कोलकाता मेट्रो के कई प्रोजेक्ट अधर में, रेलवे के रिव्यू में ममता सरकार पर लगे ये आरोप

सूत्रों के मुताबिक रेलवे बोर्ड ने अपनी रिव्यू मीटिंग में राज्य सरकार को इसके लिए कसूरवार पाया है, जो रेलवे को सहयोग करने की जगह रोड़े अटका रही है.

Chandan Kumar | News18India
Updated: July 10, 2019, 6:20 PM IST
कोलकाता मेट्रो के कई प्रोजेक्ट अधर में, रेलवे के रिव्यू में ममता सरकार पर लगे ये आरोप
कोलकाता मेट्रो के कई प्रोजेक्ट लटके.
Chandan Kumar | News18India
Updated: July 10, 2019, 6:20 PM IST
पश्चिम बंगाल सरकार से सहयोग नहीं मिलने के कारण कोलकाता मेट्रो से जुड़े कई प्रोजेक्ट्स अधर में अटके हुए हैं. खास बात ये है कि इनमें से कई प्रोजेक्ट्स पर 70 फीसदी तक काम भी पूरा हो चुका है. लेकिन आलम ये है कि रेलवे ने पश्चिम बंगाल सरकार से सहयोग नहीं मिलने के कारण कोलकाता मेट्रो की पांच लाइनें बनाने की योजना ही रद कर दी है. इन नई लाइनों पर ज़मीनी स्तर पर कोई काम नहीं हो रहा था.

जमीन अधिग्रहण बड़ी रुकावट
एक तरफ उत्तर पूर्व की सभी राजधानियों को 2020 तक ब्रॉडगेज लाइन से जोड़ने की योजना पर भारतीय रेल तेज़ी से काम कर रही है. वो असम, अरुणाचल और त्रिपुरा की राजधानियों तक रेलवे की बड़ी लाइन पहुंचा चुका है. लेकिन सिक्किम की राजधानी गंगटोक तक रेलवे लाइन पहुंचाने में बड़ी अड़चन पश्चिम बंगाल से आ रही है. यहां ज़मीन अधिग्रहण के मुद्दे ने रेलवे की योजना को बड़ा झटका दिया है. वहीं अब ये मसला और आगे बढ़ चुका है. कोलकाता मेट्रो को चलाने वाली भारतीय रेल ने मेट्रो की चार नई लाइनों की योजना पर ही ब्रेक लगा दिया है. इन लाइनों पर आज तक कोई काम नहीं हो पाया है.


रेलवे के रिव्यू में राज्य सरकार ज़िम्मेदार
सूत्रों के मुताबिक रेलवे बोर्ड ने अपनी रिव्यू मीटिंग में राज्य सरकार को इसके लिए कसूरवार पाया है, जो रेलवे को सहयोग करने की जगह रोड़े अटका रही है. कोलकाता मेट्रो की कई बड़ी परियोजनाएं इसी तरह छोटी-छोटी वजहों से अधर में अटकी हुई हैं. रेलवे का मानना है कि राज्य सरकार अगर सहयोग करे तो इन योजनाओं को जल्दी पूरा किया जा सकता है.

इन लाइनों पर अटका हुई है काम
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साढ़े पांच किलोमीटर लंबी न्यू गरिया से हेमेंद्र मुखर्जी लाइन पर 65 फीसदी काम पूरा हो चुका है लेकिन यह ज़मीन अधिग्रहण के मुद्दे पर फंसी हुई है. इसी तरह क़रीब 7 किलोमीटर लंबी नाओपारा- NSCB एयरपोर्ट लाइन का 50 फ़ीसदी काम पूरा हो चुका है. लेकिन यह भी ज़मीन अधिग्रहण के मुद्दे पर अटकी हुई है.



इसी तरह जोखा से माजेरहाट तक 9 किलोमीटर लंबी लाइन पर 70 फ़ीसदी काम पूरा हो चुका है लेकिन यहां डिपो के लिए 25 हेक्टेयर ज़मीन नहीं मिलने से काम पूरा नहीं हो पाया है. 10 किमी लंबी हेमेंद्र मुखर्जी से सॉल्टलेक सेक्टर-5 लाइन पर भी 40 फ़ीसदी काम पूरा हो चुका है लेकिन यहां ट्रैफ़िक डॉयइवर्ज़न जैसी कुछ छोटी वजहों से काम रुका हुआ है.



कोलकाता मेट्रो का विस्तार बाक़ी कई जगहों पर भी अटका हुआ है. माना जा रहा है कि अगर राज्य सरकार पूरी मदद करे तो इनमें से कई अड़चनों को दूर किया जा सकता है.

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First published: July 10, 2019, 5:23 PM IST
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