जम्मू-कश्मीर में जवानों की तैनाती पर गृह मंत्रालय ने कहा- सार्वजनिक रूप से इस पर चर्चा नहीं की जा सकती

गृह मंत्रालय की प्रतिक्रिया गुरुवार को रिपोर्टों के अनुसार आई है कि 28,000 अतिरिक्त सैनिक जम्मू और कश्मीर में तैनाती की प्रक्रिया में हैं.

News18Hindi
Updated: August 2, 2019, 11:10 AM IST
जम्मू-कश्मीर में जवानों की तैनाती पर गृह मंत्रालय ने कहा- सार्वजनिक रूप से इस पर चर्चा नहीं की जा सकती
गृह मंत्रालय की प्रतिक्रिया गुरुवार को रिपोर्टों के अनुसार आई है कि 28,000 अतिरिक्त सैनिक जम्मू और कश्मीर में तैनाती की प्रक्रिया में हैं. (AP Photo/Mukhtar Khan)
News18Hindi
Updated: August 2, 2019, 11:10 AM IST
जम्मू और कश्मीर में सैनिकों के मूवमेंट पर गृह मंत्रालय ने शुक्रवार को जवाब दिया है. गृह मंत्रालय ने कहा है कि 'जम्मू-कश्मीर में अर्द्धसैन्य बलों की तैनाती आंतरिक सुरक्षा स्थिति के आकलन और प्रशिक्षण की आवश्यकताओं के आधार पर होती है.' मंत्रालय ने कहा कि 'केंद्रीय बलों की तैनाती और वापसी लगातार चलने वाली प्रक्रिया है, सार्वजनिक रूप से इस पर चर्चा नहीं की जा सकती.'

गृह मंत्रालय ने कहा कि जम्मू और कश्मीर में अर्धसैनिक बलों की तैनाती वहां की सुरक्षा स्थिति और रोटेशन की आवश्यकताओं के आधार पर की गई थी और सार्वजनिक क्षेत्र में ऐसी चीजों पर चर्चा नहीं की जाती है.

मंत्रालय के सूत्रों ने कहा कि केंद्रीय बलों की 100 कंपनियों (10,000 कर्मियों) को लगभग एक सप्ताह पहले राज्य में तैनाती के लिए आदेश दिया गया था और वे अपने गंतव्य तक पहुंचने की प्रक्रिया में हैं. अतिरिक्त बलों के शामिल होने की अटकलों को जन्म दिया है.

एक सूत्र ने कहा, 'आंतरिक सुरक्षा की स्थिति, प्रशिक्षण की आवश्यकताओं के आकलन के आधार पर, अर्धसैनिक बलों को केंद्रीय बलों की बहाली और भर्ती, इंडक्शन और डीइंडक्शन के लिए रोटेट किया जाना एक चलने वाली प्रक्रिया है.'

यह भी पढ़ें:  शोपियां में सुरक्षाबलों ने आतंकियों को घेरा, एक जवान शहीद

उन्होंने कहा कि सार्वजनिक क्षेत्र में किसी विशेष जगह में तैनात अर्धसैनिक बलों की तैनाती और मूवमेंट के विवरण पर चर्चा कभी नहीं हुई.

गृह मंत्रालय की प्रतिक्रिया गुरुवार को रिपोर्टों के अनुसार आई है कि 28,000 अतिरिक्त सैनिक जम्मू और कश्मीर में तैनाती की प्रक्रिया में हैं. अटकलें यह भी हैं कि केंद्र की संविधान के अनुच्छेद 35 ए खत्म की योजना हो सकती है, जो सरकारी नौकरियों और भूमि में राज्य के निवासियों को विशेष अधिकार देता है.
Loading...

 कश्मीर में बयानबाजियों का दौर हावी

इन अटकलों ने पिछले कुछ दिनों में कश्मीर में बयानबाजियों का दौर हावी कर दिया है. नेशनल कॉन्फ्रेंस और पीडीपी जैसे मुख्यधारा के राजनीतिक दलों ने राज्य में विशेष दर्जे के साथ छेड़छाड़ करने के लिए इस तरह का कोई भी कदम न उठाने को कहा है.

उमर अब्दुल्ला और पार्टी के एक सांसद ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की और उनसे कोई भी कदम नहीं उठाने का आग्रह किया, जिससे जम्मू-कश्मीर में कानून-व्यवस्था की स्थिति बिगड़ सकती है. उन्होंने मोदी से राज्य में साल के अंत तक विधानसभा चुनाव कराने की भी अपील की.

यह भी पढ़ें:  कश्मीर में सुरक्षाबलों पर पत्थरबाजी करवाने वालों पर शिकंजा

News18 Hindi पर सबसे पहले Hindi News पढ़ने के लिए हमें यूट्यूब, फेसबुक और ट्विटर पर फॉलो करें. देखिए देश से जुड़ी लेटेस्ट खबरें.

First published: August 2, 2019, 11:08 AM IST
Loading...
पूरी ख़बर पढ़ें अगली ख़बर
Loading...