Mission Pani: कोई प्यासा मर रहा है और हम पानी बहा रहे हैं...

दुनिया में करोड़ाें लोग पानी की कमी से जूझ रहे हैं.
दुनिया में करोड़ाें लोग पानी की कमी से जूझ रहे हैं.

नगरों व महानगरों में रहने वाले लोग सच्चाई से तब रूबरू होते हैं, जब नलों की टोटियों से हवा निकल जाती है और वह पानी से बेपानी हो जाती है. हम टुकुर-टुकुर देखते रह जाते हैं और जान पाते हैं पानी का महत्व!

  • News18Hindi
  • Last Updated: November 7, 2020, 10:13 AM IST
  • Share this:
एक वक्त था जब हम यह दुआ करते थे कि हमारे देश में कोई भूखा न रहे. वक्त का पहिया तेजी से घूम चुका है. अब हम यह दुआ कर रहे हैं कि कोई प्यासा न रहे. जरा सोचिये कि कोई प्यासा मर रहा है और हम पानी बहा रहे हैं. जल ही जीवन है, यह सिर्फ वाक्य नहीं है, यह तो जिंदगी की जरूरत है. इन बातों का महत्व अक्सर नगरों व महानगरों में बेमानी हो जाता है.

नगरों व महानगरों में रहने वाले लोग सच्चाई से तब रूबरू होते हैं, जब नलों की टोटियों से हवा निकल जाती है और वह पानी से बेपानी हो जाती है और हम टुकुर-टुकुर देखते रह जाते हैं और जान पाते हैं पानी का महत्व! महानगर के अमीर लोगो तुम भाग्यशाली हो कि तुम्हारे आस-पास पानी की खुली टोटियां हैं, शॉवर हैं, स्विमिंग पूल हैं! तुम जितना चाहो नहाओ और आनंद के लिए जल क्रीड़ा करो, पर तुम भाग्यशाली होते हुए भी अंधे, बहरे व गूंगे हो और अपने आस-पास से अनजान भी. क्या तुमने नहीं सुना कि जिस आटे की तुम रोटियां खाते हो, जिस साग-सब्जी से तुम पोषण तत्व लेते हो, उसे पैदा करने वाला किसान पानी की भयानक मार झेलता है.

आखिर किसको समझें अपराधी कि दूर-दूर तक हरे-भरे खेत गायब हो गए. कौन है वो वन राक्षस, जो वृक्षों का क़त्ल करके निकला और बादलों को घसीट ले गया. किसने बांध डाली नदियां और बना ली बिजली कि नदियों ने बहना ही छोड़ दिया. नहीं सोचा कि हम बिजली के बिना तो दिए की रोशनी में भी रह सकते है लेकिन पानी के बिना जिंदा कैसे रहेंगे. संकल्प लेना होगा की हम बूंद-बूंद की कीमत जानेंगे और ये समझेंगे की जल उलीचने के लिए नहीं, उम्मीदभरे जीवन के लिए होता है. पर्यावरण को बचाना होगा. ये प्रकृति हमें पुकार रही है. ये पेड़ हमें बुला रहे हैं, काटने व बेचने के लिए नहीं, उगाने व बचाने के लिए.



वर्ल्ड वाइल्डलाइफ फंड (WWF) के ने हाल ही में पानी की कमी (Water Crisis Survey) के मुद्दे पर सर्वे किया. इसके नतीजों ने चिंता की लकीरें बढ़ा दी हैं. सर्वे  में कहा गया है कि अगले 30 सालों में दुनिया के 100 शहरों में बेहद गंभीर जलसंकट होगा. इस लिस्ट में 30 शहर भारत के हैं. इसी लिस्ट के समानांतर एक और लिस्ट बनाई गई है, जिन शहरों में कुछ दशकों बाद पानी की समस्या बहुत बढ़ सकती है. इस लिस्ट में भारत के 28 शहर शामिल हैं. विश्लेषण में साफ कहा गया है कि अब भी वक्त है, लेकिन अगर क्लाइमेट चेंज की दिशा में सही और पुख्ता कदम नहीं उठाए गए तो 2050 तक करोड़ों लोगों को पानी के लिए तरसना होगा.  (डिस्क्लेमर: यह लेखक के निजी विचार हैं.)
(लेखक परिचय: समसामयिक विषयों पर लेखन. पर्यावरण, धर्म, शिक्षा, महिलाओं और बच्चों के विकास आदि विषयों पर लगातार लिखती रही हैं.)
अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज