Home /News /nation /

OPINION: गडकरी के हालिया बयान हो सकते हैं बीजेपी की सोची समझी रणनीति!

OPINION: गडकरी के हालिया बयान हो सकते हैं बीजेपी की सोची समझी रणनीति!

नितिन गडकरी (फाइल फोटो)

नितिन गडकरी (फाइल फोटो)

नितिन गडकरी इस वक्त नए विवादों से घिर गए हैं. हाल ही में दिए गए उनके बयानों की राजनीतिक रूप से काफी चर्चा हो रही है.

  • News18.com
  • Last Updated :
    (वेंकटेश केसरी)

    नागपुर में जन्मे और संघ की शाखाओं में पले-बढ़े नितिन गडकरी संघ के काफी प्यारे हैं. हालांकि कुछ लोगों का कहना है कि उनके काम करने का तरीका काफी कुछ कांग्रेसी नेताओं जैसा है. लेकिन भारतीय जनता पार्टी के पूर्व अध्यक्ष अपनी हिंदुत्वादी विचारधारा को दिखाने में कभी भी पीछे नहीं हटते.

    लेकिन बीजेपी के दूसरे नेताओं के उलट गडकरी के दूसरी पार्टियों में भी दोस्त हैं. हालांकि, गडकरी इस वक्त नए विवादों से घिर गए हैं. हाल ही में दिए गए उनके बयानों की राजनीतिक रूप से काफी चर्चा हो रही है.

    बीजेपी की हार पर इशारों-इशारों में बोले गडकरी- नेतृत्व को हार की भी जिम्मेदारी लेनी चाहिए

    संघ के प्रिय गडकरी इस वक्त अपनी छवि ऐसी बनाना चाहते हैं जिस पर सभी एकमत हों. उनके इस बयान के बावजूद कि मीडिया उनकी बातों को तोड़ मरोड़ कर पेश कर रहा है, उनके बयानों को लेकर लगातार अटकलें लगाई जा रही हैं कि इसके पीछे मकसद क्या है. गडकरी के अंदर एक खास बात है कि विरोधियों से भी उनके संबंध काफी अच्छे हैं और बीजेपी को इस वक्त विरोधियों के समर्थन की काफी ज़रूरत है.

    अगर एक समय में अमित शाह और नरेंद्र मोदी के मजबूत व्यक्तित्व ने पार्टी को सत्ता में लाने में मदद की तो अब पार्टी को विपक्षी पार्टियों की भी ज़रूरत पड़ सकती है. हाल ही में मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में कांग्रेस की जीत ने बता दिया है कि बीजेपी कमज़ोर हो रही है और विपक्ष मज़बूत हो रहा है.

    ऐसे समय में जब टीडीपी, राष्ट्रीय लोक समता पार्टी ने एनडीए को छोड़ दिया है, शिवसेना भी लगातार इस बात की धमकी दे रही है कि वो बीजेपी का साथ छोड़ देगी, जनता दल (यू), लोजपा और अपना दल भी सीट शेयरिंग को लेकर लगातार जोड़-तोड़ मे लगे हुए हैं. ऐसी स्थिति में गडकरी का दूसरी पार्टी के नेताओं से व्यक्तिगत स्तर पर अच्छे संबंध होना बीजेपी के काफी काम आ सकता है. माना जाता है कि गडकरी ऐसे बीजेपी नेता हैं जिनके अरविंद केजरीवाल से लेकर ई पलानीस्वामी तक सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों से अच्छे संबंध हैं.

    हाल ही में यूपीए की अध्यक्ष सोनिया गांधी ने राय बरेली में उनके द्वारा किए गए काम को लेकर व्यक्तिगत स्तर पर उन्हें धन्यवाद दिया. महाराष्ट्र में भी शिवसेना और एनसीपी दोनों को ही उनसे कोई दिक्कत नहीं है.

    संयोग से हाल ही में बीजेपी लोकसभा सांसद नाना पटोले ने पार्टी छोड़ दी. राजू शेट्टी की अगुवाई वाली स्वाभिमानी पक्ष एनडीए छोड़ने वाली पहली सहयोगी पार्टी थी और ऐसा कोई दिन नहीं जाता जब शिवसेना का मुखपत्र सामना किसी भी दिन मोदी और अमित शाह पर हमले न बोलता हो.

    हाल के विधानसभा चुनावों ने बीजेपी को चौकन्ना कर दिया है. कर्नाटक विधानसभा चुनाव ने सिद्ध कर दिया है कि अगर बीजेपी के पास लोकसभा चुनाव के बाद सरकार बनाने के लिए ज़रूरी छह सीटें भी कम रहती हैं तो विपक्ष एकजुट हो जाएगा और बीजेपी को सत्ता में आने नहीं देगा. राजस्थान और मध्य प्रदेश में चुनाव हारने के बाद भी ऐसा लगता है कि शिवराज और वसुंधरा के व्यवहार में कोई बदलाव नहीं आया है.

    ट्रांसजेंडर को बच्चा हो सकता है लेकिन यह प्रोजेक्ट पूरा नहीं हो सकताः गडकरी

    आगे जो भी होगा, उसमे नितिन गडकरी की कितनी भूमिका होगी, कहा नहीं जा सकता लेकिन ऐसा लगता है कि गडकरी अपनी स्थिति के बारे में पता लगा रहे हैं जबकि बाकी नेता अभी इंतज़ार करके माहौल को भांपने की कोशिश कर रहे हैं.

    (लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं. व्यक्त किए गए विचार उनके निजी हैं.)

    Tags: Arun Jaitely, BJP, General Election 2019, Narendra modi, Nitin gadkari, Rajnath Singh

    विज्ञापन

    राशिभविष्य

    मेष

    वृषभ

    मिथुन

    कर्क

    सिंह

    कन्या

    तुला

    वृश्चिक

    धनु

    मकर

    कुंभ

    मीन

    प्रश्न पूछ सकते हैं या अपनी कुंडली बनवा सकते हैं ।
    और भी पढ़ें
    विज्ञापन

    टॉप स्टोरीज

    अधिक पढ़ें

    अगली ख़बर