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कानून के बिना कैसे रुक पाएगी मॉब लिंचिंग?

कानून के बिना कैसे रुक पाएगी मॉब लिंचिंग?

सिर्फ साल 2018 की बात करें तो व्हाट्सऐप के जरिए अफवाह फैलने के बाद हुई ये 21वीं हत्या है. इस आंकड़ें में गोरक्षा के नाम पर हुई लिंचिंग की घटनाओं को शामिल कर दें तो साल 2015 से अब तक 100 से ज्यादा हत्याएं हो चुकीं हैं.

सिर्फ साल 2018 की बात करें तो व्हाट्सऐप के जरिए अफवाह फैलने के बाद हुई ये 21वीं हत्या है. इस आंकड़ें में गोरक्षा के नाम पर हुई लिंचिंग की घटनाओं को शामिल कर दें तो साल 2015 से अब तक 100 से ज्यादा हत्याएं हो चुकीं हैं.

सिर्फ साल 2018 की बात करें तो व्हाट्सऐप के जरिए अफवाह फैलने के बाद हुई ये 21वीं हत्या है. इस आंकड़ें में गोरक्षा के नाम पर हुई लिंचिंग की घटनाओं को शामिल कर दें तो साल 2015 से अब तक 100 से ज्यादा हत्याएं हो चुकीं हैं.

    कर्नाटक के बीदर में बीते शनिवार को एक बार फिर बच्चा चोरी के शक में भीड़ ने चार युवकों पर हमला कर दिया. इस मॉब लिंचिंग में एक युवक की मौके पर ही मौत हो गई जबकि तीन गंभीर रूप से घायल हैं. बच्चा चोरी की अफवाह के चलते साल 2017 से अब तक पीट-पीट कर मार देने से हुई ये 32वीं हत्या है. सिर्फ साल 2018 की बात करें तो वाट्सएप के जरिए अफवाह फैलने के बाद हुई ये 21वीं हत्या है. इस आंकड़ें में गोरक्षा के नाम पर हुई लिंचिंग की घटनाओं को शामिल कर दें तो साल 2015 से अब तक 100 से ज्यादा मौतें हो चुकीं हैं.

    सुप्रीम कोर्ट भी नाराज़
    बीती 3 जुलाई को लिंचिंग के लिए नया कानून मासुका (मानव सुरक्षा कानून) लाने से संबंधित याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने भी नाराजगी जाहिर की थी. कोर्ट ने इन याचिकाओं पर फैसला सुरक्षित रखते हुए कहा था कि गोरक्षकों और अफवाहों के द्वारा हिंसा को रोकने के लिए एक विस्तृत आदेश जारी किया जाएगा. कोर्ट ने केंद्र को इस मसले पर सलाह दी थी कि आर्टिकल 257 के तहत उसे एक स्कीम लानी चाहिए. हालांकि एएसजी नरसिम्हा ने सरकार की तरफ से कहा कि इस मामले में किसी स्कीम की जरूरत नहीं है, ये लॉ एंड ऑर्डर का मामला है. केंद्र सरकार ने कहा कि इस तरह की घटनाओं से निपटने की जिम्मेदारी राज्य सरकारों की है. केंद्र सरकार के मुताबिक मॉब लिंचिंग के लिए अलग से कानून बनाने की जरूरत नहीं है.



    क्या है मासुका?
    वरिष्ठ वकील संजय हेगड़े ने मॉब लिंचिंग से निपटने के लिए प्रस्तावित कानून 'मासुका' का मसौदा विधेयक तैयार किया है. हेगड़े के मुताबिक मौजूदा कानून मॉब लिंचिंग से निपटने के लिए पर्याप्त नहीं हैं और इस प्रकार के अपराध के दोषियों को आजीवन कारावास होना चाहिए. हेगड़े के आलावा लिंचिंग से जुड़ी याचिकाएं तुषार गांधी, तहसीन पुनेवाला और इंदिरा जयसिंह ने भी दायर की हैं. इस प्रस्तावित कानून के बारे में हेगड़े का कहना है कि यह मसौदा विधेयक गालीगलौज के साथ भीड़ की अप्रत्यक्ष उत्तेजना को अपराध मानता है. मुकदमा चलाए जाने पर इस अपराध के लिए अधिकतम आजीवन कारावास का प्रावधान है.



    इस प्रकार की घटनाओं को रोकने में जानबूझकर विफल रहने वाले पुलिस अधिकारियों और जिलाधिकारियों के लिए एक साल तक की कैद अथवा जुर्माना अथवा दोनों का प्रावधान है. मसौदा विधेयक में एक ऐसा प्रावधान भी है जिसके तहत स्थानीय थानेदारों को उनके क्षेत्र में होने वाली लिंचिंग की घटनाओं के लिए जिम्मेदार ठहराया गया है. हालांकि एक समयबद्ध न्यायिक जांच के जरिये यह साबित किया जा सकता है कि वास्तव में घटना उनके नियंत्रण से बाहर थी. इससे जुड़े अन्य सुझावों में नोडल अधिकारी, हाइवे पेट्रोल, FIR, चार्जशीट और जांच अधिकारियों की नियुक्ति जैसे कदम भी शामिल हैं.

