#Metoo: कोर्ट ने दिया एमजे अकबर को झटका, जज बोले- सीता की रक्षा के लिए लड़ा था जटायु

कोर्ट ने अपना फैसला सुनाते हुए कहा कि यौन शोषण आत्मसम्मान और आत्मविश्वास को खत्म कर देता है.

कोर्ट ने अपना फैसला सुनाते हुए कहा कि यौन शोषण आत्मसम्मान और आत्मविश्वास को खत्म कर देता है.

#Metoo: कोर्ट के फैसले पर खुशी जाहिर करते हुए प्रिया रमानी ने कहा, 'मैं कोर्ट के फैसले से मैं बहुत खुश हूं. मेरी सच्चाई को कुचलने की कोशिश की जा रही थी लेकिन कानून ने अपना काम सही तरीके से किया.'

  • News18Hindi
  • Last Updated: February 17, 2021, 7:56 PM IST
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नई दिल्ली. पूर्व केंद्रीय मंत्री एमजे अकबर की आपराधिक मानहानि की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिल्ली की एक अदालत ने पत्रकार प्रिया रमानी (Priya Ramani Me too Case) को आरोपों से बरी कर दिया है. साथ ही अदालत ने एमजे अकबर की याचिका भी खारिज कर दी. बुधवार को हुई सुनवाई में कोर्ट ने कहा कि किसी भी महिला को 20 साल बाद भी उसके साथ हुए दुर्व्यवहार को बताने का हक है. कोर्ट ने कहा कि जिस देश में महिलाओं के सम्मान के बारे में रामायण और महाभारत लिखी गई, वहां महिलाओं के खिलाफ अपराध हो रहे हैं, यह शर्म की बात है.

रामायण के अरण्य कांड का उदाहरण देते हुए जज ने कहा कि सीता की रक्षा के लिए जटायु पक्षी रावण से लड़ा था. रामायण का एक अन्य उदाहरण देते हुए जज ने कहा कि जब लक्ष्मण से सीता के बारे में पूछा कहा गया तो उन्होंने कहा कि चरणों से ऊपर तो उन्होंने कभी देखा नहीं. उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कार में महिलाओं के प्रति श्रद्धा आवश्यक है.

रमानी ने अकबर के खिलाफ यौन उत्पीड़न के आरोप लगाए थे, जिसे लेकर अकबर ने उनके खिलाफ 15 अक्टूबर 2018 को मानहानि का मामला दर्ज कराया था. अतिरिक्त मुख्य मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट रवींद्र कुमार ने अकबर और रमानी के वकीलों की दलीलें पूरी होने के बाद एक फरवरी को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था.

कोर्ट ने फैसले से खुश हैं प्रिया रमानी
कोर्ट के फैसले पर खुशी जाहिर करते हुए प्रिया रमानी ने कहा, 'कोर्ट के फैसले से मैं बहुत खुश हूं. मेरी सच्चाई को कुचलने की कोशिश की जा रही थी, लेकिन कानून ने अपना काम सही तरीके से किया.' उन्होंने कहा, 'अदालत में आरोपी के रूप में पीड़िता को ही खड़ा होना होता है. मेरे साथ खड़े रहने वाले सभी लोगों का मैं शुक्रिया अदा करती हूं, खासतौर पर मेरी गवाह गजाला वहाब, जो अदालत में आईं और मेरी ओर से गवाही दी.'


2019 में शुरू हुआ था केस



मुकदमा 2019 में शुरू हुआ और लगभग दो साल तक चला. 2017 में, रमानी ने वोग के लिए एक लेख लिखा, जहां उन्होंने नौकरी के साक्षात्कार के दौरान एक पूर्व बॉस द्वारा यौन उत्पीड़न किए जाने के बारे में बताया. एक साल बाद, उन्होंने खुलासा किया कि लेख में उत्पीड़न करने वाला व्यक्ति एमजे अकबर था.

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अकबर ने अदालत को बताया था कि प्रिया रमानी के आरोप काल्पनिक थे और इससे उनकी प्रतिष्ठा पर ठेस पहुंची. दूसरी ओर, प्रिया रमानी ने इन दावों का समर्थन करते हुए कहा कि उन्होंने ये आरोप सार्वजनिक हित में लगाए हैं. मामले में यह निर्णय महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह इसी तरह के समान मामलों के लिए एक मिसाल कायम करता है, जो मीटू आंदोलन से उत्पन्न हुआ है.


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