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भारत की चीन को दो टूक- जम्मू-कश्मीर और लद्दाख भारत का आंतरिक मामला, न दें दखल

News18Hindi
Updated: October 31, 2019, 5:40 PM IST
भारत की चीन को दो टूक- जम्मू-कश्मीर और लद्दाख भारत का आंतरिक मामला, न दें दखल
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने चीन को दिया जवाब

जम्मू-कश्मीर (Jammu Kashmir) और लद्दाख (Ladakh) को लेकर दिए गए चीन (China) के प्रवक्ता के बयान पर भारत के विदेश मंत्रालय (Ministry of External Affairs) के प्रवक्ता रवीश कुमार (Raveesh Kumar) ने जवाब दिया है. उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख भारत का अभिन्न अंग है हम उम्मीद करते हैं कि अन्य देश भारत (India) की संप्रुभता और अखंडता का सम्मान करेंगे.

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  • Last Updated: October 31, 2019, 5:40 PM IST
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नई दिल्ली. चीन (China) के प्रवक्ता के जम्मू-कश्मीर (Jammu Kashmir) पर दिए गए बयान पर विदेश मंत्रालय ने जवाब दिया है. विदेश मंत्रालय ने कहा है कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख (Ladakh) को केंद्रशासित प्रदेश का दर्जा देना भारत का अंदरूनी मामला है. विदेश मंत्रालय ने चीन को दो टूक कहा है कि भारत के अंदरूनी मामलों में चीन समेत अन्य देशों को दखल नहीं देना चाहिए. विदेश मंत्रालय ने कहा है कि कश्मीर मामले (Kashmir Issue) पर भारत की स्थिति के बारे में चीन को जानकारी है. उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख भारत का अभिन्न अंग हैं. हम उम्मीद करते हैं कि अन्य देश भारत की संप्रुभता और अखंडता का सम्मान करेंगे.

आपको बता दें जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के कुछ हिस्सों पर चीन का भी कब्ज़ा है. चीन ने 1963 के तथाकथित चीन-पाकिस्तान सीमा समझौते के तहत पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में अवैध रूप से भारतीय क्षेत्रों पर कब्जा किया हुआ है. विदेश मंत्रालय ने कहा कि पाक अधिकृत कश्मीर में CPEC कॉरिडोर (China–Pakistan Economic Corridor) पर भी हमने पाकिस्तान और चीन से ऐतराज़ जताया है.

MEA: We expect other countries to respect India's sovereignty&territorial integrity.China continues to be in occupation of a large tract of area in UTs of J-K,& Ladakh. It has illegally acquired Indian territories from PoK under so called China-Pakistan boundary agreement of 1963 pic.twitter.com/MVGvmXP7V0




CPEC पर चिंता जता चुका है भारत
उन्होंने कहा कि भारत ने चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे की परियोजनाओं पर चीन और पाकिस्तान दोनों को लगातार अपनी चिंताओं से अवगत कराया है. बता दें चीन और पाकिस्तान इस इकोनॉमिक कॉरिडोर का निर्माण पीओके में कर रहे हैं जहां 1947 से पाकिस्तान ने अवैध रूप से कब्जा किया हुआ है.
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जहां तक कि सीमा का संबंध है, भारत और चीन राजनीतिक मापदंडों और मार्गदर्शक सिद्धांतों के आधार पर शांतिपूर्ण परामर्श के माध्यम से इस मुद्दे पर उचित, और पारस्परिक रूप से स्वीकार किए जाने वाले समाधान की तलाश करने के लिए 2005 में सहमत हुए थे. इसे इसी महीने की शुरुआत में चेन्नई में भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच द्वितीय भारत-चीन अनौपचारिक शिखर सम्मेलन में भी दोहराया गया था. दोनों ही पक्ष सीमा क्षेत्र में शांति और सौहार्द बनाए रखने के लिए भी सहमत हुए हैं.

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First published: October 31, 2019, 5:06 PM IST
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