कहीं बाढ़ तो कहीं सूखे से परेशान हैं हम! जानें क्या है इसकी वजह?

पहाड़ों और घाटियों में बांध, नदियों के  जलस्तर, खनन, जंलगों में लग रही आग, सूखा, बाढ़ और बढ़ती जनसंख्या के चलते मौसम में बदलाव हो रहा है.

पहाड़ों और घाटियों में बांध, नदियों के जलस्तर, खनन, जंलगों में लग रही आग, सूखा, बाढ़ और बढ़ती जनसंख्या के चलते मौसम में बदलाव हो रहा है.

पहाड़ों और घाटियों में बांध, नदियों के जलस्तर, खनन, जंलगों में लग रही आग, सूखा, बाढ़ और बढ़ती जनसंख्या के चलते मौसम में बदलाव हो रहा है.

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हमारे देश में एक वक्त में ही अलग-अलग जगह अलग मौसम होता है. बात फिलहाल की करें तो एक ओर जहां पूर्वोत्तर और उत्तर भारत के कई इलाके मानसूनी बारिश और नदियों के उफान के चलते बाढ़ का शिकार हो रहे हैं तो वहीं दूसरी ओर पूर्वी, दक्षिणी और पश्चिमी भारत के कई हिस्सों में पानी ही नहीं है. बीते दिनों चेन्नई का हाल हम देख ही चुके हैं, जहां टैंकरों से पानी पहुंचाया गया. दोगुने दाम पर भी लोग पानी खरीदने को मजबूर हैं.



वहीं दूसरी ओर बारिश शुरू होने के बाद से ही बिहार, उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल , पूर्वोत्तर में असम, सिक्किम, मेघालय, मिजोरम और बंगाल के कई इलाके जलमग्न हो गए. बिहार में कोसी, खतरे के निशान से ऊपर बह रही है और वहां रेड लाइट ऑन कर दी गई है.



जिन प्रदेशों का ऊपर जिक्र किया गया वे एक दूसरे से दूर हैं लेकिन महाराष्ट्र में ही एक ओर जहां मुंबई में जमकर बारिश हुई और लोगों को कई दिनों तक घरों में कैद रहना पड़ा वहीं विदर्भ के कई इलाके सूखाग्रस्त हैं.





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आखिर ऐसा क्यों है? आइए हम आपको कुछ रिपोर्ट्स और तथ्यों के जरिए यह बताते हैं कि एक ओर बाढ़ आती है, कहीं सूखा रहता है....



विज्ञान की पत्रिका Science Advances में प्रकाशित एक रिसर्च अनुसार आने वाले समय में दक्षिण एशिया के कृषि क्षेत्र , भीषण गर्मा का शिकार होंगे. इसका असर, भारत , पाकिस्तान और बांग्लादेश के कृषि क्षेत्रों पर पड़ सकता है. सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय की ओर से जारी एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत में हर साल हीटवेव की बढ़ रही है.







हीटवेव की करीब 448 घटनाएं



साल 2019 में हीटवेव की करीब 448 घटनाएं हुईं. आंकड़ों की माने तो 19वीं सदी के बाद से पृथ्वी की सतह का तापमान 3 से 6 डिग्री तक बढ़ गया है. तापमान परिवर्तन के चलते ही जलवायु परिवर्तन नई करवट ले रहा है. संभव है कि तीन से 6 डिग्री तक का तापमान हमें सामान्य लग रहा हो लेकिन इन्हीं की वजह से हमारा आने वाला भविष्य अंधकारमय हो सकता है.



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मेडिकल पत्रिका लेंसेट की एक रिपोर्ट के अनुसार जलवायु परिवर्तन की वजह से दुनिया को हुए कुल नुकसान का 99 प्रतिशत हिस्सा भारत सरीखे निम्न आय वाले देश में हुआ.  जलवायु परिवर्तन का सबसे बड़ा असर मौसम पर पड़ता है. एशिया में तापमान 50 डिग्री तक पहुंच चुका है.



हाल ही में ओडिशा, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश और केरल में आए चक्रवात भी आए जिन्हें जलवायु परिवर्तन का परिणाम माना जा रहा है. कुछ रिपोर्ट के अनुसार इस सदी के आखिरी तक तमिलनाडु का तापमान 3.1 डिग्री तक बढ़ सकता है वहीं बारिश में चार फीसदी की कमी आ सकती है.







भारत में अब तक 3,660 मौतें



एक आंकड़े के अनुसार जलवायु परिवर्तन की वजह से भारत में अब तक 3,660 मौतें हो चुकी हैं.  दुनिया भर में इन मौतों की संख्या 5.2 लाख है. जर्मनवॉच की ओर से जारी आंकड़ों की मानें तो साल 2017 में भारत में खराब मौसम के कारण आई बाढ़, बारिश और तूफान से कम से कम 2,736 लोगों की मौत हो गई.



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कई रिपोर्ट्स में कहा जा चुका है कि पहाड़ों और घाटियों में बांध, नदियों के  जलस्तर, खनन, जंलगों में लग रही आग, सूखा, बाढ़ और बढ़ती जनसंख्या के चलते मौसम में बदलाव हो रहा है. नदियों, तालाब और पोखरों की जमीन पर कब्जा कर घर बनाए जा रहे हैं. जलस्तर घट रहा है.  ऐसे में दुनिया की ढाई फीसदी जमीन, चार फीसदी पानी के साथ 17 फीसदी आबादी वाले मुल्क के लिए समस्याएं बढ़ सकती हैं.



एक रिपोर्ट के अनुसार ग्लोबल वार्मिंग को नियंत्रित नहीं किया गया तो दुनिया के सामने समस्या बढ़ती चली जाएगी.




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