मोदी सरकार का मिशन कश्मीर, जानिए अमित शाह ने कैसे पहनाया अमली जामा

जम्मू और कश्मीर को अनुच्छेद 370 के तहत विशेष दर्जा हमेशा से बीजेपी के एजेंडे में रहा, पीएम नरेंद्र मोदी इसे अंजाम देना चाहते थे, मोदी 1.0 में ये नहीं हो पाया, लेकिन इस तरह से गृहमंत्री अमित शाह ने मोदी 2.0 में इसे पूरा कर दिया.

अमिताभ सिन्हा | News18Hindi
Updated: August 5, 2019, 9:39 PM IST
मोदी सरकार का मिशन कश्मीर, जानिए अमित शाह ने कैसे पहनाया अमली जामा
जम्मू कश्मीर को विशेषाधिकार में संशोधन पीएम नरेंद्र मोदी और अमित शाह की जोड़ी की एक और सफलता है.
अमिताभ सिन्हा
अमिताभ सिन्हा | News18Hindi
Updated: August 5, 2019, 9:39 PM IST
सोमवार, 5 अगस्त की सुबह पूरे भारतवर्ष के लिए एक ऐसा संदेश ले लेकर आई जिसे देख सुन कर देश भर में एक खुशी की लहर दौड़ गयी. आम तौर पर बुधवार को होने वाली केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक सोमवार की सुबह साढे नौ बजे ही बुला ली गयी तो साफ हो गया था कि कश्मीर में कुछ बड़ा होने वाला है. कैबिनेट की बैठक के बाद पीएम नरेंद्र मोदी के कश्मीर प्लान से पर्दा हटा नहीं कि उनके विरोधी और समर्थक सब भौचक्के रह गए. कश्मीर को दो हिस्सों में बांट दिया और धारा 370 के खात्‍मे का ऐलान भी हो गया. बीजेपी और संघ परिवार को इस बिल का इंतजार अरसे से था.

मोदी 1.0 में तो राज्यसभा में बहुमत न होना ही सरकार को अपने कदम वापस खींच लेने पर मजबूर कर देता था. लेकिन मोदी 2.0 में तस्वीर पलट गई. इस बार गृह मंत्रालय की कमान पीएम मोदी ने अपने सबसे विश्वस्त अमित शाह के हाथों में सौंप दी.

कैसी पहुंची अंजाम तक योजना
पूरे चुनावी समर में पीएम मोदी, अमित शाह और राजनाथ सिंह लगातार कश्मीर से धारा 370 हटाने की बात करते रहे. सूत्र बताते हैं कि 35A हटाने की रूप रेखा तो गृह मंत्रालय ने मोदी 1.0 में ही तैयार कर ली थी. लेकिन तब हिम्मत नहीं जुटी थी. लेकिन मोदी सरकार की दूसरी पारी में धमाका हो ही गया और वो भी 17वी लोकसभा के पहले सत्र में. पूरी धारा 370 साफ, वो भी एक झटके में. विपक्ष सवाल उठा रहा है कि आखिर इतनी जल्दी क्या थी? लेकिन सरकार इस बार पूरी तैयारी के साथ मैदान में कूदी थी. हर सवाल का जवाब था और महीने भर की लंबी प्लानिंग. सेहरा बांधा गृह मंत्री अमित शाह के सर. आखिर कैसे पहुंची ये योजना अपने अंतिम मुकाम तक?

BJP was against article 370
एक देश में दो विधान, दो निशान और दो प्रधान का हमेशा बीजेपी ने विरोध किया.


अमित शाह की कड़क छवि
गृहमंत्री अमित शाह ने पद संभालते ही ये जता दिया था कि कश्मीर की उनके गेम प्लान में क्या अहमियत है. अधिकारी चौकस हो गए. घाटी में सेना की गतिविधि बढ़ गयी. कानूनी दांव पेंचों में माहिर माने जाने वाले शाह ने योजना को मूर्त रूप देना शुरू कर दिया. अमित शाह ने खुद श्रीनगर का दौरा कर माहौल का जायजा लिया और कानूनी दांव पेंच को समझ कर 370 की काट ढूंढने में लग गए.
Loading...

शाह का मास्टर प्लान : हुर्रियत नेताओं की किरकिरी
सरकार बनते ही हुर्रियत के नेताओं की किरकिरी शुरू हो गयी. अब तक गरजने वाले हेरियत नेता भीगी बिल्ली बन बैठे थे. एनआईए, ईडी, आईटी के छापों ने उनके भ्रष्टाचार की पोल तो खोली ही लेकिन साथ में घाटी में उनकी विश्वसनीयता भी कम हुई. बन्द का आह्वान करने वाले और पत्थरबाजों को भड़काने वाले ये नेता अपने बच्चो को विदेश भेज कर चैन की बंसी बजाते है इसका भी खुलासा हुआ. इन सब से ऊपर इनकी सुरक्षा तक वापस ले ली गयी. यानी उनकी वीश्वस्नीयता खत्म ही हो गयी.

