अगले 10 सालों में बदल जाएगी भारतीय रेलवे की सूरत, ये है मोदी सरकार का प्लान

रेल मंत्री पीयूष गोयल ने बताया कि 2019-2020 के बजट के अनुसार, 2018-2030 के बीच रेलवे का इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलप करने में 50 लाख करोड़ रुपये के इंवेस्टमेंट की जरूरत है.

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Updated: July 26, 2019, 8:52 PM IST
अगले 10 सालों में बदल जाएगी भारतीय रेलवे की सूरत, ये है मोदी सरकार का प्लान
रेलमंत्री पीयूष गोयल ने पीपीपी मॉडल के जरिए भारतीय रेलवे की सूरत बदलने की बात कही है (फाइल फोटो)
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Updated: July 26, 2019, 8:52 PM IST
रेल मंत्री पीयूष गोयल ने शुक्रवार को कहा कि सरकार का प्रस्ताव सार्वजनिक निजी भागीदारी (पीपीपी) की मदद से रेलवे का तेजी से विकास करने और परियोजनाओं को पूरा करने का है. यह बात पीयूष गोयल ने राज्यसभा में एक लिखित प्रश्न का जवाब देते हुए कही.

रेल मंत्री पीयूष गोयल ने बताया कि 2019-2020 के बजट के अनुसार, 2018-2030 के बीच रेलवे का इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलप करने में 50 लाख करोड़ रुपये के इंवेस्टमेंट की जरूरत है. फिलहाल भारतीय रेलवे हर साल इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट पर अपनी ओर से करीब 1.5 से 1.6 लाख करोड़ रुपये खर्च कर रहा है.

इसलिए सिर्फ सार्वजनिक क्षेत्र पर नहीं रह सकते निर्भर
रेलमंत्री ने कहा कि लेकिन ऐसे ही चलता रहा तो सभी स्वीकृत परियोजनाओं को पूरा करने में कई दशक लग जाएंगे. ऐसे में सरकार इन परियोजनाओं को सार्वजनिक और निजी क्षेत्र की भागीदारी के जरिए पूरा करने के प्रयास में जुटी हुई है.

रेल मंत्री पीयूष गोयल ने इसी आशय को जाहिर करते हुए राज्यसभा में कहा, ‘‘इसीलिए सरकार का प्रस्ताव सार्वजनिक निजी भागीदारी की मदद से रेलवे का तेजी से विकास और परियोजनाओं को पूरा करने का है. ’’ गोयल ने यह भी कहा है कि रेलवे में आधुनिकीकरण और क्षमता बढ़ाने के लिए भारी निवेश की आवश्यकता है.

सबसे पहले रेलवे के इन क्षेत्रों का किया जाएगा विकास
उन्होंने कहा कि समर्पित माल ढुलाई, यातायात गलियारे विकसित करने, उच्च रफ्तार गलियारे करने, स्वर्णिम चतुर्भुज योजनाएं बनाने, पटरियों का नवीनीकरण, आधुनिक सिग्नल व्यवस्था, संरक्षा संबंधी कार्य, स्टेशनों का पुनर्विकास, कंप्यूटरीकरण और यात्री संबंधी सुविधाएं आदि रेलवे से जुड़े वे क्षेत्र हैं जिनमें भारी निवेश की जरूरत है.
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रेल मंत्री पीयूष गोयल के अनुसार, इन निवेशों का लक्ष्य भारतीय रेल को विश्व की सर्वोत्तम रेल प्रणाली के रूप में विकसित करना है. रेलवे में सार्वजनिक निजी भागीदारी का उनका प्रयास भी इसी से जुड़ा हुआ है. सरकार मानती है कि रेलवे को इंफ्रास्ट्रक्चर विकास के लिए जितने निवेश की आवश्यकता है, वह अकेले सार्वजनिक निवेश के जरिए पूरा नहीं हो सकता. आशा की जा रही है कि सार्वजनिक निजी भागीदारी के साथ 2030 तक भारतीय रेलवे का चेहरा बदल जाएगा.

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First published: July 26, 2019, 8:52 PM IST
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