#MeToo कैंपेन किसी को बदनाम करने का अभियान न बने- दिल्ली हाईकोर्ट

कोर्ट ने कहा- बार-बार एक ही लेख को छापने से पुरुष की निजता का हनन हो रहा है

News18Hindi
Updated: May 17, 2019, 10:24 PM IST
#MeToo कैंपेन किसी को बदनाम करने का अभियान न बने- दिल्ली हाईकोर्ट
फाइल फोटो
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Updated: May 17, 2019, 10:24 PM IST
मी टू कैंपेन को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट ने शुक्रवार को बड़ी टिप्पणी की. कोर्ट ने कहा कि यह कैंपेन के तहत लग रहे आरोप किसी को बदनाम करने का अभियान नहीं बनना चाहिए. अपने एक आदेश में कोर्ट ने कहा कि यौन उत्पीड़न की शिकायतों में जिसमें शिकायतकर्ता का नाम गुमनाम रहे, ऐसे लेखों को पब्लिश कर मी टू कैंपेन को एक नई हवा देना पुरुष की निजता का हनन है.

अधिकारों पर खतरा


एक मीडिया हाउस के मैनेजिंग डायरेक्टर के खिलाफ मामला दायर किया गया था जिसमें एक ही आर्टिकल को दोबारा पब्लिश किया गया था. ऐसे में जस्टिस प्रतिभा एम सिंह ने कहा कि इन आर्टिकल को बार बार पब्लिश नहीं किया जा सकता है. उन्होंने कहा कि मी टू कैंपेन किसी को बदनाम करने का कैंपेन नहीं बन सकता. ऐसे आर्टिकल को बार बार प्रकाशित करने से याचिकाकर्ता के अधिकार गंभीर रूप से खतरे में पड़ जाएंगे.

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गौरतलब है कि हाईकोर्ट में दायर शिकायत के अनुसार याचिकाकर्ता ने कहा था कि एक वेब पोर्टल ने बार बार उसके खिलाफ आर्टिकल पब्लिश किए हैं. वह मीडिया का एक जाना माना चेहरा है और आधारहीन आरोपों के चलते उसे काफी प्रताड़ना और दुख झेलना पड़ा है. गौरतलब है कि मामला आने के बाद 14 दिसंबर को ही हाईकोर्ट ने लेखों पर रोक लगा दी थी.

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