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Analysis: कांग्रेस पर कंट्रोल का मास्‍टरप्‍लान हो सकती है राहुल की कंबोडिया यात्रा

Analysis: कांग्रेस पर कंट्रोल का मास्‍टरप्‍लान हो सकती है राहुल की कंबोडिया यात्रा

कांग्रेस में राहुल गांधी खेमे के युवा नेता पार्टी छोड़ने से पहले कार्यकारी अध्‍यक्ष्‍ज्ञ सोनिया गांधी खेमे के वरिष्‍ठ नेताओं पर तानाशाही रवैया अपनाने का आरोप लगा रहे हैं.

कांग्रेस में राहुल गांधी खेमे के युवा नेता पार्टी छोड़ने से पहले कार्यकारी अध्‍यक्ष्‍ज्ञ सोनिया गांधी खेमे के वरिष्‍ठ नेताओं पर तानाशाही रवैया अपनाने का आरोप लगा रहे हैं.

कांग्रेस (Congress) में युवा नेताओं (Young Leaders) का विद्रोह मौजूदा कार्यकारी अध्‍यक्ष सोनिया गांधी (Sonia Gandhi) की अपने बेटे को फिर पार्टी अध्‍यक्ष बनाने की महत्‍वाकांक्षा को पूरा करने में मदद कर सकता है. कांग्रेस का अपना आकलन कह रहा है कि विधानसभा चुनावों (State Elections) में पार्टी का सूपड़ा साफ हो जाएगा, जबकि सोनिया ने चुनावों का पूरा जिम्‍मा पुराने नेताओं (Old Guard) को सौंप रखा है. चुनावी हार के बाद राहुल गांधी (Rahul Gandhi) और उनकी युवा टीम को कांग्रेस पर पूरी तरह से नियंत्रण हासिल करने में आसानी होगी.

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    पल्‍लवी घोष

    नई दिल्‍ली. कांग्रेस के पूर्व अध्‍यक्ष राहुल गांधी (Rahul Gandhi) के विपश्यना के लिए कंबोडिया (Cambodia) जाने की खबर ने पार्टी के अंदर हलचल पैदा कर दी है. मुश्किल वक्‍त में राहुल गांधी के अचानक ध्‍यान के लिए चले जाने के कारण कांग्रेस के युवा नेताओं में भ्रम की स्थिति है. इस समय कांग्रेस के भीतर काफी उठापटक चल रही है. राहुल गांधी धड़े के अशोक तंवर, संजय निरुपम और प्रद्योत देबबर्मन कांग्रेस के पुराने नेताओं (Old Guard) पर तानाशाही रवैया अपनाने का आरोप लगा रहे हैं. उनका कहना है कि मौजूदा कार्यकारी अध्‍यक्ष सोनिया गांधी (Sonia Gandhi) के खेमे के नेता राहुल गांधी के सहयोगी नेताओं के साथ ज्‍यादती कर रहे हैं.

    युवा नेताओं को अंधेरे में नजर आ रहा है सियासी भविष्‍य
    कांग्रेस (Congress) में राहुल गांधी खेमे के अशोक तंवर ने पार्टी छोड़ने से पहले कहा, 'मेरा मसीहा ही मेरा कातिल है.' उनका कहना था कि उन्‍हें राहुल गांधी ने चुना था और अब पूर्व सीएम भूपिंदर हुड्डा (BS Hooda) युवा नेता होने के कारण उन्‍हें निशाना बना रहे हैं. पार्टी में ऐसी उठपटक के बीच राहुल गांधी का अचानक देश छोड़कर चले जाना युवा कांग्रेसी नेताओं (Young Leaders) के लिए चौंकाने वाला था. उनका कहना है कि राहुल गांधी न सिर्फ विधानसभा चुनावों (State Elections) की सरगर्मियों के बीच कंबोडिया गए हैं, बल्कि ऐसे समय में उन्‍होंने विपश्‍यना के लिए जाने का फैसला किया है जब उनकी टीम मुश्किल में है. पार्टी के साथ ऐसे हालात में भी खड़े कई युवा नेता नाराज हैं. उन्‍हें अपना राजनीतिक भविष्‍य अंधेरे में नजर आ रहा है.

