Mann Ki Baat: PM मोदी ने जनता कर्फ्यू को किया याद, 'मन की बात' कार्यक्रम की 10 बड़ी बातें

1 अप्रैल से हो सकते हैं ये बदलाव.

1 अप्रैल से हो सकते हैं ये बदलाव.

Mann Ki Baat: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) ने कहा कि मैं आज, इस 75वें संस्करण के समय सबसे पहले ‘मन की बात’ (Mann Ki Baat) को सफल बनाने के लिए, समृद्ध बनाने के लिए और इससे जुड़े रहने के लिए हर श्रोता का बहुत-बहुत आभार व्यक्त करता हूं.

  • News18Hindi
  • Last Updated: March 28, 2021, 12:08 PM IST
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नई दिल्‍ली. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) आज अपने मासिक रेडियो कार्यक्रम 'मन की बात' (Mann Ki Baat) कार्यक्रम के जरिए शवासियों को संबोधित करते हुए 'मन की बात' के 75वें संस्करण पर लोगों को बधाई दी है. मन की बात कार्यक्रम की शुरुआत करते हुए पीएम मोदी ने कहा, मैं आपका बहुत-बहुत धन्यवाद करता हूं कि आपने इतनी बारीक नजर से 'मन की बात' को फॉलो किया है और आप जुड़े रहे हैं. ये मेरे लिए बहुत ही गर्व का विषय है, आनंद का विषय है. पीएम मोदी ने कहा, यह कल की तरह ही लगता है जब 2014 में हमने मन की बात नाम से इस यात्रा की शुरुआत की. मैं सभी श्रोताओं और उन लोगों को धन्यवाद देना चाहता हूं जिन्होंने कार्यक्रम के लिए इनपुट दिए हैं.

पीएम मोदी ने कहा, आप देखिएगा, देखते ही देखते ‘अमृत महोत्सव’ ऐसे कितने ही प्रेरणादायी अमृत बिंदुओं से भर जाएगा, और फिर ऐसी अमृत धारा बहेगी जो हमें भारत की आज़ादी के सौ वर्ष तक प्रेरणा देगी. देश को नई ऊँचाई पर ले जाएगी, कुछ-न-कुछ करने का जज्बा पैदा करेगी.

