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एमएम नरवणे आज हो रहे सेवानिवृत्त, जानें LAC गतिरोध से लेकर LoC युद्धविराम तक उनके कार्यकाल के मुख्य बिंदु

थल सेनाध्यक्ष एमएम नरवणे आज सेवानिवृत्त हो रहे हैं. (फाइल फोटो)

थल सेनाध्यक्ष एमएम नरवणे आज सेवानिवृत्त हो रहे हैं. (फाइल फोटो)

MM Naravane, New Army Chief Manoj Pande: थलसेना अध्यक्ष से पहले नरवणे ने जम्मू और कश्मीर के साथ साथ पूर्वोत्तर में शांत ...अधिक पढ़ें

नई दिल्ली: थल सेना अध्यक्ष मनोज मुकुंद नरवणे (MM Naravane) आज अपने पद से इस्तीफा देंगे. एमएम नरवणे भारतीय थल सेना के 27वें प्रमुख थे. अपने कार्यकाल के दौरान नरवणे ने वर्तमान और भविष्य की उभरती चुनौतियों का सामना करने और उत्तरी क्षेत्र के साथ साथ पूर्वोत्तर सीमाओं की सुरक्षा पर विशेष ध्यान दिया. इसके लिए उन्होंने आपेक्षित क्षमताओं और बुनियादी ढांचे को विकसित करने की दिशा में कई अहम कदम उठाए.

आर्मी चीफ ने अपना पद छोड़ने से पहले शनिवार को राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पर जाकर माल्यार्पण किया और साउथ ब्लॉक के लॉन में गार्ड ऑफ ऑनर प्राप्त किया.

जनरल एमएम नरवणे का जन्म 22 अप्रैल 1960 को पुणे में हुआ था. वह भारतीय वायु सेना में एक पूर्व अधिकारी के बेटे है. उन्होंने राष्ट्रीय रक्षा अकदामी, पुणे और भारतीय सैन्य अकादमी, देहरादून के पूर्व छात्र हैं. उन्होंने रक्षा अध्ययन में एम. फिल भी किया हुआ है.

थलसेना अध्यक्ष से पहले नरवणे ने जम्मू और कश्मीर के साथ साथ पूर्वोत्तर में शांति, और अत्यधिक सक्रीय आतंकवाद विरोधी वातारण में कई कमांड और स्टाफ नियुक्तियों में काम किया. उन्होंने जम्मू और कश्मीर में एक राषट्रीय राइफल्स बटालियन और पूर्वी मोर्चे पर एक पैदल सेना ब्रिगेड की कमान भी संभाली थी.

नवरणे ने 31 दिसंबर 2019 को थल सेनाध्यक्ष की नियुक्ति से पहले उन्होंने सेना प्रशिक्षण कमान शिमला और चीन के साथ भारत की लगभग 4000 किलोमीटर लंबी सीमा की देखभाल करने वाली पूर्वी कमान का सफलतापूर्वक नेतृत्व किया था.

जनरल मनोज पांडे शनिवार को एमएन नरवणे से उनके उत्तराधिकार के रूप में पदभार ग्रहण करेंगे. वह 29वें सेना प्रमुख और कोर ऑफ इंजीनियर्स के पहले अधिकारी हैं जिन्हें यह अवसर मिला है.

आपको बता दें कि जनरल एमएम नरवणे न जब देश के थल सेना अध्यक्ष के तौर पर कार्यभार ग्रहण किया था इसके ठीक एक महीने बाद लद्दाख की गलवान घाटी में चीनी सैनिकों और भारतीय सैनिकों के बीच हिंसक झड़प की घटना हुई थी. इस घटना में 20 भारतीय सैनिक शहीद हो गए थे . चीन के साथ एलएसी गतिरोध, पाकिस्तान के साथ नियंत्रण रेखा (एलओसी) पर युद्धविराम की पुनरावृत्ति, और ऑर्डर ऑफ बैटल (ओआरबीएटी) का पुनर्लेखन कुछ ऐसे मुद्दे थे जो नवरणे के कार्यकाल को एक्शन से भरपूर बना दिया था.

Tags: Army Chief, General MM Naravane

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