केंद्र की विफल नीतियों के चलते प्रवासी फिर पलायन को मजबूर, सरकार को अच्छे सुझावों से ‘एलर्जी’: राहुल

राहुल गांधी ने केंद्र पर साधा निशाना (फाइल फोटो)

राहुल गांधी ने केंद्र पर साधा निशाना (फाइल फोटो)

Rahull Gandhi Tweet: कांग्रेस नेता ने कहा, ‘‘टीकाकरण बढ़ाने के साथ ही इनके हाथ में रुपये देना आवश्यक है- आम जन के जीवन व देश की अर्थव्यवस्था दोनों के लिए. लेकिन अहंकारी सरकार को अच्छे सुझावों से एलर्जी है!

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नई दिल्ली. कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी (Rahul Gandhi) ने शनिवार को आरोप लगाया कि केंद्र सरकार की विफल नीतियों के कारण कोरोना वायरस की दूसरी लहर (Coronavirus second wave) आयी है तथा मजदूर फिर से पलायन करने को मजबूर हैं, लेकिन इस ‘अहंकारी सरकार’ को अच्छे सुझावों से ‘एलर्जी’ है. उन्होंने ट्वीट किया, ‘‘ केंद्र सरकार की विफल नीतियों से देश में कोरोना की भयानक दूसरी लहर है और प्रवासी मज़दूर दोबारा पलायन को मजबूर हैं.’’

कांग्रेस नेता ने कहा, ‘‘टीकाकरण बढ़ाने के साथ ही इनके हाथ में रुपये देना आवश्यक है- आम जन के जीवन व देश की अर्थव्यवस्था दोनों के लिए. लेकिन अहंकारी सरकार को अच्छे सुझावों से एलर्जी है!’’ इससे पहले, आठ अप्रैल को राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर सुझाव दिया था कि कोरोना वायरस टीकों की खरीद एवं वितरण में राज्यों की भूमिका बढ़ाने के साथ ही सभी जरूरतमंद लोगों को टीका लगाने की व्यवस्था की जाए और टीके के निर्यात पर तत्काल रोक लगाई जाए.

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उन्होंने आठ अप्रैल की तिथि वाले इस पत्र में यह आरोप भी लगाया कि केंद्र सरकार की ओर से सही तरीके से क्रियान्वयन न किए जाने और उसमें ‘लापरवाही’ के कारण टीकाकरण का प्रयास कमजोर पड़ता दिख रहा है.
उन्होंने प्रधानमंत्री से यह भी कहा कि टीके के आपूर्तिकर्ताओं को जरूरी संसाधन मुहैया कराए जाएं ताकि टीके तैयार करने की क्षमता में इजाफा हो सके.

राहुल गांधी ने टीकाकरण को लेकर किया ये दावा

कांग्रेस नेता ने देश में कोरोना वायरस संक्रमण की नयी लहर आने और टीकाकरण की गति कथित तौर पर धीमी होने का भी उल्लेख किया. उन्होंने दावा किया कि अगर मौजूदा गति से टीकाकरण चलता रहा तो देश की 75 फीसदी आबादी को टीका लगाने में कई साल लग जाएंगे.



राहुल गांधी ने कहा, ‘‘भारत के पास टीके की दौड़ में आगे होने का लाभ था, फिर भी हम टीकाकरण प्रक्रिया में बहुत ही धीमी गति से चल रहे हैं. वर्तमान में, हम 3 महीने में अपनी जनसंख्या अनुपात के सिर्फ एक फीसदी को ही दो खुराक दे पाए हैं.’’

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उन्होंने कहा, ‘‘यहां पर कोई स्पष्ट कारण नहीं है कि सरकार ने बड़े स्तर पर टीके के निर्यात की अनुमति क्यों दी, जबकि हमारा देश वैक्सीन की कमी से जूझ रहा है. टीके की 6 करोड़ से अधिक खुराक का निर्यात किया जा चुका है.’’



उन्होंने प्रधानमंत्री से यह भी कहा कि टीके की खरीद एवं वितरण में राज्यों की भूमिका बढ़ाई जाए तथा इस मुश्किल समय में गरीब तबकों को सीधी आर्थिक मदद दी जाए.

(Disclaimer: यह खबर सीधे सिंडीकेट फीड से पब्लिश हुई है. इसे News18Hindi टीम ने संपादित नहीं किया है.)
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