घाटी के मौजूदा नेतृत्व पर उठे सवाल
बीजेपी और मोदी सरकार ने नेशनल कांफ्रेस के फ़ारूक़ और उमर अब्दुल्ला, पीडीपी की महबूबा मुफ़्ती की मंशा पर सवाल उठना तो चुनावों के दौरान ही शुरू कर दिया था. मोदी और अमित शाह बार बार यही कहते रहे कि जम्मू कश्मीर में सिर्फ कुछ परिवारों का राज रहा जिन्हें जनता की नही सिर्फ अपने परिवार की ही चिंता रहती थी. भ्रष्टाचार के मामले दर्ज हुए.

आतंकियों के खिलाफ खुली जंग
गोली का जवाब गोली से देने वाली सरकार शायद आतंकियों को पहली बार ऐसा सामना करना पड़ा था. उधर मोदी सरकार की विदेश नीति के चलते पाकिस्तान अलग थलग पड़ा था. आतंकियों को पूरी मदद आ नही पा रही थी.

स्थानीय निकायों के चुनाव
40000 पंचायतों में शांतिपूर्ण चुनाव कर कर मोदी सरकार ने साफ कर दिया कि अब नया नेतृत्व उभरने लगा है.

Move of amit shah on article 370 was nor much known.

आखिरी वक्त तक अमित शाह ने सस्पेंस बनाये रखा
जब कश्मीर घाटी की तरफ सेना का मूवमेंट शुरू हुआ तो एक पल को वहां के लोगों का माथा ठनका था. अमरनाथ यात्रा वापस बुला ली गयी और वहां से फौज को श्रीनगर भेज जाने लगा तो ये लगने लगा कि कुछ बड़ा होने वाला है. सारे पत्ते अमित शाह चल रहे थे. सेना, खुफिया विभाग, कश्मीर के गवर्नर, पुलिस और प्रशासन से सीधे संपर्क में अमित शाह ही थे.

पीएम मोदी को पल पल की खबर दी जा रही थी. लेकिन किसी को ये भनक नहीं लग रही थी कि आखिर अमित शाह करने क्या जा रहे हैं. कश्मीर घाटी से सैलानियों को वापस जाने को कह दिया गया तो राज्य के राजनीतिक दलों ने बवाल करना शुरू किया था कि उन्हें हाउस अरेस्ट कर दिया गया. हुर्रियत की वो ताकत नहींं थी कि वो बंद का आह्वान भी करे.

बीजेपी सांसदों का अभ्यास वर्ग 3 और 4 अगस्त को चल रहा था. लेकिन मोदी और शाह के दिमाग में तो 370 हटाने का जुनून सवार था. शाह संसद में अपने कमरे में ही आला अधिकारियों के साथ बैठक कर रहे थे. संसद इसी बिल का ध्यान रखते हुए 7 अगस्त तक बढ़ा दी गयी थी. यानी एक फुल प्रूफ प्लान अमित शाह का तैयार था जिसे एक के बाद एक अमित शाह अमली जामा पहनाए जा रहे थे.

आरएसएस और विचारधारा से जुड़े लोगों का समर्थन मिला
पीएम मोदी और अमित शाह को याद था कि जनसंघ के नेताओं की कुर्बानी को भूल नहीं जा सकता और संघ की विचारधारा से जुड़ा ये मुद्दा अब ज्यादा दिनों तक हाशिये पर नहीं रखा जा सकता. उन्हें याद था कि पूरे देश में अपने चुनावी भाषणों और अपने संकल्प पत्र में धारा 370 हटाने का वायदा भी किया हुआ है. पूरी घाटी में संघ के फुल टाइमर काम कर रहे थे. पूरे देश को समझाने का भी काम किया कि धारा 370 का विषेश दर्जा राज्य के हित में नहीं. अब कम से कम संघ और उसकी विचारधारा से जुड़े लोग ताल ठोक के कह सकते है कि एजेंडा पर काम हो रहा है और प्रचारक पीएम होने पर उन्हें गर्व भी है. इस बीच राज्यसभा में बिना चुनाव के अपने नंबर बढ़ाने की अमित शाह की रणनीति भी चल ही रही थी.

समर्थकों – विरोधियों सभी ने दी बधाई
संघ के शीर्ष नेताओं ने पीएम को बधाई दी तो दूसरी ओर पीएम मोदी के धुर विरोधी प्रवीण तोगड़िया ने उन्हें बधाई देकर इससे वीरतापूर्ण कदम बताया. विपक्ष के कई दलों ने भी इसका समर्थन कर दिया. ये था एक और एलिमेंट ऑफ सरप्राइज जो पीएम मोदी और अमित शाह की राजनीति की खासियत है. आखिरी वक्त तक पता नही चलता कि वो क्या सरप्राइज देने वाले हैं. धारा 370 सरप्राइज जरूर था लेकिन साथ साथ ये भी साफ था कि कड़े फैसले लेने के लिए जो जिगर चाहिए जो मौजूद नेतृत्व में है.
First published: August 5, 2019, 7:02 PM IST
Loading...
पूरी ख़बर पढ़ें अगली ख़बर
Loading...