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मॉडर्ना वैक्सीन को आज मिल सकती है DCGI से मंजूरी, सिप्ला ने मांगी आयात की इजाजत

क्लीनिकल ट्रायल का डेटा बताता है कि कोरोना वायरस संक्रमण के लक्षणों वाले मामलों के खिलाफ मॉडर्ना की वैक्सीन 90 फीसदी से ज्यादा कारगर है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Shutterstock)

क्लीनिकल ट्रायल का डेटा बताता है कि कोरोना वायरस संक्रमण के लक्षणों वाले मामलों के खिलाफ मॉडर्ना की वैक्सीन 90 फीसदी से ज्यादा कारगर है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Shutterstock)

Moderna Vaccine in India: यह वैक्सीन मैसेंजर RNA पर निर्भर करती है, जो सेल्स को कोरोना वायरस के खिलाफ इम्युनिटी तैयार करने के लिए प्रोग्राम करते हैं. एनालिस्ट्स का मानना है कि फाइजर के साथ-साथ इस वैक्सीन को भी अमीर देश पहली पसंद मान रहे हैं.

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    नई दिल्ली. भारत (India) में जल्द ही मॉडर्ना की वैक्सीन उपलब्ध हो सकती है. फार्मा कंपनी सिप्ला (Cipla) ने ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (DCGI) से वैक्सीन आयात करने की अनुमति मांगी है. इस बात की जानकारी मंगलवार को सूत्रों ने दी है. दुनिया के कई अमीर देशों में इस वैक्सीन का इस्तेमाल किया जा रहा है. आंकड़ों के लिहाज से अमेरिका में अब तक 12 करोड़ नागरिकों को फाइजर (Pfizer) या मॉडर्ना की वैक्सीन दी जा चुकी है, जिसका अब तक कोई भी बड़ा जोखिम सामने नहीं आया है.

    सूत्रों ने जानकारी दी है कि सिप्ला ने बीते सोमवार को वैक्सीन आयात करने की डीसीजीआई से अनुमति मांगी थी. खबर है कि मंगलवार को ही कंपनी को मंजूरी मिल सकती है. बीते हफ्ते ही दिल्ली सरकार भी केंद्र सरकार से फाइजर, मॉडर्ना और जॉनसन एंड जॉनसन जैसे अंतरराष्ट्रीय वैक्सीन उम्मीदवारों को इजाजत देने की अपील की थी.

    यह भी पढ़ें: COVID-19 Delta+ Variant : कितना खतरनाक है कोरोना का डेल्टा प्लस वेरिएंट, जानिए क्या कहते हैं विशेषज्ञ

    भाषा के अनुसार, दिल्ली में सत्तारूढ़ दल आम आदमी पार्टी की विधायक ने बुलेटिन जारी करते हुए कहा था, ‘हम केंद्र से फाइजर, मॉडर्ना और जॉनसन एंड जॉनसन के टीकों को जल्द से जल्द मंजूरी देने और इसे भारतीय जनता के लिए उपलब्ध कराने का अनुरोध करते हैं. भारत में जितनी तेजी से टीकाकरण होगा, उतनी ही जल्दी यह कोविड से सुरक्षित होगा.’ इससे पहले नेशनल कोविड टास्क फोर्स के प्रमुख वीके पॉल भी कह चुके हैं कि सरकार लगातार विदेशी वैक्सीन निर्माताओं के संपर्क में है.

    मॉडर्ना की वैक्सीन को जानिए
    यह वैक्सीन मैसेंजर RNA पर निर्भर करती है, जो सेल्स को कोरोना वायरस के खिलाफ इम्युनिटी तैयार करने के लिए प्रोग्राम करते हैं. एनालिस्ट्स का मानना है कि फाइजर के साथ-साथ इस वैक्सीन को भी अमीर देश पहली पसंद मान रहे हैं. क्लीनिकल ट्रायल का डेटा बताता है कि कोरोना वायरस संक्रमण के लक्षणों वाले मामलों के खिलाफ मॉडर्ना की वैक्सीन 90 फीसदी से ज्यादा कारगर है.



    अमेरिका और यूरोपीय संघ लगातार mRNA वैक्सीन का स्टॉक जमा करने की कोशिश कर रहे हैं. वहीं, जापान भी जून के अंत तक फाइजर के 10 करोड़ डोज प्राप्त करने की तैयारी कर रहा है. जानकारों का कहना है कि ज्यादा कीमत, सीमित उत्पादन और परिवहन के लिए ज्यादा शर्तें और स्टोरेज की परेशानी के चलते कम आय वाले देशों में mRNA वैक्सीन की उपलब्धता काफी कम है.

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