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RCEP रिजेक्ट करने पर पीयूष गोयल ने दी पीएम मोदी को बधाई, कहा- कांग्रेस फैला रही भ्रम

News18Hindi
Updated: November 5, 2019, 7:08 PM IST
RCEP रिजेक्ट करने पर पीयूष गोयल ने दी पीएम मोदी को बधाई, कहा- कांग्रेस फैला रही भ्रम
केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने RCEP समझौते पर पीएम मोदी के फैसले के लिए उन्हें बधाई दी है (फाइल फोटो)

केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री (Ministry of Commerce and Industry) ने कहा कि पीएम मोदी (PM Modi) इंडिया फर्स्ट मानते हैं और किसी अंतरराष्ट्रीय संधि-समझौते में भारत की समस्याओं को प्राथमिकता दी जाए तभी भारत किसी अंतरराष्ट्रीय समझौते (International Agreement) में शामिल हो सकता है.

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  • Last Updated: November 5, 2019, 7:08 PM IST
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नई दिल्ली. भारत के RCEP समझौते (Regional Comprehensive Economic Partnership) से बाहर रहने के मसले पर केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री (Ministry of Commerce and Industry) पीयूष गोयल (Piyush Goyal) ने एक प्रेस कांफ्रेंस को संबोधित किया. इस दौरान उन्होंने कहा कि भारत की सरकार हर फैसले में देशहित (Country's Interest) और जनहित को प्राथमिकता दे इसका निर्णय पीएम मोदी ने लिया है. इसका एक उदाहरण हमने कल बैंकॉक (Bangkok) में देखा.

पीयूष गोयल (Piyush Goyal) ने यह भी कहा कि भारत के छोटे उद्योगों जैसे कृषि (Farming), डेयरी और फार्मा के हित इसमें शामिल न होने और इससे भारत के हित न सधने के चलते प्रधानमंत्री ने ऐसा फैसला लिया. इसके लिए उन्होंने पीएम मोदी (PM Modi) को बधाई भी दी.

व्यापार घाटे में संतुलन लाना भारत की मुख्य मांग थी
केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री ने कहा कि पीएम मोदी इंडिया फर्स्ट मानते हैं और किसी अंतरराष्ट्रीय संधि-समझौते में भारत की समस्याओं को प्राथमिकता दी जाए तभी भारत किसी अंतरराष्ट्रीय समझौते में शामिल हो सकता है.

पीयूष गोयल (Piyush Goyal) ने कहा, "भारत ने कई सालों तक अपनी समस्याओं को लेकर चर्चा की. एक वक्त ऐसा था जब 70 समस्याओं में से 50 भारत की थीं. भारत की मांगों में मुख्यत: भारत को होने वाले व्यापार घाटे में संतुलन लाना था. भारत को गलत तरीके के आयात से मुक्ति चाहिए थी. भारत को अपने उत्पादों के लिए निर्यात के लिए बाजार की जरूरत थी. भारत की गुड्स एंड सर्विसेज के लिए विदेश में भी अच्छे मौके चाहिए थे."

पूर्व वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री निर्मला सीतारमण का दिया उदाहरण
केंद्रीय व्यापार एवं वाणिज्य मंत्री ने कहा कि भारत की कई मांगें मानी भी गईं लेकिन अंतत: देखने पर भी इस पर भारत को फायदा होता नहीं दिख रहा था. ऐसे में भारत को इसमें शामिल न होने की बात कहनी पड़ी. पीयूष गोयल ने कहा कि पीएम मोदी भारत के हितों के लिए सब कुछ दांव पर लगाने के लिए तैयार रहते हैं.
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उन्होंने 2013 में बाली में हुई मंत्रियों की बैठक का उदाहरण भी दिया. तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने फूड सिक्योरिटी प्रोग्राम को अंतरिम बना दिया था. लेकिन पूर्व वाणिज्य मंत्री निर्मला सीतारमण ने अगले मंत्री सम्मेलन में पीस कानूनों को बदलवाया जिससे पब्लिक स्टॉक होल्डिंग और एमएसपी के प्रोग्राम जारी रहेंगे और इन्हें WTO में कोई चैलेंज नहीं कर पाएगा. पीएम मोदी ने इसे WTO में भी पास करवाया.

भारत ने अपने बाजार को विदेशी सामान से बचाने का बनाया मैकेनिज्म
भारत ने जब अनुच्छेद 370 और 35A को समाप्त किया तो भी पूरी दुनिया भारत के साथ खड़ी दिखी. यह पीएम मोदी के निर्णायक व्यक्तित्व से संभव हो सका. उन्होंने राष्ट्रपति ट्रंप के पीएम मोदी के टफ निगोशिएटर होने के वक्तव्य को भी दोहराया. उन्होंने यह भी याद दिलाया कि कैसे पेरिस क्लाइमेट सम्मेलन में पीएम मोदी ने कई देशों को पर्यावरण के लिए साथ मिलकर काम करने पर राजी किया था.

इस समझौते के सभी देशों में एक जैसे टैरिफ होने चाहिए. भारत की इस मांग को न मानने के चलते भारत इसमें जुड़ने को राजी नहीं हुआ. भारत लगातार इस बात को उठाता रहा कि 2014 के बजाए 2019 के बेस रेट इस समझौते में होने चाहिए. केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री ने खुलासा किया कि ऑटोमैटिक ट्रिगर सेफगार्ड मैकेनिज्म भी भारत ने प्रस्तावित किया था ताकि कोई देश भारत में अपने सामान को ज्यादा तेजी से न भेज सके या न डंप कर सके.

