कोरोना वायरस: गृह मंत्रालय का राज्यों को निर्देश-सुनिश्चित करें कोविड वॉरियर्स के खिलाफ न हो हिंसा

कोरोना वायरस: गृह मंत्रालय का राज्यों को निर्देश-सुनिश्चित करें कोविड वॉरियर्स के खिलाफ न हो हिंसा
पूल टेस्टिंग 5 फीसदी से ज्‍यादा पॉजिटिव केस वाले इलाकों में कारगर नहीं होती है. ऐसे इलाकों में हर व्‍यक्ति का अलग कोरोना टेस्‍ट करना जरूरी होता है.

कोरोना वायरस (Coronavirus) से जंग लड़ रहे डॉक्टरों के खिलाफ बढ़ती हिंसा को लेकर केंद्र सरकार (Central Government) ने बुधवार को हुई कैबिनेट की बैठक में बड़ा फैसला लिया है. इस बैठक में एक अध्यादेश पारित किया गया है जिसके बाद अब डॉक्टरों पर हिंसा करने वालों को सख्त सजा दी जाएगी और उनसे जुर्माना भी वसूला जाएगा.

  • News18Hindi
  • Last Updated: April 22, 2020, 6:02 PM IST
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नई दिल्ली. डॉक्टरों, स्वास्थ्यकर्मियों और चिकित्सा पेशेवरों के साथ हो रही हिंसा को लेकर सरकार काफी सख्त नजर आ रही है. जहां एक ओर सरकार ने अध्यादेश लाकर 123 साल पुराने महामारी कानून (Epidemic Law) में बदलाव किया है तो वहीं गृह मंत्रालय (Home Ministry) ने इस संबंध में राज्यों को पत्र लिखा है. इस पत्र में गृह मंत्रालय ने राज्यों को निर्देश दिए हैं कि डॉक्टर, स्वास्थ्य देखभाल पेशेवरों, चिकित्साकर्मियों, अग्रिम पंक्ति के कर्मियों के खिलाफ हिंसा रोकने के लिए पर्याप्त सुरक्षा सुनिश्चित की जाए. पत्र में कहा गया है कि ऐसे लोगों पर सख्त कार्रवाई की जाए जो कोविड-19 (Covid-19) से जान गंवाने वाले लोगों के अंतिम संस्कार के समय कोविड वॉरियर्स के लिए परेशानी का सबब बन रहे हैं.

नोडल अधिकारी की होगी नियुक्ति
गृह मंत्रालय की ओर से राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों से गुजारिश की गई है कि वह राज्य और केंद्र शासित प्रदेश के और जिला स्तर पर नोडल अधिकारियों की नियुक्ति करें. ये अधिकारी 24 घंटे सातों दिन चिकित्सा पेशेवरों की सुरक्षा से जुड़े मामलों के लिए मौजूद रहेंगे. ये अधिकारी किसी हिंसा की स्थिति में तत्काल प्रभाव से सख्त से सख्त एक्शन लेंगे.

सरकार ने कानून में किया बड़ा बदलाव
बता दें कोरोना वायरस (Coronavirus) से जंग लड़ रहे डॉक्टरों के खिलाफ बढ़ती हिंसा को लेकर केंद्र सरकार ने बुधवार को हुई कैबिनेट की बैठक में बड़ा फैसला लिया है. इस बैठक में एक अध्यादेश पारित किया गया है जिसके बाद अब डॉक्टरों पर हिंसा करने वालों को सख्त सजा दी जाएगी और उनसे जुर्माना भी वसूला जाएगा.



केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर (Prakash Javdekar) ने बताया कि बैठक में कहा गया कि स्वास्थ्यकर्मियों पर हो रही हिंसा किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं की जाएगी. यदि हिंसा की कोई खबर आई तो इस मामले में 30 दिन में कार्रवाई की जाएगी और एक साल के अंदर इस पर फैसला लिया जाएगा. नए अध्यादेश के मुताबिक स्वास्थ्यकर्मियों पर हिंसा के लिए भारी सजा और भारी-भरकम जुर्माना भी लगाया जाएगा. आरोपियों को तीन महीने से लेकर 5 साल की सजा दी जाएगी. इसके अलावा 50 हजार से लेकर 3 लाख तक का जुर्माना भी वसूला जाएगा.

ज्यादा नुकसान होने पर वसूला जाएगा दोगुना हर्जाना
केंद्रीय मंत्री ने यह भी कहा कि अगर गंभीर नुकसान हुआ है तो 6 महीने से 7 साल की सजा का प्रावधान और जुर्माना 1 लाख से 5 लाख रुपये है. इसके अलावा डॉक्टर की संपत्ति को नुकसान होने पर मार्केट वैल्यू से दोगुना धन वसूला जाएगा.

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