दिल्ली हिंसा: वैलेंटाइन डे पर शादी के बाद पहली बार आई थी ससुराल उसी दिन हुई पति की हत्या

दिल्ली हिंसा: वैलेंटाइन डे पर शादी के बाद पहली बार आई थी ससुराल उसी दिन हुई पति की हत्या
अशफाक हुसैन की ये तस्वीर उनकी शादी वाले दिन ही खींची गई थी.

दोनों की शादी महज़ 12 दिन पहले ही हुई थी. तसलीन की अशफाक से बुलंदशहर के सखनी में 14 फरवरी को शादी हुई थी. दिल्ली का रहने वाला अशफाक रविवार रात को ही मुस्तफाबाद लौट आया. इसी समय दिल्ली के मौजपुर और जाफराबाद में हालात खराब होना शुरू हुए थे.

  • News18Hindi
  • Last Updated: February 28, 2020, 7:07 PM IST
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(राखी बोस/इरम आगा)

नई दिल्ली. 21 साल की तसलीन फातिमा ने अपने 22 साल के शौहर अशफाक हुसैन के साथ अब तक सिर्फ एक बार ही खाना खाया था. दिल्ली के उत्तर-पूर्वी क्षेत्र में हुई हिंसा में 25 फरवरी को अशफाक की गोली मारकर हत्या कर दी गई. इन दोनों की शादी महज़ 12 दिन पहले ही हुई थी. उत्तर-पूर्वी दिल्ली के मुस्तफाबाद इलाके में गोकुलपुरी की गलियों में एक घर लोगों से भरा हुआ है. तसलीन अपने आंसू रोक नहीं पा रही हैं. रोते हुए वह कहती हैं 'मैं तो अभी तक यह भी नहीं जान पाई थी कि वह कौन हैं.'

तसलीन की अशफाक से बुलंदशहर के सखनी में 14 फरवरी को शादी हुई थी. दिल्ली का रहने वाला अशफाक रविवार रात को ही मुस्तफाबाद लौट आया. इसी समय दिल्ली के मौजपुर और जाफराबाद में हालात खराब होना शुरू हुए थे.



जैसे ही हिंसा की खबर बुलंदशहर पहुंची, दूल्हा और दुल्हन के पिता बाकी सदस्यों के साथ एक दिन और वहीं रुक गए. तसलीन की आंटी शबाना नाज ने बताया कि लेकिन हमारे पास वहां उतने कपड़े नहीं थे, हम वापस आना चाहते थे.



पहली और आखिरी बार तसलीन-अशफाक ने साथ खाया था खाना 
जब तक तसलीन मंगलवार सुबह दिल्ली पहुंचीं तब तक गोकुलपुरी और मुस्तफाबाद में भी तनाव बढ़ गया था. मंगलवार को दोपहर दो बजे तसलीन ने खाना बनाया जिसे उसने और अशफाक ने पूरे परिवार के साथ खाया. इस दिन शादी के बाद पहली बार दोनों ने साथ खाना खाया था. शादी के माहौल में और अशफाक के पहले ही घर लौट आने के बाद दोनों साथ में बिल्कुल भी समय नहीं गुजार सके थे.

पेशे से इलेक्ट्रिशियन अशफाक को खाने के बाद फोन आया जिसके बाद वह घर से चले गए. पास के घर में बिजली की कुछ समस्या हो गई थी जिसके लिए उनकी जरूरत थी. तसलीन या उसके परिवार को इसकी क्या ही खबर थी कि वह दोबारा कभी घर नहीं लौटेगा.

इस तरह पिता को मिली बेटे की खबर
अशफाक को कथित तौर पर पास में ही गोली मार दी गई थी और उसके शव को उस जगह से दूर ले जाया गया. उसके परिवार को पता ही नहीं चला कि उसकी मौत हो गई है. सब्जी बेचने वाले अशफाक के पिता ने बताया कि मैं शाम की नमाज़ पढ़कर लौट रहा था तब पड़ोस के ही एक शख्स ने बताया कि उन्होंने मेरे बेटे को देखा है उसका खून बह रहा था और उसे अस्पताल ले जाया गया है.

अशफाक को न्यू मुस्तफाबाद के अल हिंद अस्पताल ले जाया गया जहां उसने आखिरी सांस ली. इसके बाद उसके शव को दिलशाद गार्डेन स्थित जीटीबी हॉस्पिटल ले जाया गया. परिवार को नहीं पता कि उन्हें अशफाक का शव कब मिलेगा और पोस्टमार्टम के बाद उसका अंतिम संस्कार कब किया जाएगा.