अगर किसी देश के साथ MFN (Most favoured nation) का करार भारत करे तो उसका फायदा RCEP देशों को भी मिले. लेकिन भारत इसके लिए तैयार नहीं हुआ. इसी प्रकार से भारत ने एग्रीकल्चर और डेयरी को पूरी तरह से RCEP से बाहर रखने का प्रयास किया था. भारत ने गुड्स, सर्विसेज और निवेश तीनों में एक बैलेंस रखने की बात कही थी लेकिन ऐसा नहीं हो सका. लेकिन जब हमारी मांगों पर सहमति नहीं बनी तो हमने इससे बाहर रहने का प्रयास किया.

कांग्रेस ने ही शुरू की थी RCEP पर बातचीत, अब फैला रही भ्रम
पीयूष गोयल ने कहा, "कुछ लोग भ्रम फैला रहे हैं कि चीन के साथ भारत ने मोदी जी के दौर में यह बातचीत शुरू की. मनमोहन सिंह के नेतृत्व में चीन के साथ व्यापार पर चर्चा हो रही थी. कमलनाथ उस वक्त मंत्री थे, उन्होंने चीन के साथ मुक्त व्यापार की तरफ कदम बढ़ाए थे. 2012 में भारत ने RCEP के साथ जुड़ने का फैसला किया, जिससे उसके लिए चीन का मार्केट भी खुले."

उन्होंने कहा कि कुछ लोग कह रहे हैं कि RCEP के साथ जुड़ना गलत था. यह आरोप सरकार पर लगाना गलत है. कांग्रेस बहुत कंफ्यूज नजर आ रही है क्योंकि खुद उसकी ही सरकार RCEP की ओर बढ़ी थी.

कई देशों से मुक्त व्यापार समझौते में भारत को हुआ जबरदस्त नुकसान
केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री ने दक्षिण कोरिया, इंडोनेशिया, मलेशिया, जापान (Japan) और आसियान (ASEAN) के अन्य देशों के साथ कांग्रेस के कार्यकाल में हुए मुक्त व्यापार समझौतों पर भी सवाल उठाए और कहा कि ये भारतीय व्यापारिक हितों को नुकसान पहुंचाते हैं. उन्होंने यह भी बताया कि वर्तमान मोदी सरकार इनमें से ज्यादा मुक्त व्यापार समझौतों के रिव्यू पर काम कर रही है.

एक उदाहरण के तौर पर उन्होंने बताया कि इंडोनेशिया (Indonesia) के साथ मुक्त व्यापार समझौते (FTA) के दौरान भारत ने 74% प्रोडक्ट्स को ड्यूटी फ्री कर दिया था लेकिन अपेक्षाकृत संपन्न माने जाने वाले इंडोनेशिया ने भी 50% प्रॉडक्ट को ही ड्यूटी फ्री किया था. ऐसे में भारत को बहुत नुकसान हो रहा था. RCEP देशों के साथ भारत का व्यापार घाटा जो 2004 में 7 बिलियन डॉलर था, वो 2014 में बढ़कर 78 बिलियन डॉलर हो चुका था.

फिलहाल RCEP से अलग रहने का भारत का फैसला आखिरी
इस मुद्दे से जुड़े सवालों का जवाब देते हुए केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल (Piyush Goyal) ने कहा कि वर्तमान में यह RCEP के साथ न जुड़ने का भारत का निर्णय अंतिम है लेकिन अगर भारत की सारी मांगें मान ली जाती हैं और भारत की अर्थव्यवस्था के लिए यह फायदे वाली बात होती है तो भारत इस पर बातचीत और समझौते के लिए राजी हो सकता है लेकिन फिलहाल RCEP के साथ न जुड़ना भारत का आखिरी फैसला है.

सवालों के जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय मसलों (International Matters) में हमेशा दरवाजे खुले रहते हैं. व्यापार आदि के मामले में हमारी बातचीत कभी खत्म नहीं होती है. हम किसी से दुश्मनी करके नहीं बैठे हैं और हमारे रिश्ते मजबूत हैं लेकिन हम आर्थिक नुकसान को नहीं सह सकते. उन्होंने कहा, "मैंने कोरिया, जापान, मलेशिया और आसियान के साथ हुए मुक्त व्यापार समझौतों (FTAs) को देखा है और मुझे लगता है कि भारत को इनमें ज्यादा अवसर मिलने चाहिए थे."

कई मुक्त व्यापार समझौतों का रिव्यू कर रही सरकार
उन्होंने कहा कि कांग्रेस (Congress) के दौर में जल्दबाजी में किए गए इन निर्णयों के चलते ऐसा हुआ. दक्षिण कोरिया और जापान का रिव्यू शुरू हो चुका है. इसके अलावा केंद्रीय वाणिज्य मंत्री ने कहा कि भारत आखिरी वक्त पर इस डील से बाहर नहीं हुआ है. भारत लगातार अपनी समस्याओं पर मुद्दों पर पिछले 2-2.5 साल से इन पर बातचीत कर रहा था और जब उन सभी पर सहमति नहीं बनी तो भारत को यह कदम उठाना पड़ा. भारत को इससे किसी डील ब्रेकर का टैक भी नहीं मिलेगा क्योंकि वहां मौजूद सभी देशों ने भारत के मुद्दों और समस्याओं का सम्मान किया. वहां पर मौजूद देशों ने भी भारत की समस्याओं को सम्मान के साथ देखा था और यह बात उनके बयान में भी दिखती है.

केंद्रीय वाणिज्य एंव उद्योग मंत्री (Ministry of Commerce and Industry) ने यह भी साफ किया कि फिलहाल ईयू (European Union) के साथ मुक्त व्यापार समझौते को लेकर भारत की कोई बातचीत नहीं चल रही है. ऐसी बातचीत कई साल पहले हुई थी.

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First published: November 5, 2019, 6:52 PM IST
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