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कांग्रेस की बदहाली पर चिट्ठी लिखने वाले नेता आज करेंगे सोनिया गांधी से मुलाकात

सोनिया गांधी और राहुल गांधी की फाइल फोटो
सोनिया गांधी और राहुल गांधी की फाइल फोटो

ऐसे समय में जब कांग्रेस (Congress) चुनावी असफलताओं का सामना करना पड़ रहा है, उसके लिए एकजुट दिखना महत्वपूर्ण है लेकिन सोनिया गांधी (Sonia Gandhi) और कई शीर्ष नेताओं के लिए सबसे बड़ी चुनौती राहुल गांधी (Rahul Gandhi) को इस बात के लिए मनाना है कि अध्यक्ष पद को ना कहने का यह सही समय नहीं है

  • News18Hindi
  • Last Updated: December 18, 2020, 10:23 AM IST
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नई दिल्ली. कांग्रेस (Congress) में सक्रिय नेतृत्व और व्यापक संगठनात्मक बदलाव की मांग को लेकर पत्र लिखने वाले 23 नेताओं के समूह में शामिल कुछ नेता शनिवार को पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी (Sonia Gandhi) से मुलाकात करेंगे. सूत्रों ने बताया कि सोनिया गांधी के साथ इन नेताओं की मुलाकात की भूमिका तैयार करने में मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यममंत्री कमलनाथ की अहम भूमिका है और 19 अगस्त की इस प्रस्तावित बैठक में वह भी शामिल होंगे. कमलनाथ ने कुछ दिनों पहले ही सोनिया से मुलाकात की थी.

पत्र लिखने वाले नेताओं में शामिल एक नेता ने ‘पीटीआई-भाषा’ से बातचीत में इसकी पुष्टि की है कि उन्हें सोनिया से मुलाकात के लिए बुलाया गया है. कांग्रेस सूत्रों का कहना है कि सोनिया से कुछ ऐसे नेता भी मिल सकते हैं जो लंबे समय से पार्टी से नाराज चल रहे हैं, हालांकि वे पत्र पर हस्ताक्षर करने वाले नेताओं में शामिल नहीं हैं.

अगस्त में नेताओं ने लिखी थी चिट्ठी
मुलाकात के दौरान कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी और पार्टी महासचिव प्रियंका गांधी के उपस्थित रहने को लेकर अभी स्थिति स्पष्ट नहीं हुई है, हालांकि इस ताजा घटनाक्रम में प्रियंका की भी अहम भूमिका मानी जा रही है. सूत्रों का कहना है कि इन नेताओं की सोनिया गांधी से मुलाकात के बाद सुलह की गुंजाइश बढ़ सकती है.
इस साल अगस्त महीने में गुलाम नबी आजाद, आनंद शर्मा और कपिल सिब्बल समेत कांग्रेस के 23 नेताओं ने सोनिया गांधी को पत्र लिखकर पार्टी के लिए सक्रिय अध्यक्ष होने और व्यापक संगठनात्मक बदलाव करने की मांग की थी. इसे कांग्रेस के कई नेताओं ने पार्टी नेतृत्व और खासकर गांधी परिवार को चुनौती दिए जाने के तौर पर लिया. कई नेताओं ने गुलाम नबी आजाद के खिलाफ कार्रवाई की मांग भी की.



बिहार विधानसभा चुनाव और कुछ प्रदेशों के उप चुनावों में कांग्रेस के निराशाजनक प्रदर्शन के बाद भी, आजाद और सिब्बल ने पार्टी की कार्यशैली की खुलकर आलोचना की थी और इसमें व्यापक बदलाव की मांग की थी. इसके बाद वे फिर से कांग्रेस कई नेताओं के निशाने पर आ गए.

राहुल को मनाना होगा?
ऐसे समय में जब कांग्रेस चुनावी असफलताओं का सामना करना पड़ रहा है, उसके लिए एकजुट दिखना महत्वपूर्ण है  लेकिन सोनिया गांधी और कई शीर्ष नेताओं के लिए सबसे बड़ी चुनौती राहुल गांधी को इस बात के लिए मनाना है कि अध्यक्ष पद को ना कहने का यह सही समय नहीं है.

सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या सीडब्ल्यूसी का चुनाव होगा. कांग्रेस के नियम कहता है कि पार्टी अध्यक्ष सीडब्ल्यूसी सदस्यों पर फैसला करेगा. इस पर चिट्ठी लिखने वाले नेताओं ने सवाल उठाया था. उन्होंने कहा था कि यदि कांग्रेस सही मायने में लोकतांत्रिक होना चाहती है, तो भी सीडब्ल्यूसी सदस्यों का चुनाव होना चाहिए.

यह कहना आसान है लेकिन पार्टी नेतृत्व पर ऐसी कोई बाध्यता नहीं है. दूसरा पार्टी अध्यक्ष अपनी टीम के सदस्यों को चुनने में सहज महसूस करते हैं और आमतौर पर सीडब्ल्यूसी का चयन राजनीतिक संतुलन को ध्यान में रख कर किया जाता है. इन सब के बीच संभावना है कि संगठन चुनाव में देरी हो सकती है. यह मार्च-अप्रैल तक भी खिंच सकता है.
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