भगोड़े मेहुल चोकसी की भारतीय नागरिकता अभी भी समाप्त नहीं हुई है, डोमिनिका कोर्ट में हलफनामा

मेहुल चोकसी पर डोमिनिका में अवैध तरीके से प्रवेश करने के आरोप हैं. (AP/4 June, 2021)

Mehul Choksi Case: मेहुल चोकसी ने 2017 में एंटीगुआ एंड बारबुडा की नागरिकता ले ली थी और जनवरी 2018 के पहले हफ्ते में भारत से भाग गया था.

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    नई दिल्ली. भारतीय अधिकारियों ने डोमिनिका हाईकोर्ट से कहा है कि भगोड़े हीरा कारोबारी मेहुल चोकसी की भारतीय नागरिकता अभी भी समाप्त नहीं हुई है और भारतीय नागरिकता के त्याग का उनका दावा भारत में कानूनों के विपरीत है क्योंकि यह पूरी तरह से गलत है. चोकसी के प्रत्यर्पण की कोशिश में जुटे भारतीय अधिकारियों ने हाईकोर्ट में दाखिल अपने हलफनामे में यह जानकारी दी है.


    इसके साथ ही अधिकारियों ने कहा कि क्योंकि भारतीय नागरिकता को लेकर हाईकोर्ट में मेहुल चौकसी द्वारा झूठा बयान दिया गया, ऐसे में उसका दावा फर्जी है. डोमिनिका में स्थित भारतीय उच्चायोग के कांसुलर ऑफिसर द्वारा दायर हलफनामे में कहा गया कि मेहुल चोकसी एक भारतीय नागरिक है और भारतीय नागरिकता के त्याग के लिए उसका आवेदन खारिज कर दिया गया था.


    मेहुल चोकसी अब भी भारतीय नागरिक
    भारत सरकार पहले ही एंटीगुआ सरकार द्वारा दी गई मेहुल चोकसी की नागरिकता को रद्द करने का मुद्दा उठा चुकी है. हलफनामें में यह बताया गया है कि क्योंकि वह भारत में किए गए अपराध की जांच के लिए कानूनी प्रवर्तन एजेंसियों द्वारा वांछित था और इसीलिए उसने एंटीगुआ की नागरिकता धोखाधड़ी से हासिल की थी. भारतीय अधिकारियों द्वारा डोमिनिका हाईकोर्ट में दाखिल हलफनामे में स्पष्ट तौर पर कहा गया है कि भगोड़ा हीरा कारोबारी मेहुल चोकसी अब भी भारतीय नागरिक है और नागरिकता अधिनियम, 1955 के तहत भारतीय नागरिकता के त्याग का उसका दावा पूरी तरह से गलत है.


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    इससे पहले बीते 12 जून को भगोड़े हीरा कारोबारी मेहुल चोकसी को लेकर केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने डोमिनिका हाईकोर्ट को बताया था कि 2018 में उसके खिलाफ भारत में गिरफ्तारी वारंट जारी किया गया था, लेकिन वह पहले ही वहां से भाग निकला. सीबीआई ने अदालत को इस बात से भी अवगत कराया कि चोकसी ने इस बारे में कोर्ट को झूठी जानकारी दी है कि जिस वक्त उसने भारत छोड़ा था, उस समय उसके खिलाफ वहां कोई कार्यवाही नहीं चल रही थी.


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    मेहुल चोकसी को जमानत देने से डोमिनिका उच्च न्यायालय का इनकार
    बीते 11 जून को डोमिनिका उच्च न्यायालय ने पड़ोसी एंटीगुआ और बारबुडा से रहस्यमय परिस्थितियों में गायब होने के बाद द्वीपीय देश में अवैध रूप से घुसने के मामले में भगोड़ा हीरा कारोबारी मेहुल चोकसी को जमानत देने से इनकार कर दिया था. चोकसी 2018 से एंटीगुआ और बारबुडा में नागरिक के तौर पर रह रहा है. समाचार संस्थान एंटीगुआ न्यूजरूम की खबर के अनुसार उच्च न्यायालय ने शुक्रवार (स्थानीय समयानुसार) को अपने फैसले में कहा कि चोकसी के ‘भागने का खतरा’ है. चोकसी ने मजिस्ट्रेटी अदालत द्वारा जमानत याचिका खारिज किये जाने के बाद उच्च न्यायालय का रुख किया था.

    क्या है पूरा मामला
    गीतंजलि जेम्स और भारत में अन्य मशहूर हीरा आभूषण ब्रांडों का मालिक चोकसी पंजाब नेशनल बैंक में 13,500 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी सामने आने से कुछ सप्ताह पहले ही देश से फरार हो गया था. मामले में चोकसी और उसके भांजे नीरव मोदी की कथित संलिप्तता का खुलासा हुआ था. नीरव मोदी लंदन की एक जेल में बंद है और वह भारत प्रत्यर्पित किए जाने के खिलाफ मुकदमा लड़ रहा है. चोकसी ने 2017 में एंटीगुआ एंड बारबुडा की नागरिकता ले ली थी और जनवरी 2018 के पहले हफ्ते में भारत से भागने के बाद वह बतौर नागरिक यहां रह रहा था. इसके बाद ही यह घोटाला सामने आया था. दोनों ही (नीरव मोदी और मेहुल चोकसी) सीबीआई जांच का सामना कर रहे हैं.

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