    मासुका के तहत दोषी से लिए गए जुर्माने की रकम को भी पीडि़त परिवारों के बीच वितरित करने का प्रावधान है. गवाहों की सुरक्षा के लिए तमाम प्रावधान किए गए हैं ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि लिंचिंग के प्रत्यक्षदर्शियों को बोलने में कोई हिचकिचाहट न हो. पुलिस और अदालत द्वारा गवाहों की पहचान को गुप्त रखने और इस जानकारी को लीक करने वालों को दंडित करने का प्रावधान दिया गया है.

    अभी कैसे हो रही है कार्रवाई ?
    लिंचिंग के नेचर और मोटिवेशन के सामान्य मर्डर से अलग होने के बावजूद भारत में इसके लिए कोई अलग से कानून मौजूद नहीं है. आईपीसी में लिंचिंग जैसी घटनाओं के विरुद्ध कार्रवाई को लेकर किसी तरह का ज़िक्र नहीं है और इन्हें सेक्शन 302 (मर्डर), 307 (अटेम्प्ट ऑफ मर्डर), 323 ( जानबूझकर घायल करना), 147-148 (दंगा-फसाद), 149 (आज्ञा के विरूद्ध इकट्ठे होना) के तहत ही डील किया जाता है. CRPC के सेक्शन 223A में भी इस तरह के क्राइम के लिए उपयुक्त क़ानून के इस्तेमाल की बात कही गई है, साफ़-साफ़ इस क्राइम के बारे में कुछ भी नहीं है.



    सुप्रीम कोर्ट के वकील सुशील टेकरीवाल के मुताबिक लिंचिंग की घटनाएं स्थानीय सरकारों द्वारा समर्थित होती हैं और आरोपियों को एक तरह से संरक्षण मिला होता है, इनसे मौजूदा कानूनों के जरिये निपटना संभव नहीं लगता. टेकरीवाल ने कहा कि लिंचिंग को लेकर हिंदुस्तान में कोई कानून नहीं है, हम लिंचिंग को आम हत्या के कानून से जोड़ते हैं. कानून के तहत धारा 148, 149 दंगे की बात करती है, धारा 302 हत्या की बात करती है, 323, 325 चोटों की बात करती है और 307 हत्या के प्रयास की बात करती है, इन्हीं धाराओं का प्रयोग को लिंचिंग के मामलों में किया जाता है. दिल्ली हाईकोर्ट में वकालत कर रहे एडवोकेट कवीश शर्मा भी मानते हैं आम हत्या की घटना और लिंचिंग की घटना को अलग-अलग करना होगा. लिंचिंग की पहचान करनी होगी और फिर उसके बाद उसपर कानून बनाना पड़ेगा. दहेज रोकथाम अधिनियम और पॉस्को की तरह ही लिंचिंग मामलों के लिए भी अलग कानून की ज़रुरत है.

    लिंचिंग की घटनाएं बढ़ रहीं हैं...
    - 14 जुलाई कर्नाटक के बीदर जिले में 'बच्चा चोरी' के शक में 32 साल के सॉफ्टवेयर इंजीनियर और हैदराबाद के मलकपेट निवासी मोहम्मद आजम अहमद की पीट-पीट कर हत्या कर दी. उनके तीन अन्य साथी इस घटना में बुरी तरह घायल हो गए.
    -1 जुलाई को चेन्नई में बिहारी मजदूर बी गोपाल साहू और के विनोद बिहारी को लोगों ने बच्‍चे का अपहरण करने के शक में बुरी तरह पीट दिया.
    - 1 जुलाई को ही महाराष्ट्र के धुले में 5 लोगों को बच्चा चुराने के शक में पीट-पीट कर मार दिया गया.
    - 29 जून को त्रिपुरा में यूपी के रहने वाले सब्जी बेच रहे शख्स को बच्चा चुराने के शक में भीड़ ने लिंच कर दिया.
    - 27 जून को मध्य प्रदेश में भीड़ ने इसी शक में एक शख्स को पीट-पीट कर मार दिया.
    - गोवा में रहने वाले नीलोत्पल दास (29) और उनके मित्र अभिजीत नाथ (30) आठ जून की रात असम के कार्बी आंगलांग में बच्चा चुराने के शक में पीट-पीट कर मार दिया गया.
    - झारखंड के सिंहभूम जिले में हुईं अलग-अलग घटनाओं में कम से कम 9 लोगों ने ऐसी घटनाओं में अपनी जान गंवा दी थी.
    - पिछले दो महीनों में भारत में 15 लोगों को भीड़ ने पीट-पीट कर मार डाला. असम, आंध्र प्रदेश, त्रिपुरा, महाराष्ट्र, बंगाल, तेलंगाना में ऐसी दो-दो घटनाएं और गुजरात और कर्नाटक में एक-एक घटना सामने आई है.
    - 2018 में अब तक 21 लोगों को बच्चा चुराने के शक में लिंच कर दिया गया.
    - अकेले ओडिशा में पिछले 30 दिन में हमले की ऐसी 15 घटनाएं हुई हैं, जिनमें कुल 28 लोगों के साथ मारपीट की गई.
    - महाराष्ट्र में बीते 25 दिनों में 14 लिंचिंग की घटनाओं में 9 मौतें हुई हैं और 60 लोग गिरफ्तार हुए हैं.
    - गौमांस और बच्चा चुराने के शक में साल 2015 से अब तक लिंचिंग के जरिए 100 से ज्यादा मौतें दर्ज की गई हैं.

