Coronavirus: भारत में कोरोना से हुईं 7 गुना अधिक मौतें? सरकार ने मैग्‍जीन के दावों को किया खारिज

दि इकॉनमिस्‍ट पत्रिका ने दावा किया है कि देश में कोरोना से सरकारी आंकड़ों से 5 से 7 गुना मौतें हुई हैं. (सांकेतिक फोटो)

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय (Ministry of Health) ने पत्रिका के दावों को खारिज किया है. सरकार की ओर से बताया गया है कि पत्रिका ने ये निष्‍कर्ष महामारी विज्ञान संबंधी सबूतों के बिना केवल आंकड़ों के आकलन के जरिए निकाला है. मैग्‍जीन का दावा है कि देश में कोरोना से होने वाली मौत (Corona Death) का आंकड़ा 5 से 7 गुना अधिक है.

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    नई दिल्ली. देश में कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर (Corona Second Wave) की रफ्तार भले ही कमजोर पड़ती दिख रही हो लेकिन कोरोना से होने वाली मौत (Corona Death) का आंकड़ा अभी भी कम नहीं हुआ है. इस बीच एक पत्रिका (Magazine) में दावा किया गया है कि देश में कोरोना से होने वाली मौत का जो आंकड़ा पेश किया गया है, मौत की संख्‍या उससे 5 से 7 गुना अधिक है. हालांकि भारत सरकार ने पत्रिका के दावों को खारिज किया है. सरकार की ओर से बताया गया है कि पत्रिका ने ये निष्‍कर्ष महामारी विज्ञान संबंधी सबूतों के बिना केवल आंकड़ों के आकलन के जरिए निकाला है.

    केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने इस पूरे मामले में सफाई देते हुए पत्रिका में प्रकाशित लेख की निंदा की है, जिसमें दावा किया गया है कि कोविड-19 से होने वाली मौत सरकारी आंकड़ों से 5 से 7 गुना अधिक है. सरकार ने दि इकॉनमिस्‍ट में प्रकाशित लेख को बिना आधार वाला और भ्रामक बताया है. स्‍वास्‍थ्‍य मंत्रालय की ओर से जारी किए गए बयान में कहा गया है कि पत्रिका के प्रकाशित विश्‍लेषण महामारी विज्ञान के सबूतों के बिना केवल आंकड़ों के आकलन पर आधारित है.

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    सरकार की ओर से बताया गया है कि पत्रिका में जिस अध्‍ययन से कोरोना से होने वाली मौत का अनुमान लगाया है वह किसी भी देश की मृत्‍युदर का पता लगाने का सही तरीका नहीं है. इसके साथ ही सरकार ने पत्रिका में जिस विश्‍लेषण का इस्‍तेमाल किया है उसके गलत होने के प्रमाण भी साझा किया है, जिससे पता चलता है कि पत्रिका में प्रकाशित विश्‍लेषण पूरी तरह से गलत है.

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    पत्रिका ने में किस तरीके से ये मृत्‍यदर निकाली गई है उसका नहीं है जिक्र
    स्‍वास्‍थ्‍य मंत्रालय की ओर से बताया गया है कि पत्रिका में प्रकाशित लेख में कोरोना से होने वाली मौत का विश्‍लेषण करने वाले किस अध्‍ययन का इस्‍तेमाल किया गया है, इसकी जानकारी नहीं है. इसके बावजूद स्‍वास्‍थ्‍य विभाग ने वैज्ञानिक डाटाबेस जैसे पबमेड, रिसर्च गेट आदि में इंटरनेट पर इस अनुसंधान पत्र की तलाश की लेकिन कहीं पर भी इस तरह की जानकारी उपलब्‍ध नहीं है. स्‍वास्‍थ्‍य मंत्रालय के मुताबिक यह अध्‍ययन तेलंगाना में बीमा दावों के आधार पर किया गया है लेकिन इसकी की समीक्षा करने पर भी ऐसी जानकारी नहीं मिलती जो पत्रिका में प्रकाशित की गई है.

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