लाइव टीवी

उल्‍फा समेत असम के तीन और मणिपुर के एक उग्रवादी संगठन के साथ जल्‍द शांति समझौता करेगी केंद्र सरकार!

News18Hindi
Updated: November 4, 2019, 7:01 PM IST
उल्‍फा समेत असम के तीन और मणिपुर के एक उग्रवादी संगठन के साथ जल्‍द शांति समझौता करेगी केंद्र सरकार!
उल्फा की ओर से कहा गया है कि केंद्र के साथ अब तक की बातचीत सकारात्मक रही है.

केंद्र सरकार (Central Government) और असम (Assam) के कई उग्रवादी संगठनों (Militant Group) के बीच जारी शांति वार्ता (Peace Talk) अंतिम दौर में पहुंच चुकी है. उम्मीद है कि अगले कुछ महीनों में ही शांति समझौते (Peace Deal) पर हस्ताक्षर हो जाएंगे और असम में शांति बहाल हो जाएगी. इस मामले में रसिर्च एंड एनालिसिस विंग (RAW) के पूर्व विशेष सचिव एबी माथुर वार्ताकार हैं.

  • News18Hindi
  • Last Updated: November 4, 2019, 7:01 PM IST
  • Share this:
गुवाहाटी. असम (Assam) में जल्‍द शांति बहाली की उम्‍मीदें मजबूत होती दिख रही हैं. दरअसल, केंद्र सरकार (Central Government) यूनाइटेड लिब्रेशन फ्रंट ऑफ असम (ULFA) समेत राज्‍य के कई उग्रवादी संगठनों (Militant Group) से बातचीत कर शांति समझौता (Peace Deal) करने की कवायद में जुटी है. इस सिलसिले में जारी बातचीत अंतिम दौर में पहुंच चुकी है. रिसर्च एंड एनालिसिस विंग (RAW) के पूर्व विशेष सचिव एबी माथुर इस बातचीत में वार्ताकार की भूमिका निभा रहे हैं. उन्‍होंने रविवार को कहा कि असम के तीन और मणिपुर (Manipur) के एक उग्रवादी संगठन से बातचीत जारी है.

मूल निवासियों को संवैधानिक संरक्षण का अब तक नहीं निकला है समाधान
उल्फा के एक और शीर्ष नेता ने कहा, 'अब तक बातचीत सकारात्मक रही है और कई मुद्दों का हल निकला है. हालांकि, राज्य के मूल निवासियों को संवैधानिक संरक्षण दिए जाने को लेकर कोई समाधन नहीं निकल पाया है. यह जरूरी है कि मूल निवासियों की पहचान की जाए.' बता दें कि यह मुद्दा असम समझौते का भी हिस्सा है. असम समझौता 1985 में केंद्र और राज्य सरकार ने असम में छह साल तक चले बाहरी विरोधी आंदोलन के बाद ऑल असम स्टूडेंट्स यूनियन (आसू) के साथ किया था. गृह मंत्रालय की ओर से गुवाहाटी हाईकोर्ट के रिटायर्ड जस्टिस बीके शर्मा की अध्‍यक्षता में बनाई गई समिति 1985 के असम समझौते की धारा-6 को लागू करने पर काम कर रही है.

उल्‍फा महासचिव ने कहा - आखिरी दौर की वार्ता के लिए हम दिल्‍ली जाएंगे

माथुर ने बताया कि उल्‍फा के अलावा असम के उग्रवादी संगठन नेशनल डेमोक्रैटिक फ्रंट ऑफ बोडोलैंड (NDFB) और कारबी समूह से भी शांति समझौते के लिए प्रयास किए जा रहे हैं. वहीं, मणिपुर में कुकी समूह से भी बातचीत चल रही है. बातचीत संतोषजनक तरीके से आगे बढ़ रही है. उन्‍होंने उम्मीद जताई है कि अगले कुछ महीनों में सभी उग्रवादी संगठन शांति समझौते पर हस्ताक्षर कर देंगे और क्षेत्र में फिर शांति बहाल हो जाएगी. उल्फा के महासचिव अनूप सेतिया ने बताया कि केंद्र सरकार के साथ हमारी बातचीत आखिरी दौर में है. हमें उम्मीद है कि अगले दो महीने में समझौता हो जाएगा. हम आखिरी दौर की बातचीत के लिए नई दिल्ली जाने वाले हैं.

उल्फा के महासचिव अनूप सेतिया ने बताया कि केंद्र सरकार के साथ हमारी बातचीत आखिरी दौर में है.


'समिति के कुछ ठोस नहीं करने पर किया समझौते पर बढ़ने का फैसला'
Loading...

असम समझौते (Assam Accord) की धारा-6 में कहा गया है कि असम के मूल निवासियों की भाषायी, सांस्कृतिक, सामाजिक पहचान और विरासत की रक्षा करने तथा उसे संरक्षित रखने के साथ-साथ बढ़ावा देने के लिए जहां तक उचित होगा, संवैधानिक, प्रशासनिक व विधायी संरक्षण दिया जाएगा. पिछले 34 साल में इसका पालन नहीं हुआ है. टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, उल्फा के नेता कहते हैं, 'शुरुआत में हमने समिति की रिपोर्ट आने का इंतजार करने के बारे में सोचा, लेकिन पैनल कुछ ठोस नहीं कर सका. इसलिए हमने वार्ताकारों के साथ समझौते पर आगे बढ़ने का फैसला लिया.'

ये भी पढ़ें:

अहमदाबाद में रेस्‍टोरेंट मालिक ने दलित युवकों की पिटाई की, फाड़े कपड़े

भारत ने स्‍पष्‍ट किया, हम RCEP में आखिरी मौके पर कोई मांग नहीं रख रहे

RCEP पर चिंताओं के बीच क्‍या भारत सबसे बड़े FTA के लिए है तैयार?

News18 Hindi पर सबसे पहले Hindi News पढ़ने के लिए हमें यूट्यूब, फेसबुक और ट्विटर पर फॉलो करें. देखिए देश से जुड़ी लेटेस्ट खबरें.

First published: November 4, 2019, 7:01 PM IST
Loading...
पूरी ख़बर पढ़ें अगली ख़बर
Loading...