    सच्चाई नहीं परखते 40% पढ़े-लिखे युवा
    यूनिवर्सिटी ऑफ वारविक में हुई रिसर्च के मुताबिक, 40 फीसदी पढ़े-लिखे युवा भी खबर की सच्चाई नहीं परखते, यहां तक कि अगर उन्हें लगता है कि कुछ गलत है तो भी सिर्फ 45 फीसदी युवा ही खबर की सत्यता जांचते हैं. सोशल मीडिया और इंटरनेट के प्रसार से भारत में समस्या और भी गंभीर हो गई है.

    सरकारें क्या कर रही हैं?
    महज दो महीनों के अन्दर 15 हत्याओं के बाद केंद्र सरकार ने कहा है कि अफवाहों को रोकने के लिए जल्द ही एक सोशल मीडिया पॉलिसी बनाई जाएगी. देश के आईटी मंत्रालय को इसका ड्राफ्ट तैयार करने का जिम्मा सौंपा गया है. गृहमंत्रालय सभी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के साथ जल्द ही बैठक बुलाएगी. इसके तहत सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के प्रतिनिधियों के साथ गृहमंत्रालय में बैठक होगी. इसमें विचार होगा कि सभी सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर आपत्तिजनक और नफ़रत फैलाने वाले पोस्ट को फैलने से कैसे रोका जाए. केंद्र सरकार ने वाट्सएप को भी फर्जी मैसेज रोकने के लिए चेतावनी जारी की है. केंद्रीय सूचना और प्रौद्योगिकी मंत्री रवि शंकर प्रसाद ने सोशल प्लेटफॉर्म मुहैया कराने वाली कंपनियों को चेतावनी देते हुए कहा था कि फेक मैसेज से निपटना कोई रॉकेट साइंस नहीं है. सोशल मीडिया की भी जिम्मेदारी हो कि वह गलत सूचनाएं फैलाने का जरिया न बनें.



    राज्य सरकारें भी अपनी स्तर पर सावधानी बरत कर ऐसी घटनाओं को रोक सकती हैं इसका बेहतरीन उदाहरण जम्मू-कश्मीर में देखने को मिला है. जहां सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर अफवाहों के प्रसार को रोकने के लिए किश्तवाड़ जिला प्रशासन ने व्हाट्सएप ग्रुप एडमिन को जिलाधिकारी कार्यालय में 10 दिन के भीतर रजिस्ट्रेशन कराने को कहा है. कड़ा कदम उठाते हुए लोगों से यह भी कहा गया है कि वे अधिकारियों को शपथ पत्र देकर कहें कि उनके सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर अपलोड या फॉर्वर्ड की हुई चीजों के लिए वह व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार होंगे और इस तरह की चीजों से कानून के उल्लंघन की स्थिति में कानूनी कार्रवाई का सामना करने के करने के लिए तैयार होंगे.

    वाट्सएप क्या कर रहा है ?
    वाट्सएप अपने फीचर्स में कई नए बदलाव करने जा रहा है. बिना सोचे समझे मेसेज फॉर्वर्ड करने के प्रचलन को कंट्रोल करने के लिए वाट्सएप अब मार्क स्पैम का ऑप्शन लाएगा. इससे वास्तविक और फेक मेसेज में अंतर करना आसान होगा. ज्यादा से ज्यादा लोगों के स्पैम मार्क करने पर यह मेसेज ब्लॉक हो जाएगा और इसे आगे फॉर्वर्ड नहीं किया जा सकेगा. कुछ दिनों पहले भी वाट्सएप ने ग्रुप चैट में कई नए फीचर ऐड किए थे. इस सेंड परमीशन फीचर के तहत वाट्सएप ग्रुप का एडमिन अब यह फैसला ले सकता है कि ग्रुप का कौन सा मेंबर मेसेज कर सकता है और कौन सा नहीं.

    Tags: Karnataka, Mob lynching, Supreme Court

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