    'जल्‍द लौटकर चुनाव प्रचार में शामिल होंगे राहुल गांधी'
    सवाल यह उठता है कि राहुल गांधी कांग्रेस के युवा और बुजुर्ग खेमे में चल रही खींचतान के बीच कंबोडिया क्‍यों गए? पार्टी के अंदरूनी झगड़ों के सार्वजनिक होने के बाद भी वह खामोश क्‍यों हैं? राहुल गांधी के कार्यालय के सूत्रों का कहना है कि वह जल्‍द लौटकर विधानसभा चुनाव के प्रचार (Campaign) में शामिल होंगे. हालांकि, इस बार वह पार्टी की ओर से मुख्‍य प्रचारक नहीं होंगे. वह लोकसभा चुनाव (Lok Sabha Elections) की तरह एक के बाद एक दौरे और जनसभाएं नहीं करेगे. सूत्रों का कहना है कि कांग्रेस के युवा नेताओं को राहुल गांधी से अब भी उम्‍मीदें हैं, लेकिन इस बार उन्‍हें थोड़ा इंतजार करना पड़ेगा.

    कांग्रेस का नेतृत्‍व हाथ में लेने के दौरान पूर्व पीएम इंदिरा गांधी का भी तब के वरिष्‍ठ नेताओं ने विरोध किया था.


    'पिछली बार भी बढ़ी थी वरिष्‍ठ नेताओं की बेचैनी'
    सूत्रों का कहना है कि जब इंदिरा गांधी (Indira Gandhi) पार्टी का नेतृत्‍व संभालने वाली थीं, तब भी कांग्रेस के वरिष्‍ठ नेताओं ने काफी मुश्किलें खड़ी की थीं. कांग्रेस में उनका भी विरोध हुआ था. इस बार राहुल की मां का खेमा ही चुनौतियां पेश कर रहा है. इसमें कुछ भी नया नहीं है. पिछली बार भी जब राहुल गांधी ने पार्टी का नेतृत्‍व संभाला था, तब कांग्रेस के वरिष्‍ठ नेताओं की बेचैनी बढ़ गई थी. पार्टी के बुजुर्ग नेताओं ने समय-समय पर राहुल गांधी के साथ और उनके विचारों को लेकर काम करने में असहजता को लेकर सार्वजनिक बयान भी दिए थे. पार्टी के युवा और वरिष्‍ठ खेमे में तब भी टकराव की स्थिति पैदा हुई थी, जब राहुल ने युवा कांग्रेसियों को ज्‍यादा टिकट देने पर जोर दिया.

    वरिष्‍ठ नेताओं ने राहुल की रणनीति मानने से किया था इनकार
    कांग्रेस के कई नेता चाहते थे कि राहुल गांधी लोकसभा चुनाव के प्रचार के दौरान राफेल (Rafale) को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) पर किसी तरह का हमला न करें. यहां तक कि कांग्रेस के कई वरिष्‍ठ नेताओं ने इस मुद्दे को लेकर सोशल मीडिया (Social Media) पर भी लिखने से इनकार कर दिया था. कांग्रेस के चुनाव प्रचार से जुड़े रहे एक व्‍यक्ति ने बताया कि हमने एक व्‍हाट्सऐप ग्रुप बनाया था. हर सुबह हम उन्‍हें मैसेज भेजते थे, लेकिन उन्‍होंने ध्‍यान देना भी जरूरी नहीं समझा. कुछ वरिष्‍ठ नेताओं का कहना था कि राफेल के बजाय पीएम मोदी पर भ्रष्‍टाचार (Corruption) को लेकर हमला किया जाना बेहतर रहेगा. हालांकि, राहुल को लगा कि अंत में पार्टी नेता अपने अध्‍यक्ष की तय रणनीति पर काम करेंगे.

