महाराष्ट्र, J&K सहित 4 राज्यों में गंभीर रेडिकलाइजेशन बढ़ा, की जाएगी स्टडी

नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर जीएस बाजपेई की अगुवाई में ये अध्ययन किया जाएगा. फोटो : एएनआई
नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर जीएस बाजपेई की अगुवाई में ये अध्ययन किया जाएगा. फोटो : एएनआई

नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी (National Law University) के रजिस्ट्रार और क्रिमिनोलॉजी एंड क्रिमिनल जस्टिस के प्रोफेसर जीएस बाजपेई (GS Bajpai) की अगुवाई में ये अध्ययन किया जाएगा.

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  • Last Updated: November 21, 2020, 7:24 PM IST
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नई दिल्ली. देश में रेडिकलाइजेशन के विश्लेषण के लिए गृह मंत्रालय (Home Ministry) ने शनिवार को अध्ययन की अनुमति दे दी. इस अध्ययन का मकसद ये पता लगाना है कि रेडिकलाइजेशन (Radicalization) का व्यावहारिक हल क्या है? इसे कैसे रोका जा सकता है? और किस तरह गैर-क़ानूनी गतिविधियाँ (रोकथाम) कानून में सुधार किया जा सकता है?

'भारत में रेडिकलाइजेशन की स्थिति' शीर्षक से इस अध्ययन को नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी (National Law University) के रजिस्ट्रार और क्रिमिनोलॉजी एंड क्रिमिनल जस्टिस के प्रोफेसर जीएस बाजपेई (GS Bajpai) की अगुवाई में किया जाएगा.

बाजपेई के मुताबिक अध्ययन में रेडिकलाइजेशन की प्रक्रिया पर फोकस किया जाएगा. साथ ही रेडिकलाइजेशन के अनुयायियों और युवाओं को टारगेट किए जाने का भी अध्ययन किया जाएगा. इस अध्ययन को महाराष्ट्र, असम, केरल और जम्मू-कश्मीर जैसे राज्यों में किया जा सकता है, इन चारों राज्यों में गंभीर रेडिकलाइजेशन के मामले रिपोर्ट किए गए हैं. इन राज्यों के लिए खास तौर पर टीमें गठित की जाएंगी.



इन राज्यों में टीमें रेडिकलाइजेशन को रोकने के लिए स्थानीय पुलिस द्वारा उठाए गए कदमों का अध्ययन करेंगी. बाजपेई ने कहा कि हमारी कोशिश एक पॉलिसी डॉक्युमेंट बनाने की है, जिससे देश में रेडिकलाइजेशन से निपटने के लिए व्यवस्थित नियम-कानून विकसित करने में मदद मिल सके.
क्रिमिनल जस्टिस के प्रोफेसर ने कहा कि मौजूदा समय में रेडिकलाइजेशन की कोई स्पष्ट कानूनी परिभाषा नहीं है. अध्ययन से मिली जानकारियों के आधार पर UAPA एक्ट में संशोधन के सुझाव दिए जाएंगे.

बाजपेई ने ANI से कहा, 'ये अध्ययन भारत में रेडिकलाइजेशन की स्थिति को लेकर है. अध्ययन में ये विश्लेषण किया जाएगा कि रेडिकलाइजेशन का पैटर्न और गतिविधियां क्या हैं. साथ ही रेडिकलाइजेशन के अनुयायियों और उनके द्वारा युवाओं को टारगेट किए जाने की प्रक्रिया का भी अध्ययन किया जाएगा.'

उन्होंने कहा कि अध्ययन में इस बात पर भी फोकस रखा जाएगा कि किस तरह के व्यक्ति रेडिकलाइजेशन के टारगेट हो सकते हैं. इन टारगेट्स को रेडिकलाइजेशन के अनुयायी बेहद चुनिंदा तरीके से टारगेट करते हैं और इसका भी अध्ययन किया जाएगा.

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प्रोफेसर बाजपेई ने कहा कि हमारी दिलचस्पी डी-रेडिकलाइजेशन के विचार में है. रेडिकलाइजेशन को काउंटर करने के लिए हमें डी-रेडिकलाइजेशन (De-Radicalisation) का ब्लू प्रिंट तैयार करना है. उन्होंने कहा कि हम UAPA Act का खासतौर पर अध्ययन कर रहे हैं ताकि रेडिकलाइजेशन और डी-रेडिकलाइजेशन में अंतर कर सकें.

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उन्होंने कहा कि सभी राज्यों से लगभग 75 रेडिकलाइजेशन को मानने वाले व्यक्तियों, जो डी-रेडिकलाइजेशन की प्रक्रिया में हैं, उनसे बात की जाएगी और सैंपल तैयार किए जाएंगे. इसी तरह सुरक्षा एजेंसियों के 75 अधिकारी और जजों से बात कर सैंपल तैयार किए जाएंगे.

साथ ही हर राज्य के उन व्यक्तियों के 50 रिश्तेदारों, मनोवैज्ञानिकों, साइको-सोशल कार्यकर्ताओं, काउंसलर्स, धार्मिक और सामाजिक नेताओं से भी बात की जाएगी.
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