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ILP सिस्टम के लिए अमित शाह का सम्मान करेगी मणिपुर सरकार, जानिए क्या है ये व्यवस्था

कार्यक्रम का आयोजन मणिपुर में इनर लाइन परमिट सिस्टम लागू में अमित शाह की भूमिका को रेखांकित करना है.
कार्यक्रम का आयोजन मणिपुर में इनर लाइन परमिट सिस्टम लागू में अमित शाह की भूमिका को रेखांकित करना है." (फाइल फोटो)

इनर लाइन परमिट सिस्टम (Inner Line Permit system) का मतलब है कि किसी दूसरे राज्य का आदमी मणिपुर (Manipur) में नहीं बस सकता. ये परमिट हर बार यात्रा के पहले राज्य सरकार से हासिल करना होता है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: December 26, 2020, 9:37 PM IST
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नई दिल्ली. मणिपुर के मुख्यमंत्री एन. बिरेन सिंह की सरकार (N Biren Singh Government) राज्य में इनर लाइन परमिट सिस्टम लागू करने के लिए गृह मंत्री अमित शाह का सम्मान करेगी. दरअसल गृहमंत्री अमित शाह उत्तर पूर्व के दौरे पर हैं. रविवार को वे मणिपुर की राजधानी इंफाल में रहेंगे. मुख्यमंत्री बिरेन सिंह ने कहा, "हमारी राज्य के लोगों से अपील है कि वे ज्यादा से ज्यादा संख्या में गृहमंत्री अमित शाह (Amit Shah) के सम्मान में आयोजित होने जा रहे कार्यक्रम में शामिल हों. कार्यक्रम का आयोजन मणिपुर में इनर लाइन परमिट सिस्टम (Inner Line Permit system) लागू में अमित शाह की भूमिका को रेखांकित करना है."

क्या है इनर लाइन परमिट सिस्टम
इनर लाइन परमिट सिस्टम का मतलब ये है कि देश के दूसरे राज्यों से मणिपुर जाने वाले लोगों को पहले परमिशन लेनी होगी. ये परमिशन ही इनर लाइन परमिट सिस्टम कहा जाता है. इस सिस्टम का उद्देश्य राज्य में दूसरे राज्यों से आए लोगों को बसने से रोकना है. इस पूरे सिस्टम का उद्देश्य राज्य के मूल नागरिकों की आबादी, जमीन, नौकरी और अन्य सुविधाओं को सुरक्षित करना है.

इनर लाइन परमिट सिस्टम की बड़ी बातें-
1. इनर लाइन परमिट सिस्टम के तहत भारतीय नागरिकों को मणिपुर के संरक्षित इलाकों में निश्चित दिन के लिए यात्रा की इजाजत मिलती है. इस सिस्टम को राज्य में 1 जनवरी 2020 से औपचारिक तौर पर लागू किया गया है.



2. उत्तर पूर्व में मणिपुर चौथा राज्य है, जहां ये व्यवस्था लागू है. मणिपुर के अलावा अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड और मिजोरम में भी इनर लाइन परमिट सिस्टम लागू है.

3. कोई भी भारतीय नागरिक बिना अनुमति के इन राज्यों की यात्रा नहीं कर सकता, बशर्ते कि वह राज्य का नागरिक हो. ना ही इनर लाइन परमिट सिस्टम के तहत निर्धारित समय से ज्यादा रूक सकता है.

4. इनर लाइन परमिट सिस्टम का आइडिया औपनिवेशिक क्षेत्र से लिया गया है. बंगाल ईस्टर्न फ्रंटियर रेगुलेशन एक्ट, 1873 के तहत ब्रिटिश शासकों ने निर्धारित इलाकों में एंट्री और बाहरी नागरिकों के आने जाने पर रोक लगा रखी थी. ये सब ब्रिटिश शासकों ने अपने व्यापार और हितों को सुरक्षित रखने के लिए किया था.

5. इनर लाइन परमिट सिस्टम राज्य सरकार जारी करती है और इसे ऑनलाइन या शारीरिक तौर पर हासिल किया जा सकता है.

6. इनर लाइन परमिट सिस्टम की मांग नॉर्थ ईस्ट के दूसरे राज्यों में भी हो रही है. हालांकि अभी सिर्फ चार राज्यों में ही लागू है.

7. नागरिकता संशोधन बिल को देखते हुए इनर लाइन परमिट सिस्टम पर चर्चा और तेज हो गई, क्योंकि नागरिकता संशोधन बिल के तहत बांग्लादेश, पाकिस्तान और अफगानिस्तान जैसे देशों से गैर मुस्लिम नागरिकों के लिए भारत की नागरिकता हासिल करना आसान हो गया है. अगर CAB लागू होता है तो बांग्लादेश से आने वाले लोग उन राज्यों में नहीं बस पाएंगे, जहां इनर लाइन परमिट सिस्टम लागू है.

हालांकि इनर लाइन परमिट सिस्टम पर केंद्र सरकार की ओर से अभी कोई फैसला नहीं लिया गया है.
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