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अयोध्या फैसले पर हमने दूसरे देशों को बता दिया कि ये हमारा आंतरिक मामला: विदेश मंत्रालय

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Updated: November 22, 2019, 7:18 PM IST
अयोध्या फैसले पर हमने दूसरे देशों को बता दिया कि ये हमारा आंतरिक मामला: विदेश मंत्रालय
नौ नवम्बर को सुप्रीम कोर्ट ने 2.77 एकड़ की पूरी विवादित जमीन राम लला को सौंपने के निर्देश दिये थे.

रवीश कुमार (Raveesh Kumar) ने कहा कि भारत ने अयोध्या फैसले (Ayodhya Verdict) पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले को लेकर दिल्ली में और अपने दूतावासों के जरिए कुछ देशों के साथ चर्चा की. उन्होंने कहा, ‘जिन लोगों के साथ इस मुद्दे पर चर्चा की गई, उस सभी से हमने कहा कि ये भारत का आंतरिक मामला है, और ये सुप्रीम कोर्ट का फैसला है, सुप्रीम कोर्ट शीर्ष अदालत है, और इसे इसी तरह देखना चाहिए.’

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  • Last Updated: November 22, 2019, 7:18 PM IST
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नई दिल्ली. विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार (Raveesh Kumar) ने कहा कि भारत ने अयोध्या फैसले (Ayodhya Verdict) के बारे में दूसरे देशों को संतोषजनक ढंग से समझाया है और इस मामले में किए गए प्रयास 'व्यापक रूप से सफल’ रहे हैं. कुमार ने गुरुवार को कहा, ‘विदेश मंत्रालय (EAM) का काम है कि अगर भारत में कोई महत्वपूर्ण घटना होती है तो हम दूसरों के साथ इस पर चर्चा करे, और अगर राजनयिक समुदाय की तरफ से कोई अनुरोध किया जाता है- हमसे पूछा जाता है कि क्या हुआ और ऐसा क्यों हुआ- तो हमारा काम है कि हम उनके साथ बात करें और अपना नजरिया रखें.’

कुमार ने कहा कि भारत ने अयोध्या फैसले (Ayodhya Verdict) पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले को लेकर दिल्ली में और अपने दूतावासों के जरिए कुछ देशों के साथ चर्चा की. उन्होंने कहा, ‘जिन लोगों के साथ इस मुद्दे पर चर्चा की गई, उस सभी से हमने कहा कि ये भारत का आंतरिक मामला है, और ये सुप्रीम कोर्ट का फैसला है, सुप्रीम कोर्ट शीर्ष अदालत है, और इसे इसी तरह देखना चाहिए.’ कुमार ने कहा, ‘मेरी जानकारी के मुताबिक हमें कहीं से कोई भी ऐसी टिप्पणी नहीं, जिससे हमें यह सोचना पड़ता कि हमने इस बारे में उन्हें पर्याप्त ढंग से नहीं समझाया. हमारी भागीदारी व्यापक रूप से सफल रही.’

 नौ नवम्बर को सुप्रीम कोर्ट ने दिया फैसला
बता दें कि गत नौ नवम्बर को सुप्रीम कोर्ट ने सर्वसम्मति के फैसले में 2.77 एकड़ की पूरी विवादित जमीन राम लला को सौंपने के निर्देश दिये थे. सुप्रीम कोर्ट ने केन्द्र को निर्देश दिया था कि मस्जिद निर्माण के लिये सुन्नी वक्फ बोर्ड को पांच एकड़ का भूखंड आवंटित किया जाए. हालांकि अब मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दाखिल दाखिल करने का ऐलान किया है. हालांकि दूसरे मुस्लिम पक्ष जैसे सुन्नी वक्फ बोर्ड ने खुद को इस मामले से अलग करते हुए कहा है कि वह अब इस मामले को और नहीं खीचेंगे और सुप्रीम कोर्ट के फैसले का सम्मान करेंगे.

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First published: November 22, 2019, 7:17 PM IST
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