    सोनिया ने पुराने नेताओं को आगे आने का मौका क्‍यों दिया?
    लोकसभा चुनाव 2019 (Lok Sabha Elections 2019) के नतीजे राहुल गांधी को तगड़ा झटका देने वाले रहे. इसके बाद उन्‍होंने अध्‍यक्ष पद से इस्‍तीफा दे दिया. सूत्रों के मुताबिक, उन्‍हें महसूस हुआ कि कांग्रेस के वरिष्‍ठ नेता कभी भी उनके साथ नहीं थे. यहां तक कि प्रियंका गांधी (Priyanka Gandhi) और सोनिया गांधी (Sonia Gandhi) ने इस मसले पर नाराजगी जताई थी. फिर ऐसा क्‍या हुआ कि सोनिया गांधी ने कांग्रेस के वरिष्‍ठ नेताओं को आगे आने का मौका दिया? आखिर क्‍यों पार्टी के युवा नेताओं को मौका दिया जा रहा है. शायद सोनिया गांधी चाहती हैं कि इस बार राहुल गांधी को वापस लाने की मांग पार्टी के भीतर से उठनी चाहिए.

    महाराष्‍ट्र में टिकट बंटवारे पर उंगली उठाने के चलते जहां संजय निरुपम का सियासी भविष्‍य अधर में है, वहीं अगर हरियाणा में कांग्रेस हारती है तो भूपिंदर हुड्डा की राजनीतिक पारी का अंत हो जाएगा.


    हरियाणा की हार से हो जाएगा हुड्डा की सियासी पारी का अंत
    राहुल गांधी अगर विधानसभा चुनावों के बाद फिर कांग्रेस अध्‍यक्ष बनना स्‍वीकार करते हैं तो इस बार पार्टी के भीतर पुराने नेताओं का हस्‍तक्षेप पूरी तरह से खत्‍म हो जाएगा. बता दें कि इस समय युवा नेता पुराने नेताओं पर हमला करते हुए कांग्रेस छोड़ रहे हैं. सोनिया गांधी और राहुल गांधी इसका इस्‍तेमाल उन वरिष्‍ठ नेताओं पर हमला करने के लिए कर सकते हैं, जिन्‍होंने उन्‍हें कभी खुलकर काम नहीं करने दिया. इस सब में सोनिया गांधी अहम भूमिका निभा सकती हैं. कांग्रेस के अपने पूर्वानुमान के मुताबिक, हरियाणा (Haryana) और महाराष्‍ट्र (Maharashtra) विधानसभा चुनाव में पार्टी का सूपड़ा साफ होगा. हरियाणा में पार्टी की हार से हुड्डा (Hooda) की सियारी पारी का अंत हो जाएगा.

    ऐसे खुलेगी युवा नेताओं के पार्टी में आगे आने की राह
    संजय निरुपम (Sanjay Nirupama) ने सोनिया गांधी की टीम पर सीधा हमला किया है. वहीं, टिकट बंटवारे को लेकर शिकायत करने के कारण उनका सियासी भविष्‍य अधर में लटक गया है. महाराष्‍ट्र के खराब नतीजे राहुल गांधी और उनकी टीम को निरुपम पर हमला करने का मौका देंगे. विधानसभा चुनावों में सोनिया गांधी ने पूरी जिम्‍मेदारी पार्टी के वरिष्‍ठ नेताओं को सौंप दी है. चुनावी हार राहुल गांधी और उनकी टीम को पार्टी को नियंत्रण में लेने की राह खोल देगी. माना जाता है कि राहुल गांधी के नेतृत्‍व में कांग्रेस की दुर्दशा का सबसे बड़ा कारण पार्टी का दो खेमों में बंटना है. इस सब के बीच कहा जा सकता है कि राहुल गांधी का कंबोडिया में ध्‍यान उनकी दूसरी पारी की धीमी शुरुआत है.

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    Tags: Congress, Haryana Assembly Election 2019, Maharashtra Assembly Election 2019, Politics, Rahul gandhi, Sonia Gandhi

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