‘Me Too’ मामला: अकबर की मानहानि शिकायत में पत्रकार रमानी ने बरी किए जाने का अनुरोध किया

अकबर द्वारा दायर की गयी शिकायत के मामले में रमानी की दलीलें शनिवार को पूरी हो गयी (फाइल फोटो)
अकबर द्वारा दायर की गयी शिकायत के मामले में रमानी की दलीलें शनिवार को पूरी हो गयी (फाइल फोटो)

अकबर द्वारा दायर की गयी शिकायत (complaint) के मामले में रमानी की दलीलें शनिवार को पूरी हो गयी. रमानी ने अपने वकील के जरिए अदालत (Court) को बताया कि लंबे समय से व्यवस्थागत गलतियों को सुधारने के लिए ‘मी टू’ मुहिम (Me Too Movement) की शुरूआत हुई थी.

  • भाषा
  • Last Updated: September 19, 2020, 8:38 PM IST
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नई दिल्ली. पत्रकार प्रिया रमानी (Journalist Priya Ramani) ने पूर्व केंद्रीय मंत्री एम जे अकबर (Former Union Minister MJ Akbar) द्वारा उनके खिलाफ दायर आपराधिक मानहानि (Criminal Defamation) की शिकायत में बरी किए जाने का अनुरोध किया है. रमानी ने कहा कि लोकतांत्रिक समाज में उन्हें बोलने और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता (Freedom of Speech and Expression) है और अकबर के खिलाफ यौन उत्पीड़न के आरोप उनका सच है. ‘मी टू’ मुहिम (Me Too Movement) के दौरान रमानी ने 2018 में अकबर पर करीब 20 साल पहले यौन उत्पीड़न (Sexual Harassment) का आरोप लगाया था, जब वह पत्रकार थे. अकबर ने 17 अक्टूबर 2018 को केंद्रीय मंत्री (Union Minister) के पद से इस्तीफा दे दिया था.

अकबर द्वारा दायर की गयी शिकायत (complaint) के मामले में रमानी की दलीलें शनिवार को पूरी हो गयी. रमानी ने अपने वकील के जरिए अदालत (Court) को बताया कि लंबे समय से व्यवस्थागत गलतियों को सुधारने के लिए ‘मी टू’ मुहिम (Me Too Movement) की शुरूआत हुई थी. उन्होंने कहा, ‘‘मी टू मुहिम ने दुनिया भर की हजारों महिलाओं को आगे आकर अपनी बात रखने और यौन उत्पीड़न (Sexual Harassment) की अपनी कहानियों को बताने का मंच दिया. व्यवस्थागत गलतियों को सुधारने के लिए ‘मी टू’ मुहिम की शुरूआत हुई. ’’

"मैंने अपना मामला साबित किया और बरी होने की हकदार हूं’’
रमानी की ओर से पेश अधिवक्ता रेबेका जॉन ने अतिरिक्त मुख्य मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट विशाल पाहूजा को बताया, ‘‘लोकतंत्र में वाक् और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता महत्वपूर्ण और स्वाभाविक है. मी टू मुहिम में हजारों महिलाओं ने हिस्सेदारी की. मैंने (रमानी) अपना मामला साबित किया और बरी होने की हकदार हूं.’’ वकील ने कहा कि रमानी ने अकबर के खिलाफ जो कहा वह ‘‘उनका सच है और उन्होंने लोगों के हित में कहा.’’
रमानी ने पहले क्यों नहीं अपनी आवाज उठायी, शिकायतकर्ता की इस दलील पर जॉन ने कहा कि जब घटना हुई थी उस समय ‘चुप रहने’ का दस्तूर था. उन्होंने कहा, ‘‘वह नहीं बोल पायीं क्योंकि उस समय चुप रह जाने का रिवाज था. गजाला वहाब (पत्रकार और मामले में गवाह, उन्होंने भी अकबर पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया था) ने भी कहा है कि कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न की शिकायत के लिए कोई तंत्र नहीं था.’’



अदालत मामले पर 13 अक्टूबर को सुनवाई करेगी
उन्होंने कहा, ‘‘विशाखा दिशा-निर्देश (कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न रोकने के लिए) 1993 में नहीं आया था. दिशा-निर्देश लागू होने के बाद भी न्यायपालिका और मीडिया को इसे लागू करने में लंबा समय लगा.’’ अदालत मामले पर 13 अक्टूबर को सुनवाई करेगी.

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अकबर ने अदालत को बताया था कि रमानी ने उनको बदनाम किया और उनकी प्रतिष्ठा को ठेस पहुंचायी. भाजपा नेता अकबर ने अपने खिलाफ यौन उत्पीड़न के सभी आरोपों से इनकार किया था.
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