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वायु प्रदूषण से कमजोर हो रही है आपकी याददाश्त, रिसर्च में आया सामने

पूरे दिल्ली-एनसीआर को धुंध और कोहरे ने जकड़ रखा है. (File Photo)

विश्व स्वास्थ्य संगठन (World Health Organisation) ने अपने एक रिसर्च (Research) में दावा किया है कि वायु प्रदूषण (Air Pollution) का असर हमारी याददाश्त (Memory) पर भी पड़ता है और बढ़ते प्रदूषण के साथ यह कमजोर होती जाती है.

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    जिनेवा (स्विट्जरलैंड). विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि वायु प्रदूषण (Air Pollution) का असर इंसानी स्मरणशक्ति (Memory) पर भी होता है. इस रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि दुनिया की 91% आबादी ऐसे स्थानों पर रहती है जहां हवा की क्वालिटी (Air Quality) इंसानों के लिए खतरनाक स्तर पर है. इन लोगों पर वायु प्रदूषण का सबसे ज्यादा असर होने का खतरा है.

    विश्व स्वास्थ्य संगठन (World Health Organisation) की इस रिपोर्ट में वायु प्रदूषण (Air Pollution) को इंसानी स्वास्थ्य (Human Health) के लिए बड़ा खतरा बताया गया है.

    दुनिया के केवल 9% लोगों को मिलती है स्वच्छ वायु
    आंकड़ों के मुताबिक दुनियाभर में वायु प्रदूषण से हर साल 70 लाख लोगों की मौत हो जाती है. वहीं यह भी सामने आया है कि दिल के दौरे (Heart Attacks) से होने वाली 24% मौतों और दिल की कुल बीमारियों से होने वाली अन्य 25% मौतों के लिए भी प्रदूषित हवा ही जिम्मेदार है.

    रिपोर्ट में बताया गया है कि केवल दुनिया की 9% आबादी ही प्रदूषित हवा की जद से बाहर है. यह जानकारियां वार्विक विश्वविद्यालय (University of Warwick) की एक नई रिसर्च में सामने आई हैं. जिसमें बताया गया है कि वायु प्रदूषण से ह्रदयाघात, दमा, ह्रदय रोग, आंख, कैंसर और ऐसी कई बीमारियां हो जाती हैं. हालांकि इन सारी जानकारियों में सबसे चौंकाने वाली जो बात निकल कर आई है वो स्मरणशक्ति या याददाश्त से जुड़ी है. इस रिसर्च में दावा किया गया है कि वायु प्रदूषण से इंसानी याददाश्त (Memory) को भी नुकसान पहुंचता है.

    ये दो तत्व हैं याददाश्त के नुकसान की वजह
    इस रिसर्च से पता चला है कि प्रदूषित हवा में मौजूद नाइट्रोजन डाईऑक्साइड (Nitrogen dioxide) और पीएम10 (PM10) का बढ़ता हुआ स्तर इस तरह से याददाश्त के कमजोर पड़ने के लिए जिम्मेदार है. वार्विक विश्वविद्यालय ने यह रिसर्च इंग्लैंड (England) के लोगों पर की है. रिसर्चर्स का अनुमान तो यह भी है कि इंग्लैंड में ही सबसे साफ हवा वाले इलाकों और सबसे प्रदूषित हवा वाले इलाकों में रहने वाले लोगों की याददाश्त के बीच 10 सालों तक का अंतर हो सकता है.

    यह शोध (Research) इंग्लैंड के 34,000 लोगों पर किया गया. इसमें शामिल लोगों को शब्द याद करने की परीक्षा के आधार पर परखा गया. इन्हें 10-10 शब्द याद करने को दिए गए. इन अलग-अलग उम्र, स्वास्थ्य, शिक्षा के स्तर और जातीयता आदि का भी ध्यान रखा गया. इससे सामने आया कि नाइट्रोजन डाइऑक्साइज और पार्टिकुलेट मैटर (PM 10) की अधिकता वाले इलाकों में लोगों की याददाश्त कम थी. वार्विक विश्वविद्यालय (University of Warwick) के एंड्रयू ओसवाल्ड ने बताया, "वायु प्रदूषण (Air Pollution) याददाश्त को बुरी तरह से प्रभावित कर रहा है, जो कि चिंता का विषय है. हमने जब प्रदूषित क्षेत्र में रहने वाली 50 साल की एक शख्स को वाक्य याद करने को कहा तो उसकी याददाश्त गैर-प्रदूषित क्षेत्र में रहने वाली 60 साल की महिला जितनी पाई गई."

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