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चेन्नई के इस शख्स ने NASA की तस्वीरों में खोजा विक्रम लैंडर का मलबा, चंद्रयान-2 को बताया सफल मिशन

News18Hindi
Updated: December 3, 2019, 12:13 PM IST
चेन्नई के इस शख्स ने NASA की तस्वीरों में खोजा विक्रम लैंडर का मलबा, चंद्रयान-2 को बताया सफल मिशन
शानमुगा सुब्रमण्यन चेन्नई में मैकेनिकल इंजीनियर हैं.

अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा (NASA) ने अपने बयान में कहा, '26 सितंबर को क्रैश साइट की एक तस्‍वीर जारी की गई थी और Chandrayaan-2 के विक्रम लैंडर के सिग्नल्स की खोज करने के लिए लोगों को बुलाया गया था. चेन्नई के 33 वर्षीय मैकेनिकल इंजीनियर शनमुगा सुब्रमण्यन (Shanmuga Subramanian) ही वो पहले शख्स हैं, जिन्होंने मलबे की पहचान की.'

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  • Last Updated: December 3, 2019, 12:13 PM IST
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नई दिल्ली. भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के महात्वाकांक्षी मिशन चंद्रयान (Chandrayaan-2) के लैंडर विक्रम (Vikram Lander) का मलबा आखिरकार ढूंढ लिया गया है. अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा के लूनर रिकनैसैंस ऑर्बिटर (LRO) ने चांद की सतह पर विक्रम लैंडर का मलबा तलाशा. नासा ने विक्रम का मलबा ढूंढने का क्रेडिट चेन्नई के एक मैकेनिकल इंजीनियर शनमुगा सुब्रमण्यन को दिया है. शनमुगा सुब्रमण्यन ने इसरो के मिशन चंद्रयान-2 को सफल बताया है.

नासा ने अपने बयान में कहा, '26 सितंबर को क्रैश साइट की एक तस्‍वीर जारी की गई थी और विक्रम लैंडर के सिग्नल्स की खोज करने के लिए लोगों को बुलाया गया था.' नासा ने आगे बताया, 'चेन्नई के 33 वर्षीय मैकेनिकल इंजीनियर शनमुगा सुब्रमण्यन ही पहले वो शख्स हैं, जिन्होंने मलबे की पहचान की.'



नासा ने आगे कहा, 'शनमुगा सुब्रमण्यन ने ही हमारे LRO प्रोजेक्ट से संपर्क किया. उन्होंने मुख्य क्रैश साइट के उत्तर-पश्चिम में लगभग 750 मीटर की दूरी पर स्थित मलबे की पहचान की थी. यह पहले मोजेक (1.3 मीटर पिक्सल, 84 डिग्री घटना कोण) में एक एकल उज्ज्वल पिक्‍सल पहचान थी.'
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शानमुगा सुब्रमण्यन ने ऐसे ढूंढा विक्रम का मलबा
न्यूज़ एजेंसी AFP से बात करते हुए शनमुगा सुब्रमण्यन उर्फ शान ने बताया, 'नासा ने 14 -15 अक्टूबर और 11 नवंबर को 2 तस्वीरें जारी की थीं. मैं अपने दोनों लैपटॉप पर 2 तस्वीरों की साइड-बाइ-साइड तुलना कर रहा था... एक तरफ विक्रम लैंडर की पुरानी तस्वीर थी, दूसरी ओर नई फोटो थी, जो नासा ने जारी की थी. मुझे ट्विटर और रेडिट यूजर्स से काफी मदद मिली.4-5 दिन तक करीब 7-8 घंटे में इस काम में देता था.'



उन्होंने कहा, 'ये बहुत कठिन था लेकिन मैं कोशिश करता रहा. नतीजे पर पहुंचने के बाद मैंने 3 अक्टूबर को ट्विटर पर इसका ऐलान किया.' हालांकि, जानकारी सार्वजनिक करने से पहले नासा 100 फीसदी आश्वस्त होना चाहता था. इसलिए ये जानकारी देने से पहले इंतजार किया गया. इस दौरान नासा ने खुद फैक्ट चेकिंग की. पूरी तरह से आश्वस्त होने के बाद 3 दिसंबर को नासा ने ट्वीट करके विक्रम लैंडर का मलबा मिलने की जानकारी दी. साथ ही शनमुगा सुब्रमण्यन को इसका क्रेडिट भी दिया.



