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Positive India: मिलिए बिक्रमजीत बौलिया से, ऐसे पूरी कर रहे हैं कोरोना मरीजों की फरमाइश

बिक्रमजीत बौलिया (News18)

जब से बिक्रमजीत बौलिया (जो खुद को बाउल गायक बताते हैं) ने अपने फेसबुक पेज पर पोस्ट किया कि वह कोविड -19 रोगियों के लिए गाना चाहते हैं और उन्हें कुछ खुशी के क्षण देना चाहते हैं, तब से अब तक उनके पास 250 ऐसे अनुरोध आ चुके हैं. बिक्रमजीत ने उन सभी के लिए गाना गाया है.

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    (निलॉय भट्टाचार्या)

    सुबह के आठ बज रहे थे जब बिक्रमजीत बौलिया (Bikramjit Baulia) को एक अनजान नंबर से कॉल आई. 'ट्रू कॉलर' ऐप ने कॉलर की पहचान अनुपम बरभुयान के रूप में की. अनुपम कुछ दिन पहले ही कोविड नेगेटिव हुए थे और संक्रमण के बाद की परेशानियों जैसे अवसाद, थकान और सिर दर्द से जूझ रहे थे. अनुपम ने बिक्रमजीत से फोन पर उनके लिए गाने का अनुरोध किया. ये अनुरोध एक बंगाली लोक गीत के लिए था. 33 वर्षीय बिक्रमजीत बौलिया ने अनुपम बरभुयान के लिए हसन राजा की रचनाएं- "बोकुल फुल" और सुबीर नंदी की "माएर अधिकार" गाया. जैसा कि एक बार बीथोवेन ने ठीक ही कहा था, "संगीत दुनिया को बदल सकता है." ये बात अनुपम के लिए भी सच साबित हुई. बिक्रमजीत के गाए गानों ने उनकी मन की स्थिति को बदल दिया.

    जब से बिक्रमजीत बौलिया (जो खुद को बाउल गायक बताते हैं) ने अपने फेसबुक पेज पर पोस्ट किया कि वह कोविड -19 रोगियों के लिए गाना चाहते हैं और उन्हें कुछ खुशी के क्षण देना चाहते हैं, तब से अब तक उनके पास 250 ऐसे अनुरोध आ चुके हैं. बिक्रमजीत ने उन सभी के लिए गाना गाया है.

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    NEWS 18 से बात करते हुए बिक्रमजीत बौलिया कहते हैं, 'कोरोना लॉकडाउन के पहले फेज में लोग समाज से कटकर और कमरे में बंद होकर तनावग्रस्त हो गए थे. ये अमूमन हर घर की कहानी थी. होम आइसोलेशन ने तो उनके डिप्रेशन को और बढ़ा दिया. ऐसे में मैंने कोरोना रोगियों की कुछ मदद करने की सोची. मैं कुछ ऐसा करना चाहता था, जिससे उन्हें खुशी के कुछ पल मिलें और मुश्किल समय में कुछ मदद मिल सके. एक हफ्ते पहले मैंने फेसबुक पर प्रसिद्ध बांग्ला गायिका लोपामुद्रा मित्रा की एक पोस्ट मिली, जहां उन्होंने कोविड प्रभावितों के लिए गाने की इच्छा जाहिर की थी. इससे प्रेरित होकर मैंने भी एक पोस्ट दिया, जिसमें मैंने डिटेल्स शेयर की और कहा कि मैं कोरोना मरीजों की खुशी के लिए गाना चाहता हूं.'

    क्लासिकल सिंगिंग की ट्रेनिंग ले चुके बिक्रमजीत अभी लोकगीत गाते हैं, मगर यहां तक पहुंचने के लिए उन्होंने कोलकाता में काफी संघर्ष किया. उन्होंने कई बार सिंगिंग टैलेंट हंट शो में ऑडिशन दिया, लेकिन आगे का रास्ता नहीं बन पाया. आखिरकार वो असम के सिलचर लौट आए और अभी मेडिकल स्टोर चलाते हैं. हालांकि, संगीत को कभी छोड़ नहीं पाए. वो हमेशा उनके साथ रहा.


    बिक्रमजीत बताते हैं पहले दो दिनों में किसी ने भी उनके फेसबुक पेज पर कोई रिस्पॉन्स नहीं दिया. मेरे दोस्तों को पूरा भरोसा था कि कोई भी गाना सुनने के लिए मुझे फोन नहीं करेगा. लेकिन, मैंने उम्मीद नहीं छोड़ी थी. चौथे दिन मेरे पास एक बुजुर्ग महिला की कॉल आई, जो हाल ही में कोरोना से रिकवर हुई थीं. उन्होंने मुझसे एक गाने की गुजारिश की. मेरा गाना सुनकर उन्होंने कहा कि वो अच्छा महसूस कर रही हैं.

    बिक्रमजीत के मुताबिक, बराक वैली, कोलकाता, रांची और यहां तक कि मुंबई से भी उनके पास कॉल आती हैं. लोग उनसे गाना गाने की फरमाइश करते हैं. बिक्रमजीत मोबाइल फोन पर ही गाना गाकर उनकी गुजारिश पूरी करते हैं.


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    बिक्रमजीत बताते हैं, 'एक 82 साल की बुजुर्ग महिला मुझे रोजाना कॉल करती हैं और गाने की फरमाइश करती हैं. ये फरमाइशें कभी बांग्ला गाने के लिए होती है, तो कभी हिंदी गीत के लिए भी. मैं रोज उनके लिए मोबाइल पर गाना गाता हूं.'

    बिक्रमजीत संगीत के क्षेत्र में बड़ा मुकाम हासिल करना चाहते थे, उन्हें शायद ही इस बात का अहसास हो कि वह संगीत के अपने जुनून के साथ कुछ महान कर रहे हैं. जैसा कि ठीक ही कहा गया है, "जो गाता है वह बीमारियों को दूर भगाता है."