मदद के लिए नहीं आया कोई
स्थानीय लोगों के मुताबिक बंदूक, पेट्रोल बम और अन्य हथियार लिए हुए भीड़ रविवार रात से मंगलवार तक मुस्तफाबाद पहुंचती रही, मामला हाथ से निकल गया. अशफाक के चाचा मुख्तार अहमद ने बताया कि हम पुलिस को फोन करते रहे, लेकिन कोई नहीं आया. यहां तक कि बुधवार तक एंबुलेंस को भी वहां आने की इजाज़त नहीं मिली.

पास में ही एक धार्मिक ढांचा और एक स्कूल को जला दिया गया. मुस्तफाबाद की गलियों में कई मकान नेस्तनाबूद हो गए.

अंतिम संस्कार के इंतजार में
कुछ ही दूरी पर रहने वाली एक अन्य महिला अनम खान, अपने 24 वर्षीय भाई, शहजान खान के शव का इंतजार करते हुए काफी परेशान थीं, शहजान सोमवार से ही लापता था. बुधवार को उनके परिवार को पता चला कि उसका शव दिलशाद गार्डेन के पास गुरु तेग बहादुर अस्पताल में है.

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शहजान की मकानमालकिन कमलेश सिसोदिया ने बताया उन्हें लग रहा है जैसे उन्होंने अपना बेटा खो दिया. वह बहुत ही प्यारा बच्चा था, कभी किसी के साथ झगड़ा नहीं करता था. कमलेश सिसोदिया के इस दो मंजिला मकान में शहजान का परिवार पिछले पांच सालों से रह रहा था, डॉक्टर के उसे मृत घोषित करते ही शहजान का परिवार वहां इकट्ठा होने लगा.

अस्पताल के फोन से जगी थी उम्मीद
शहजान की बहन अनम के मुताबिक सोमवार दोपहर से ही वह लापता था. हमें नहीं पता था कि वह तीन दिन से कहां था. मंगलवार को हमें मालूम हुआ कि वह चोटिल है और उसे जीटीबी ले जाया गया है. उन्होंने कहा था इसलिए हमें आशा थी कि वह ठीक है. हालांकि बुधवार तक हमारी सारी आशाएं खत्म हो गईं जब अस्पताल ने उसकी मौत की पुष्टि कर दी. अशफाक के परिवार की तरह शहजान के पिता को भी उसकी मौत के कारणों का पता नहीं चल सका. शहजान के छह भाइयों में से एक ने कहा कि हम पोस्टमार्टम के बाद ही कुछ कह सकते हैं.

बुधवार को दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने इलाके का दौरा कर नुकसान का आकलन किया और लोगों को आश्वासन दिया. अरविंद केजरीवाल ने नुकसान की भरपाई का आश्वासन दिया. लेकिन गली में कई लोगों ने महसूस किया कि यह आश्वासन बहुत देरी से दिया गया और बहुत कम भी था.

नुकसान से बचा जा सकता था
बीएसईएस के एक पूर्व कर्मचारी और दो दशकों से गोकुलपुरी के निवासी सीपी सागर ने कहा कि सरकार और सुरक्षा बलों ने अगर समय पर कार्रवाई की होती तो नुकसान से बचा जा सकता था. शहज़ान की मकान मालकिन कमलेश, जो सालों से इलाके में रहती हैं ने माना कि हिंसा राजनीतिक रूप से प्रेरित थी. उन्होंने कहा, "हिंदू और मुसलमान दशकों से इस इलाके में साथ-साथ रह रहे है."

अशफाक और शहजान दोनों के ही परिवार इस समय उनके शवों का इंतजार कर रहे हैं. दोनों ही घरों में शोक सभा में शामिल होने के लिए स्थानीय हिंदू भी पहुंच रहे हैं.

अंधेरे में तसलीन का भविष्य
वहीं घर में अशफाक के पिता उसकी इलेक्ट्रॉनिक वर्कशॉप में बैठे रो रहे हैं. उन्होंने कहा कि हम चाहते हैं कि इस हिंसा में जो लोग भी अशफाक के साथ मारे गए हैं उन्हें शहीद का दर्जा दिया जाए. वह सरकार से हत्यारों से कड़ी से कड़ी सजा देने की उम्मीद करते हैं.

वहीं अशफाक की पत्नी तसलीन बुखार से तप रही हैं. मंगलवार से उन्होंने न एक बूंद पानी पिया है और न ही एक भी निवाला मुंह में डाला है, तसलीन को नहीं मालूम कि अशफाक के बाद उनका भविष्य क्या और कैसा होगा. तसलीन की आंटी का कहना है कि हम शव वापस भेजे जाने का इंतजार करेंगे, उसके बाद तसलीन के भविष्य पर कोई फैसला लेंगे.

उन्होंने कहा कि हम उसे हर दिन यूं मरता नहीं देख सकते.

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First published: February 28, 2020, 5:40 PM IST
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