India-China Rift: परिवार कर रहा था 40वें जन्मदिन के जश्न की तैयारियां, LAC पर शहीद हो गए हवलदार पाजानी

India-China Rift: परिवार कर रहा था 40वें जन्मदिन के जश्न की तैयारियां, LAC पर शहीद हो गए हवलदार पाजानी
शहीद हलवदार के. पाजानी (K Pazhani) तमिलनाडु के दक्षिणी जिले रामानाथपुरम के कद्दुकलियुर के रहने वाले थे.

India-China Rift: सेना में हलवदार के. पाजानी (K Pazhani) तमिलनाडु के दक्षिणी जिले रामानाथपुरम के कद्दुकलियुर के रहने वाले थे. इस घटना के कुछ दिन पहले वह अपने घर जाने वाले थे, लेकिन ये सीमा विवाद के कारण ये मुमकिन नहीं हो पाया.

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(पूर्णिमा मुरली)

चेन्नई. लद्दाख की गलवान घाटी (Galwan Valley) में वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर सोमवार रात को भारत और चीन (India-China Bloodiest Clash) के सैनिकों में हिंसक झड़प हुई थी. इसमें 18 बिहार रेजिमेंट के कमांडिंग ऑफिसर कर्नल संतोष बाबू समेत 20 जवान शहीद हो गए. LAC पर जान गंवाने वालों में तमिलनाडु के रहने वाले हलवदार के. पाजानी भी शामिल थे.

सेना में हलवदार के. पाजानी (K Pazhani) तमिलनाडु के दक्षिणी जिले रामानाथपुरम के कद्दुकलियुर के रहने वाले थे. इस घटना के कुछ दिन पहले वह अपने घर जाने वाले थे, लेकिन ये सीमा विवाद के कारण ये मुमकिन नहीं हो पाया. दरअसल, 3 जून को उनके नए घर का गृहप्रवेश था और इसी दिन पाजानी का 40वां जन्मदिन भी मनाया जाना था. परिवार ने सारी तैयारियां कर रखी थी, बस पाजानी के आने का इंतजार था. पाजानी तो नहीं आए, मगर उनके शहादत की खबर जरूर आ गई.



पाजानी आखिरी बार जनवरी में घर गए थे. मई के आखिरी हफ्ते में उन्होंने पत्नी वनती देवी को बताया था कि बॉर्डर पर हालात ठीक नहीं हैं. चीजें खराब होती जा रही हैं. उन्हें नए असाइनमेंट मिला है, जिसकी वजह से वह फिलहाल जल्दी घर नहीं आ सकेंगे.
8 शहीद हलवदार पाजानी के बच्चों को इसका अहसास भी नहीं था कि उनके पिता अब कभी नहीं आएंगे. जब News18 की टीम शहीद हवलदार के घर पहुंची, तो 8 साल की बेटी और 10 साल का बेटा घर के बाहर खेल रहे थे. हलवदार पाजानी के छोटे भाई भी सेना में हैं, उन्होंने ही परिवार को बड़े भाई के LAC पर शहीद होने की खबर दी थी. उनके बुजुर्ग माता-पिता बड़ी उत्सुकता से पाजानी के घर लौटने की प्रतीक्षा कर रहे थे. लेकिन अब ये इंतजार कभी खत्म नहीं होने वाला है.

किसान परिवार से आने वाले पाजानी ने महज 18 साल की उम्र में सेना ज्वॉइन कर ली थी. वह ग्रैजुएट थे और हमेशा से पढ़ने लिखने में अच्छे थे. उन्होंने 21 सालों तक भारतीय सेना में अपनी सेवा दी. पत्नी के मुताबिक, 'गृहप्रवेश में नहीं आ पाने का उन्हें दुख था. उन्होंने अगले साल आने का वादा किया था. मगर अब वो साल कभी नहीं आएगा.' शहीद हवलदार पाजानी का पार्थिव शरीर उनके घर पहुंच चुका है. आज उन्हें पूरे राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी जाएगी.

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