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महबूबा मुफ्ती की बेटी का बीजेपी पर तंज- PDP से इतनी दिक्कत तो क्यों किया था गठबंधन?

News18Hindi
Updated: February 10, 2020, 11:29 AM IST
महबूबा मुफ्ती की बेटी का बीजेपी पर तंज- PDP से इतनी दिक्कत तो क्यों किया था गठबंधन?
जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती के खिलाफ पीएसए लगाया गया है.

इल्तिजा मुफ्ती (Iltija Mufti) ने आरोप लगाया कि सरकार के डोजियर में महबूबा मुफ्ती (Mehbooba Mufti) की पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (PDP) के झंडे पर हरे रंग का जिक्र करते हुए उसे उग्रता दर्शाने वाला बताया गया है.

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  • Last Updated: February 10, 2020, 11:29 AM IST
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श्रीनगर. जम्मू-कश्मीर (Jammu Kashmir) की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती (Mehbooba Mufti) पर जन सुरक्षा कानून (Public Saftey Act) लगाए जाने पर उनकी बेटी इल्तिजा मुफ्ती (Iltija Mufti) ने बीजेपी पर निशाना साधा है. इल्तिजा ने आरोप लगाया कि सरकार के डोजियर में महबूबा मुफ्ती की पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (PDP) के झंडे पर हरे रंग का जिक्र करते हुए उसे उग्रता दर्शाने वाला बताया गया है. महबूबा की बेटी ने बीजेपी पर तंज कसते हुए कहा है कि आखिर इतनी ही दिक्कत थी तो बीजेपी ने पहले पीडीपी के साथ गठबंधन कर सरकार क्यों बनाई?

इल्तिजा मुफ्ती ने महबूबा मुफ्ती के ट्विटर हैंडल से पूर्व सेनाध्यक्ष जनरल बिपिन रावत, पीडीपी और जेडीयू के झंडों की तस्वीर शेयर करते हुए लिखा कि 'पीडीपी के मूल को संदिग्ध बताया गया है. पार्टी के हरे रंग के झंडा को उग्रता दर्शाने वाला कहा गया है. भारतीय सेना के अधिकारी हरे रंग की वर्दी पहनते हैं और उनके वाहन भी हरे रंग के होते हैं. क्या वे भी कट्टरपंथी हैं?' इसके साथ ही उन्होंने सवाल किया कि अगर पीडीपी का मूल संदिग्ध है तो बीजेपी ने उसके साथ मिलकर सरकार क्यों बनाई.


इसके बाद उन्होंने लिखा कि बीजेपी के सहयोगी जेडीयू का झंडा देखिए. इल्तिजा ने लिखा, 'मैं हैरान हूं कि उनके झंडे में हरे रंग का क्या मतलब है. क्या एक पार्टी विश्वसनीय और राष्ट्रवादी तभी ही होगी जब वो बीजेपी के सहयोगी के तौर पर साथ देगी.'



इल्तिजा ने इसके बाद एक और ट्वीट किया और लिखा, उनका आरोप है कि पीडीपी का चिह्न मुस्लिम यूनाइटेड फ्रंट से लिया गया है, जिसने 1987 में जम्मू-कश्मीर चुनावों में भाग लिया था. पार्टी के चुनाव चिह्न को चुनाव आयोग से स्वीकृत मिली है. क्या इस तरह से वह चुनाव आयोग के निर्णय को गलत बताने की कोशिश कर रहे हैं.



गौरतलब है कि जम्मू-कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा देने वाले अनुच्छेद 370 के ज्यादातर प्रावधानों को समाप्त करने और राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेशों में बांटने के केंद्र सरकार के पांच अगस्त के फैसले के बाद नेताओं, अलगाववादियों, कार्यकर्ताओं और वकीलों समेत हजार से अधिक लोगों को हिरासत में लिया गया था.

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First published: February 10, 2020, 11:03 AM IST
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