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गृह मंत्रालय ने संसद में पहली बार किया ऐलान- देश भर में NRC का फिलहाल नहीं कोई प्लान

News18Hindi
Updated: February 4, 2020, 12:31 PM IST
गृह मंत्रालय ने संसद में पहली बार किया ऐलान- देश भर में NRC का फिलहाल नहीं कोई प्लान
एनआरसी की शुरुआत साल 2013 में सुप्रीम कोर्ट की देख-रेख में असम में हुई थी.

राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC) एक ऐसा रजिस्टर है, जिसमें भारत में रह रहे सभी वैध नागरिकों की डिटेल दर्ज होगी. इसकी शुरुआत साल 2013 में सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) की देख-रेख में असम में हुई थी.

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  • Last Updated: February 4, 2020, 12:31 PM IST
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नई दिल्ली. देश के विभिन्न हिस्सों में नागरिकता कानून (CAA) और NRC के खिलाफ चल रहे विरोध प्रदर्शनों के बीच गृह मंत्रालय (MHA) ने साफ किया है कि उनकी राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC) लाने की फिलहाल कोई योजना नहीं है. गृह राज्यमंत्री नित्यानंद राय ने मंगलवार को लोकसभा में एक लिखित जवाब में ये जानकारी दी. उन्होंने बताया, 'अभी तक देशव्यापी एनआरसी को लेकर सरकार ने कोई फैसला नहीं लिया है.' यह पहला मौका है जब संसद में आधिकारिक रूप से यह बात कही गई है.

इसके पहले केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने राज्यसभा में ऐलान किया था कि राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) प्रक्रिया को पूरे देश में लागू किया जाएगा. इस दौरान उन्होंने दावा किया कि धर्म के आधार पर कोई भेदभाव नहीं होगा. शाह के इस बयान के बाद पूर्वोत्तर के कई राज्यों में एनआरसी को लेकर हिंसक विरोध प्रदर्शन हुए थे. असम, त्रिपुरा और बंगाल में सबसे ज्यादा हिंसा हुई थी.

लोगों को डिटेंशन सेंटर भेजे जाने का डर
दरअसल, एनआरसी को लेकर लोगों में डर का माहौल है, खासकर मुस्लिम समुदाय और पूर्वोत्तर राज्यों में रह रहे लोग इससे खासे भयभीत हैं. लोगों को डर है कि अगर वे अपनी नागरिकता साबित नहीं कर पाए, तो उन्हें देश से बाहर भेज दिया जाएगा. फिर वे अपना सब कुछ छोड़कर कहां जाएंगे? वहीं, लोगों को डिटेंशन सेंटर भेजे जाने का भी डर है. पहले ऐसी चर्चा थी कि नागरिकता साबित करने में फेल रहने वाले लोगों को अलग रखने के लिए सरकार की ओर से डिटेंशन सेंटर बनवाए जा रहे हैं. असम, महाराष्ट्र और यूपी के अंबेडकर नगर में ऐसे डिटेंशन सेंटर बनाने की चर्चा है. हालांकि, सरकार डिटेंशन सेंटर बनाने की बात को खारिज करती आई है.पीएम ने खारिज की थी डिटेंशन सेंटर की बात
रामलीला मैदान में एक रैली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने डिटेंशन सेंटर के दावों का पुरजोर खंडन किया था. उनका कहना था कि हिंदुस्तान में कोई डिटेंशन सेंटर है ही नहीं. विपक्ष ने पीएम मोदी के इस दावे पर भी सवाल उठाए हैं, क्योंकि खुद संसद में सरकार ये मान चुकी है कि देश में न सिर्फ डिटेंशन सेंटर हैं, बल्कि इनमें हजारों लोगों को कैद करके भी रखा गया है. असम के माटिया गांव में ढाई हेक्टेयर ज़मीन पर देश का पहला और सबसे बड़ा डिटेंशन सेंटर बना है.

क्या है एनआरसी?
एनआरसी मतलब नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटिजन. ये एक ऐसा रजिस्टर है, जिसमें भारत में रह रहे सभी वैध नागरिकों की डिटेल दर्ज होगी. इसकी शुरुआत साल 2013 में सुप्रीम कोर्ट की देख-रेख में असम में हुई थी. असम के मौजूदा हालत को देखते हुए इसकी व्यवस्था की गई थी. 31 अगस्त 2019 को असम एनआरसी की फाइनल लिस्ट जारी की गई है. फिलहाल NRC असम के अलावा दूसरे किसी राज्य में लागू नहीं है.

असम NRC में 19 लाख लोगों को नाम नहीं
असम NRC की फाइनल लिस्ट में 19 लाख से ज्यादा लोगों को बाहर रखा गया है. असम में एनआरसी में शामिल होने के लिए 3,30,27,661 लोगों ने आवेदन किया था. फाइनल लिस्ट से 19,06,657 लोगों को निकाल दिया गया, जबकि 3,11,21,004 लोगों को भारतीय नागरिक बताया गया था.

NRC
अभी तक सिर्फ असम में एनआरसी लागू है.


NRC में शामिल होने के लिए क्या जरूरी है?
एनआरसी के तहत भारत का नागरिक साबित करने के लिए किसी व्यक्ति को यह साबित करना होगा कि उसके पूर्वज 24 मार्च 1971 से पहले भारत आ गए थे. ये साबित कर पाने वाले को ही भारत का वैध नागरिक माना जाएगा.

इसके लिए किन दस्तावेजों की जरूरत है?
भारत का वैध नागरिक साबित होने के लिए एक व्यक्ति के पास रिफ्यूजी रजिस्ट्रेशन, आधार कार्ड, जन्म का सर्टिफिकेट, एलआईसी पॉलिसी, सिटिजनशिप सर्टिफिकेट, पासपोर्ट, सरकार के द्वारा जारी किया लाइसेंस या सर्टिफिकेट में से कोई एक होना चाहिए.

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First published: February 4, 2020, 11:39 AM IST
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