखेम ने कहा कि 'यह सुनिश्चित करने की जरूरत है कि जो अपनी राय व्‍यक्‍त करना चाहता है, उसके साथ ऐसा बर्ताव न हो.' राज्‍य भाजपा प्रमुख के निधन के बाद की गई उनकी पोस्‍ट को आक्रामक बताते हुए उन्‍हें जेल में भेज दिया था. इस मामले में पुलिस ने बताया था कि पत्रकार किशोरचंद्र वांगखेम के साथ ही सामाजिक कार्यकर्ता एर्नड्रो एरेंड्रो लिचोम्बम पर इसी कानून के तहत मामला दर्ज कर उन्‍हें भी जेल भेज दिया गया था. पुलिस का कहना था कि दोनों को कम से कम एक साल तक बिना मुकदमे के हिरासत में रहना होगा. इम्फाल वेस्ट के पुलिस सुपरिटेंडेंट के मेघचंद्र सिंह ने बताया था कि दोनों ही आरोपियों को IPC की धारा 153 ए के तहत गिरफ्तार किया गया और उन पर दो समूहों के बीच धार्मिक और जातीय आधार पर नफरत फैलाने का आरोप है. उन्होंने बताया कि सोमवार को उन पर NSA लगाया गया और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये उनकी पेशी के बाद उन्हें 4 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा गया.

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    जमानत की औपचारिकता के पहले ही एनएसए लगाया पुलिस ने
    दोनों आरोपियों के वकील विक्टर चोंगथम का कहना है कि उनके क्लाइंट्स पर जमानत के लिए कोर्ट में औपचारिकता पूरी होने से पहले ही NSA लगा दिया गया. उन्होंने बताया कि दोनों का बेल बॉन्ड अमाउंट भी भरा जा चुका था और बेल के पेपर्स का इंतजार हो रहा था, इसी बीच पुलिस ने उन पर NSA लगा दिया.

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    सुप्रीम कोर्ट ने लगाई थी फटकार, लिचोम्बम को फौरन रिहाई के दिए थे आदेश
    सुप्रीम कोर्ट ने रासुका के तहत गिरफ्तार मणिपुर के एक मानवाधिकार कार्यकर्ता लिचोम्बम को फौरन रिहा करने का आदेश दिया था. कोर्ट ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता की अपील को भी ठुकरा दिया था, जिसमें उन्‍होंने सुनवाई को एक दिन के लिए टालने का अनुरोध किया था. कोर्ट ने कहा था कि अब लिचोम्बम को जेल में रखना उनकी स्वतंत्रता और जीने के अधिकार का उल्लंघन है.

    कौन हैं वांगखेम और लिचोम्बम?
    किशोरचंद्र वांगखेम एक जाने-माने टीवी पत्रकार हैं. उन्हें नवंबर 2018 में भी गिरफ्तार किया जा चुका है, तब उन्होंने सोशल मीडिया पर मणिपुर के मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह की सरकार की आलोचना करता हुआ एक वीडियो डाला था. तब भी उन पर अप्रैल 2019 में रिहाई से पहले NSA लगाया गया था. 6 महीने तक जेल में रहने के बाद उन्हें फिर सितंबर 2020 में ही एक फेसबुक पोस्ट की वजह से गिरफ्तार होना पड़ा था. दिसंबर 2020 में जेल से छूटने के बाद उन्होंने फ्रंटियर मणिपुर ज्वाइन कर लिया था.

    लिचोम्बम वर्ल्ड बैंक और यूनाइटेड नेशंस डेवलेपमेंट प्रोग्राम में काम कर चुके हैं और पिछले साल जुलाई में उन्हें भी फेसबुक पोस्ट की वजह से गिरफ्तार होना पड़ा था, फिर जमानत पर वह छूट भी गए थे. उन्होंने कुछ साल पहले पीपुल्स रिसर्जेंस एंड जस्टिस एलायंस नामक एक राजनीतिक दल का गठन किया था. मशहूर सामाजिक कार्यकर्ता इरोम शर्मिला ने भी इसी पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ा था.

    Tags: Central Jail, Journalist, Manipur, कोविड 19

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