पीएम मोदी के 'मन की बात' कार्यक्रम की 10 बड़ी बातें
पीएम मोदी ने कहा, आज़ादी के लड़ाई में हमारे सेनानियों ने कितने ही कष्ट इसलिए सहे, क्योंकि वो देश के लिए त्याग और बलिदान को अपना कर्तव्य समझते थे. उनके त्याग और बलिदान की अमर गाथाएं अब हमें सतत कर्तव्य पथ के लिए प्रेरित करे.
पीएम मोदी ने कहा, किसी स्वाधीनता सेनानी की संघर्ष गाथा हो, किसी स्थान का इतिहास हो, देश की कोई सांस्कृतिक कहानी हो, अमृत महोत्सव के दौरान आप उसे देश के सामने ला सकते हैं और देशवासियों को उससे जोड़ने का माध्यम बन सकते हैं. उनके त्याग और बलिदान की अमर गाथाएं अब हमें सतत कर्तव्य पथ के लिए प्रेरित करे और जैसे गीता में भगवान कृष्ण ने कहा है –नियतं कुरु कर्म त्वं कर्म ज्यायो ह्यकर्मण:
आजादी की लड़ाई में हमारे सेनानियों ने कितने ही कष्ट इसलिए सहे, क्योंकि वो देश के लिए त्याग और बलिदान को अपना कर्तव्य समझते थे. उसी प्रकार से हमारे कोरोना वॉरियर्स के प्रति सम्मान, आदर, थाली बजाना, ताली बजाना, दिया जलाना हमारा कर्तव्‍य था. आपको अंदाजा नहीं है कोरोना वॉरियर्स के दिल को कितना छू गया था वो और वो ही तो कारण है जो पूरे साल वे बिना थके, बिना रुके डटे रहे.
मेरे प्यारे देशवासियो, पिछले वर्ष ये मार्च का ही महीना था, देश ने पहली बार जनता कर्फ्यू शब्द सुना था. लेकिन इस महान देश की महान प्रजा की महाशक्ति का अनुभव देखिये, जनता कर्फ्यू पूरे विश्व के लिए एक अचरज बन गया था. पिछले साल इस समय सवाल था कि कोरोना की वैक्सीन कब तक आएगी. हम सबके लिए गर्व की बात है, कि आज भारत, दुनिया का, सबसे बड़ा वैक्सीन प्रोग्राम चला रहा है.
क्रिकेटर मिताली जी, हाल ही में अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट में दस हजार रन बनाने वाली पहली भारतीय महिला क्रिकेटर बनी हैं. उनकी इस उपलब्धि पर बहुत-बहुत बधाई. दो दशकों से ज्यादा के करियर में मिताली राज जी ने हजारों-लाखों को प्रेरित किया है. उनके कठोर परिश्रम और सफलता की कहानी न सिर्फ महिला क्रिकेटरों, बल्कि पुरुष क्रिकेटरों के लिए भी एक प्रेरणा है.
मैंने पर्यटन के विभिन्न पहलुओं पर अनेक बार बात की है, लेकिन आज हम light house की बात कर रहे है. ये पर्यटन के लिहाज से काफी अलग होते हैं. ये लाइट हाउस गुजरात के सुरेंद्र नगर जिले में जिन्‍झुवाड़ा नाम के एक स्‍थान पर है. जानते हैं यह लाइट हाउस क्‍यों खास हैं. जहां पर ये लाइट हाउस हैं वहां से अब समुद्र तट सौ किलोमीटर से भी अधिक दूर है. आपको गांव में ऐसे पत्‍थर मिले जाएंगे जो यह बताते हैं कि यहां कभी एक व्‍यस्‍त बंदरगाह रहा होगा.
मन की बात कार्यक्रम में पीएम मोदी ने कहा, गुजरात के बनासकांठा में वर्ष 2016 में एक आयोजन हुआ था. उस कार्यक्रम में मैंने लोगों से कहा यहां इतनी संभावनाएं हैं, क्यों न बनासकांठा और हमारे यहां के किसान मिठास की क्रांति का नया अध्याय लिखें ? आपको जानकर खुशी होगी, इतने कम समय में, बनासकांठा, शहद उत्पादन का प्रमुख केंद्र बन गया है. आज बनासकांठा के किसान शहद से लाखों रुपए सालाना कमा रहे हैं.
अभी कुछ दिन पहले World Sparrow Day मनाया गया . Sparrow यानि गोरैया. कहीं इसे चकली बोलते हैं, कहीं चिमनी बोलते हैं, कहीं घान चिरिका कहा जाता है, बनारस के बत्रा जी ने गौरैया संरक्षण में बहुत अच्छा काम किया है. इंद्रपाल सिंह बत्रा जी ने अपने घर में लकड़ी के ऐसे घोंसले बनवाए, जिनमें गोरैया आसानी से रह सके. आज बनारस के कई घर इस मुहिम से जुड़ रहे हैं. मैं चाहूंगा प्रकृति, पर्यावरण, प्राणी, पक्षी जिनके लिए भी बन सके, कम-ज्यादा प्रयास हमें भी करने चाहिए.
देश के अलग-अलग क्षेत्रों में जल्द ही नया साल भी मनाया जाएगा. चाहे उगादी हो या पुथंडू, गुड़ी पड़वा हो या बिहू, नवरेह हो या पोइला, या फिर बोईशाख हो या बैसाखी - पूरा देश, उमंग, उत्साह और नई उम्मीदों के रंग में सराबोर दिखेगा. होली भी तो बसंत को उत्सव के तौर पर ही मनाने की एक परंपरा है. जिस समय हम रंगों के साथ होली मना रहे होते हैं, उसी समय बसंत भी, हमारे चारों ओर नए रंग बिखेर रहा होता है. इसी समय फूलों का खिलना शुरू होता है और प्रकृति जीवंत हो उठती है.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मन की बात कार्यक्रम में कहा, भारत के लोग दुनिया के किसी कोने में जाते हैं तो गर्व से कहते हैं कि वे भारतीय हैं. हम अपने योग, आयुर्वेद, दर्शन और न जाने क्या कुछ नहीं है हमारे पास, जिसके लिए हम गर्व करते हैं, गर्व की बातें करते हैं. साथ ही अपनी स्थानीय भाषा, बोली, पहचान, पहनाव, खान-पान उसका भी गर्व करते हैं.
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