चीन से सीमा विवाद पर विदेश मंत्रालय ने कहा- सैनिकों को पीछे हटाना एक जटिल प्रक्रिया

विदेश मंत्रालय ने कहा, चीन के साथ वार्ता जारी पर रास्ता अभी काफी लंबा है.
विदेश मंत्रालय ने कहा, चीन के साथ वार्ता जारी पर रास्ता अभी काफी लंबा है.

विदेश मंत्रालय (Ministry of External Affairs) ने कहा सीमा (India-China border dispute) पर एक तरफा स्थिति को बदलना मु​मकिन नहीं है, जबकि दोनों देशों के बीच जो भी चर्चा हो रही है, उसमें यही कहा जा रहा है कि विवादित जमीन से दोनों देश अपनी सेना पीछे हटाएंगे.

  • News18Hindi
  • Last Updated: September 25, 2020, 7:56 AM IST
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नई दिल्ली. पूर्वी लद्दाख में चीन के साथ वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर भारी तनाव को हल करने और शांति बनाए रखने के लिए भारत (India) लगातार बात कर रहा है. चीन (China) के साथ अभी तक की चर्चा पर बात करते हुए विदेश मंत्रालय (Ministry of External Affairs) ने कहा है कि आगे का रास्ता अभी काफी लंबा है. भारत की ओर से कहा गया है कि सीमा पर जारी विवाद को देखते हुए एक तरफा स्थिति को बदलना मु​मकिन नहीं है, जबकि दोनों देशों के बीच जो भी चर्चा हो रही है, उसमें यही कहा जा रहा है कि विवादित जमीन से दोनों देश अपनी सेना पीछे हटाएंगे.

विदेश मंत्रालय (MEA) के प्रवक्ता अनुराग श्रीवास्तव ने बताया दोनों तरफ की सेना को पीछे हटाना काफी कठिन प्रक्रिया है क्योंकि इस मामले में दोनों पक्षों का राजी होना जरूरी है. भले ही दोनों पक्ष हर बात चर्चा के दौरान इस विवाद को शांति से हल करने की बात कर रहे हों लेकिन इसके लिए जरूरी है कि दोनों पक्ष आपसी सहमति पर पूरी तरह से अमल करें.

मंत्रालय ने कहा है कि सैनिकों का पीछे हटना एक जटिल प्रक्रिया है, जिसके तहत दोनों तरफ नियमित चौकियों पर सैनिकों की फिर से तैनाती की जाती है. कोर कमांडर स्तर की वार्ता के बाद जारी संयुक्त बयान से वास्तविक नियंत्रण रेखा पर तनाव कम करने के लिए दोनों पक्षों की प्रतिबद्धता जाहिर होती है.
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भारत और चीन के बीच हो चुकी है छठे दौर की सैन्य वार्ता
गौरतलब है कि मंगलवार को भारत और चीन के बीच 14 घंटे चली छठे दौर की सैन्य वार्ता के दौरान पूर्वी लद्दाख में अत्यधिक ऊंचाई पर स्थित टकराव बिंदुओं के पास तनाव कम करने के तरीकों पर ध्यान केंद्रित किया गया. सैन्य अधिकारियों ने कहा कि इस मैराथन वार्ता का परिणाम सोमवार को तत्काल पता नहीं चला है, लेकिन ऐसा समझा जाता है कि दोनों पक्षों ने वार्ता आगे बढ़ाने के लिए फिर से बैठक करने पर सहमति जताई है. वहीं, न्‍यूज एजेंसी एएनआई के अनुसार, इस वार्ता में भारत ने जोर दिया कि चीन को उस पोजिशन पर वापस जाना चाहिए जहां वह अप्रैल-मई से पहले मौजूद था.
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