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अगर भारत में साफ पानी खत्‍म हो गया तो क्या होगा?

यदि हम जलसंकट को कम करने और स्वच्छता को बढ़ावा देने के लिए काम नहीं करेंगे तो ऐसे कई प्रतिकूल प्रभाव हैं जो दिखाई देने लगेंगे.
यदि हम जलसंकट को कम करने और स्वच्छता को बढ़ावा देने के लिए काम नहीं करेंगे तो ऐसे कई प्रतिकूल प्रभाव हैं जो दिखाई देने लगेंगे.

कृषि एक ऐसा उद्योग है जो डे जीरो आने पर खत्‍म हो जाएगा. यदि ग्रामीण जीवन खत्‍म होता है तो इससे पहले से ही भीड़भाड़ वाले शहरों की ओर बड़े पैमाने पर पलायन होगा और लाखों लोग गरीब हो जाएंगे. इससे जनता में असंतोष पनपेगा.

  • News18Hindi
  • Last Updated: January 22, 2021, 8:06 PM IST
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डे ज़ीरो, जब किसी देश या क्षेत्र से पानी खत्‍म हो जाता है, यह एक ऐतिहासिक तबाही है, हम ऐसी आशा करते हैं कि हमें भारत में कभी ऐसी स्थिति का सामना नहीं करना पड़ेगा. अगर ऐसा हुआ तो इसका भारत को संचालित करने वाली नागरिक और सामाजिक संरचनाएं पर भयानक और दीर्घकालीन प्रभाव होगा. गंभीर परिणाम जो चेतावनी के संकेत की तरह कार्य करते हैं और इस तरह की आपदा को रोकने में मदद करते हैं. फिर भी जलसंकट जैसे बढ़ता है और देश के बड़े हिस्‍से में स्‍वच्‍छता की कमी होती है, तो यह हमें आगाह करती है कि समय है, सुधार कर लो. यदि परिस्थितियां सुधार पाने में हम असफल रहे तो परिणाम गंभीर हो जाएंगे.

शहरी ग्रामीण के बीच विभाजन का बढ़ना
हमारे जल संसाधनों और स्वच्छता तक पहुंच में कमी का हमारे ग्रामीण नागरिकों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है. उनमें से अधिकांश अपनी आजीविका के लिए कृषि पर निर्भर हैं. कृषि एक ऐसा उद्योग है जो डे जीरो आने पर खत्‍म हो जाएगा. यदि ग्रामीण जीवन खत्‍म होता है तो इससे पहले से ही भीड़भाड़ वाले शहरों की ओर बड़े पैमाने पर पलायन होगा और लाखों लोग गरीब हो जाएंगे. इससे जनता में असंतोष पनपेगा.

सामाजिक सामंजस्य की हानि
जैसे हर तबाह देश की कहानी में बताया जाता है कि उसके घटते संसाधनों के कारण समाज में बिखराव आ जाता है. ऐसा भारत में विशेष तौर पर हो सकता है, यदि भारत के विभिन्‍न समूहों को पानी और स्‍वच्‍छता के सीमित संसाधनों के लिए प्रतिस्‍पर्धा करने के लिए मजबूर किया जाता है. भारत की विविधता, जिस पर हम गर्व करते हैं, ऐसी स्थिति में कलह और संघर्ष का स्रोत बन जाएगा. इसके साथ ही, आंतरिक मतभेद, पानी और स्वच्छता के मौजूदा संकट को हल करना कठिन बना देगा, जिससे स्थिति और खराब हो जाएगी.



भारतीय सपने का अंत
भारत का विकास लोगों की प्रगतिशीलता और सरल आकांक्षाओं पर बहुत अधिक निर्भर करता है. युवाओं के इन सपनों को पूरा करने के लिए जो उनकी और पूरे देश की उन्‍नति में मदद करते हैं, युवाओं को साफ पानी और स्‍वच्‍छता तक अप्रतिबंधित पहुंच की आवश्यकता होती है. यदि डे जीरो को इस देश के युवाओं को स्वस्थ, पूर्ण जीवन के अवसरों से वंचित करना था, तो यह भारत के आर्थिक भविष्य में एक अपरिवर्तनीय गिरावट का कारण होगा. इससे होने वाली स्वास्थ्य समस्याएं के कारण धनहानि होगी और यह बड़ी संख्या में भारतीयों से आशा या आशावादिता छीन लेगी.

यदि हम जलसंकट को कम करने और स्वच्छता को बढ़ावा देने के लिए काम नहीं करेंगे तो ऐसे कई प्रतिकूल प्रभाव हैं जो हमारे देशवासियों के जीवन में डे ज़ीरो आने से पहले ही दिखाई देने लगेंगे. यहां तक ​​कि पानी और स्वच्छता के हमारे प्रावधानों में वृद्धि से लोगों के जीवन पर बड़ा प्रभाव पड़ सकता है. हमें यह तय करना चाहिए कि उन परिवर्तनों को हमेशा सकारात्मक कैसे सुनिश्चित किया जाए.

'मिशन पानी' सीएनएन न्यूज 18 और हार्पिक इंडिया की पहल है, जो भारत के महत्‍वपूर्ण जल संसाधनों को बचाने और स्‍वच्‍छता भरे जीवन की दिशा में एक अभियान का नेतृत्‍व कर रहा है. आप जल प्रतिज्ञा लेकर इसमें योगदान दे सकते हैं
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