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Mission Paani: बारिश की बूंदों को जमाकर गांववालों की प्यास बुझाने में जुटे पूर्व सेना अधिकारी

रिटायर्ड कर्नल एसजी दलवी
रिटायर्ड कर्नल एसजी दलवी

Mission Paani: कर्नल दलवी भारत की जलवायु वास्तविकता परियोजना में जल संरक्षण के लिए राष्ट्रीय कोऑर्डिनेटर हैं. पूर्व सेना अधिकारी ने पानी की समस्या दूर करने के लिए देश के सैकड़ों गांवों में काम किया है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: January 23, 2021, 2:35 PM IST
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नई दिल्ली. ग्रामीण इलाकों में पानी के संकट से वहां रहने वालों लोगों के लिए मुश्किलें बढ़ जाती हैं. हमारे प्राकृतिक संसाधनों में लगातार कमी आ रही है. ऐसे में इसका एकमात्र तरीका है प्राकृतिक संसाधनों का पोषण करना. इसके लिए सबसे बेहतर तरीका है वर्षा जल संचयन (Rainwater harvesting), यानी बारिश के पानी को किसी खास तरीके से इकट्ठा करना. ये एक ऐसी पद्धति है जो दशकों से चली आ रही है लेकिन फिर भी इसका पूरी क्षमता से उपयोग नहीं किया जा रहा है. पानी की दक्कतों को दूर करने के लिए रिटायर्ड कर्नल एसजी दलवी (Retd Colonel SG Dalvi) दिन रात मेहनत कर रहे हैं. उन्होंने पानी की समस्या खत्म करने के लिए पूरा जीवन समर्पित कर दिया है.

कर्नल दलवी भारत की जलवायु वास्तविकता परियोजना में जल संरक्षण के लिए राष्ट्रीय कोऑर्डिनेटर हैं. पूर्व सेना अधिकारी ने पानी की समस्या दूर करने के लिए देश के सैकड़ों गांवों में काम किया है.  ग्रामीण क्षेत्रों में सबसे ज्यादा पानी की समस्या महाराष्ट्र में होती है. अकेले पुणे में नगर निगम ने दो महीनों को जल संकट के महीनों के रूप में घोषित कर रखा है. ये संकट वहां साल 2000 से लगातार जारी है. ऐसे में साल  2007 में सभी नए भवनों, आवासीय या सरकार के लिए वर्षा जल संचयन अनिवार्य कर दिया गया है. लेकिन ये काम ठीक से हो रहा है या नहीं सरकार ने इस पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया है.

6 करोड़ लोगों को पानी की किल्लत
न्यूज 18 के मिशन पानी कार्यक्रम के तहत कर्नल ने पानी के संकट के बारे में विस्तार से बताया. उन्होंने कहा कि नीति अयोग के आंकड़ों के अनुसार भारत के 6 करोड़ लोगों को पानी की दिक्कतों का सामना करना पड़ता है. अपने भाषण में उन्होंने कहा कि लोगों को पानी की भारी किल्लत का सामना करना पड़ता है. लेकिन हम अक्सर पानी की उपेक्षा करते हैं जो हमारे घरों में उपलब्ध है. वो कहते हैं कि हर इलाके में एक समान बारिश नहीं होती है. कई इलाकों में भारी बारिश से बाढ़ आ जाती है तो कुछ जगहों पर मॉनसून के दिनों में भी बारिश नहीं होती है.
छत पर जमा करें पानी


उन्होंने पुणे में अपने प्रोजेक्ट का उधारण देते हुए पानी की अहमियत को समझाया. उन्होंने कहा कि पुणे में औसतन हर साल 750 मिलीमीटर बारिश होती है. जबकि पड़ोसी महानगर मुंबई 2500 मिलीमीटर से अधिक वर्षा होती है. उन्होंने बताया कि  पुणे में 1000 वर्ग फुट की छत पर हर साल 60,000 लीटर पानी जमा किया जा सकता है. जबकि मुंबई जैसे शहर में, समान आकार की छत पर हर साल 2,50,000 लीटर पानी जमा की जा सकती है.

पानी की किल्लत से गरीब होते हैं परेशान
मुंबई-पुणे और उनके आसपास के ग्रामीण इलाकों जैसे शहरों में, भूजल अब कोई विकल्प नहीं है और वे बारिश के मौसम में पानी इकट्ठा करने वाले बांधों और झीलों पर निर्भर हैं. हालांकि, इन संरचनाओं की क्षमता होती है और एक बार उस क्षमता को पूरा करने के बाद इसे बंद करना पड़ता है. ऐसी स्थिति में लोगों को पानी की भारी दिक्तत होती है. आम तौर पर इससे गरीब सबसे अधिक प्रभावित होते हैं क्योंकि वे निजी टैंकर से पानी नहीं खरीद सकते हैं.

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कर्नल की मेहनत से बदल रहे हैं गांव
लेकिन कर्नल के प्रयासों की बदौलत चीजें बदलने लगी हैं. वह कहते हैं कि अब गांव खेम खेड़ा में काफी ज्यादा पानी है. गांव के छात्र पास स्कूल में सभी पेड़ों को पानी देते हैं. गांव वाले कर्नल के प्रति इतने आभारी हैं कि लोग उन्हे 'जल दूत' कहते हैं. कर्नल खेम खेड़ा से प्रेरणा लेने के लिए लोगों से विनती करते हैं. वो कहते हैं कि अगर वह जगह आत्मनिर्भर बन सकता है और वहां पर्याप्त मात्रा में पानी मिल सकता है तो हर जगह ये मिशन पूरा किया जा सकता है.

(आप भी पानी बचाने के लिए हार्पिक-News18 मिशन पानी कैंपेन का हिस्सा बनिए.साथ ही पानी बचाने की कसम खाइए)
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