शनमुगा सुब्रमण्यन का कहना है कि नासा द्वारा अपने दम पर लैंडर को खोजने में असमर्थता ने ही उनकी रुचि जगा दी. उन्होंने AFP से बातचीत के दौरान कहा, 'मैंने विक्रम लैंडर को ढूंढने के लिए कड़ी मेहनत की. मैं बेहद खुश हूं. मेरी हमेशा से स्पेस साइंस में दिलचस्पी रही है. मैं कभी भी किसी उपग्रह के लॉन्च को मिस नहीं करता हूं.'




चंद्रयान-2 एक सफल मिशन था
CNN-News18 से बात करते हुए शनमुगा सुब्रमण्यन ने बताया, 'मेरी राय में चंद्रयान-2 मिशन सफल था. बेशक विक्रम लैंडर का क्रैश होना दुखदायी है.... लेकिन इससे आम लोग भी इसरो और लैंडर के बारे में जानने लगे और बात करने लगे.... ये एक पॉजिटिव चीज है.'

सुब्रमण्यन आगे बताते हैं, 'मुझे बहुत खुशी हो रही है कि नासा ने मेरे योदगान को क्रेडिट दिया.... मैंने अपने ऑब्जर्बेशन के लिए नासा की तस्वीरों का इस्तेमाल किया था. चांद पर मलबे की पहचान करना बेहद मुश्किल है. कई बार की कोशिशों के बाद भी मैं सिर्फ एक मलबे की पहचान कर पाया.' बता दें कि शनमुगा सुब्रमण्यन उर्फ शान मदुरै के रहने वाले हैं. इससे पहले वह कॉन्निजेंट जैसी कंपनियों में भी काम कर चुके हैं.

इम्पैक्ट साइट पर 750 मीटर दूर मिले विक्रम के टुकड़े
नासा ने रात करीब 1:30 बजे चंद्रयान-2 (Chandrayaan-2) के विक्रम लैंडर (Vikram Lander) के इम्पैक्ट साइट की तस्वीर जारी की है. नासा ने बताया कि उसके ऑर्बिटर को विक्रम लैंडर के तीन टुकड़े मिले हैं. ये टुकड़े 2x2 पिक्सेल के हैं.

नासा की ओर से जारी फोटो में नीले और हरे डॉट्स के जरिये विक्रम लैंडर के मलबे के दिखाया गया है. तस्वीर में दिख रहा है कि चांद की सतह पर जहां विक्रम लैंडर गिरा वहां मिट्टी को नुकसान भी हुआ है.


ISRO ने मांगी रिपोर्ट
न्यूज़ एजेंसी एएफपी के मुताबिक, भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने नासा ने विक्रम लैंडर के मलबे से जुड़ी डिटेल जानकारी मांगी है. नासा जल्द ही इससे जुड़ी रिपोर्ट सौंपेगा.

बता दें कि इसरो ने 22 जुलाई को श्रीहरिकोटा के सतीश धवन स्पेस स्टेशन से अपने महात्वाकांक्षी मिशन चंद्रयान-2 को लॉन्च किया था. 7 सितंबर को इसके लैंडर विक्रम की चांद के साउथ पोल पर सॉफ्ट लैंडिंग होनी थी. हालांकि, लैंडिंग के कुछ मिनट पहले विक्रम का ग्राउंड स्टेशन से संपर्क टूट गया. बाद में विक्रम के हार्ड लैंडिंग की खबर आई. अगर मिशन चंद्रयान-2 सफल हो जाता, तो भारत अमेरिका, रूस और चीन के बाद ऐसा चौथा देश बन जाता, जिसने चांद के साउथ पोल पर सॉफ्ट लैंडिंग की है. (एजेंसी इनपुट के साथ)



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First published: December 3, 2019, 10:31 AM IST
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