मक्का मस्जिद ब्लास्ट: असीमानंद सहित सभी आरोपियों को बरी करने वाले जज, रवींद्र रेड्डी ने दिया इस्तीफा

Mecca Masjid Blast Case: मक्का मस्जिद में 18 मई 2007 को जुमे की नमाज के दौरान एक बड़ा धमाका हुआ था, जिसमें नौ लोगों की मौत हो गई थी और 58 अन्य जख्मी हो गए थे.

News18Hindi
Updated: April 17, 2018, 10:11 AM IST
मक्का मस्जिद ब्लास्ट: असीमानंद सहित सभी आरोपियों को बरी करने वाले जज, रवींद्र रेड्डी ने दिया इस्तीफा
एनआईए जज के रवींद्र रेड्डी ने इस्तीफे के पीछे निजी कारणों को वजह बताया है...
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Updated: April 17, 2018, 10:11 AM IST
हैदराबाद की प्रसिद्ध मक्का मस्जिद में वर्ष 2007 में हुए धमाकों के मामले में दक्षिणपंथी नेता स्वामी असीमानंद सहित सभी पांच आरोपियों को बरी करने वाले जज ने इस्तीफा दे दिया. एनआईए की विशेष अदालत के जज के. रवींद्र रेड्डी ने इस फैसले के बाद कुछ घंटे बाद अपने पद से इस्तीफा दे दिया.

रेड्डी ने अपने इस्तीफे के पीछे निजी कारणों को वजह बताया है और कहा कि इसका आज के फैसले से कोई लेना देना नहीं है. एक वरिष्ठ न्यायिक अधिकारी के मुताबिक, रेड्डी ने कहा कि वह काफी वक्त से इस्तीफा देने पर विचार कर रहे थे.हालांकि उनके इस कदम के वक्त ने कई सवाल जरूर खड़े कर दिए हैं.

बता दें कि मक्का मस्जिद में 18 मई 2007 को जुमे की नमाज के दौरान एक बड़ा धमाका हुआ था, जिसमें नौ लोगों की मौत हो गई थी और 58 अन्य जख्मी हो गए थे.

इस मामले में स्वामी असीमानंद, देवेंद्र गुप्ता, लोकेश शर्मा, स्वामी असीमानंद उर्फ नब कुमार सरकार, भरत मोहनलाल रतेश्वर उर्फ भरत भाई और राजेंद्र चौधरी को आरोपी बनाया गया था. कोर्ट ने इस सभी को बरी करते हुए कहा कि अभियोजन पक्ष उनके खिलाफ मामला साबित करने में नाकाम रहा है.

ऑल इंडिया मजलिसे इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने ट्वीट कर कहा कि वह इस फैसले से हैरान है. उन्होंने ट्वीट कर लिखा, 'मक्का मस्जिद धमाके के सभी आरोपियों को बरी करने का फैसला सुनाने वाले जज का इस्तीफा बेहद चौकाने वाला है और मैं उनके इस फैसले से हैरान हूं.'



इस मामले की शुरुआती जांच स्थानीय पुलिस ने की थी और फिर इसे सीबीआई को स्थानांतरित कर दिया गया था. इसके बाद 2011 में देश की प्रतिष्ठित आतंकवाद रोधी जांच एजेंसी एनआईए को यह मामला सौंपा गया.

इस धमाके में दक्षिणपंथी संगठनों से कथित संपर्क रखने वाले 10 लोग आरोपी बनाए गए थे. बहरहाल, उनमें से आज बरी हुए पांच आरोपियों पर ही मुकदमा चला था. मामले के दो अन्य आरोपी संदीप वी डांगे और रामचंद्र कलसांगरा फरार हैं और एक अन्य आरोपी सुनील जोशी की हत्या कर दी गई है. वहीं बाकी दो आरोपियों के खिलाफ जांच जारी है.

इस मामले की सुनवाई के दौरान 226 चश्मदीदों से पूछताछ की गई और करीब 411 दस्तावेज पेश किए गए. हालांकि अभियोजन पक्ष कोई पुख्ता सबूत पेश करने में नाकाम रहा, जिससे उनका जुर्म सिद्ध हो सके. (भाषा इनपुट के साथ)
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