एक्शन में आए पीएम मोदी, नौकरियां देने के लिए उठाया ये बड़ा कदम

इन्वेस्टमेंट एंड ग्रोथ की कैबिनेट कमेटी में प्रधानमंत्री मोदी, गृहमंत्री अमित शाह, सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (एमएसएमई) मंत्री नितिन गडकरी, वित्तमंत्री निर्मला सीतारमन और व्यापार मंत्री पीयूष गोयल शामिल होंगे.

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Updated: June 5, 2019, 5:55 PM IST
एक्शन में आए पीएम मोदी, नौकरियां देने के लिए उठाया ये बड़ा कदम
प्रधानमंत्री ने आर्थिक वृद्धि और नौकरियों पर जोर देने के लिए मंत्रियों की दो उच्चस्तरीय कमेटियों का गठन किया है (फोटो क्रेडिट-पीटीआई)
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Updated: June 5, 2019, 5:55 PM IST
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंत्रियों के दो उच्चस्तरीय पैनल बनाए हैं. इन दोनों का ही नेतृत्व खुद प्रधानमंत्री के हाथों में है. इन दोनों ही पैनलों का लक्ष्य सरकार के सामने खड़े दो सबसे बड़े चैलेंज आर्थिक वृद्धि और नौकरियों से निपटना होगा. इस मामले से जुड़े सूत्रों ने News18 को बताया कि इन दोनों पैनल का गठन दोनों ही क्षेत्रों में पूरा ध्यान देकर तेज काम करने के लिए किया गया है.

निवेश और आर्थिक वृद्धि की कमेटी में पांच हाईप्रोफाइल मंत्री
प्रधानमंत्री के नेतृत्व में पांच सदस्यीय कैबिनेट कमेटी का इन्वेस्टमेंट और ग्रोथ पर ध्यान देने के लिए गठन किया गया है. इस कमेटी में गृहमंत्री अमित शाह, सड़क-परिवहन और एमएसएमई मंत्री नितिन गडकरी, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमन और रेलवे-व्यापार मंत्री पीयूष गोयल को भी शामिल किया गया है.

नौकरियों के सृजन के लिए काम करेगी लंबी-चौड़ी टीम

प्रधानमंत्री ने एक दूसरी 10 सदस्यीय कमेटी बनाई है, जिसका काम होगा नौकरियों की उपलब्धता तय करना और स्किल डेवलपमेंट पर जोर देना. इस कमेटी में भी अमित शाह, निर्मला सीतरमन, पीयूष गोयल, ग्रामीण विकास और पंचायती राज मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर, एचआरडी मंत्री रमेश पोखरियाल 'निशंक', पेट्रोलियम और स्टील मंत्री धर्मेंद्र प्रधान, स्किल और इंटरप्रेन्योरशिप मंत्री महेंद्र नाम पांडेय और राज्य मंत्री संतोष कुमार गंगवार और हरदीप सिंह पुरी को शामिल किया गया है. गंगवार और पुरी दोनों के पास क्रमश: श्रम-रोजगार और आवास-शहरी मामलों के मंत्रालय हैं.

बजट में दिख सकता है कमेटियों के सुझावों का असर
इन दोनों ही कमेटियों का काम अपने-अपने मंत्रालयों के जरिये सरकार की दोनों बड़ी चुनौतियों पर काम करना होगा. इन कमेटियों के कुछ सुझाव जल्द ही आने वाले केंद्रीय बजट में देखने को मिल सकते हैं. 5 जुलाई को केंद्रीय बजट वित्तमंत्री निर्मला सीतारमन को पेश करना है.
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ये दोनों ही कमेटियां मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल में सबसे पहले बनाई गई कमेटियां हैं. यही वजह है कि इन्हें इतने जरूरी दो मामलों पर काम करने के लिए लगाया गया है. इस दौरान उन्हें घरेलू और अंतरराष्ट्रीय दोनों ही प्रभावों को भी योजना बनाने के दौरान ध्यान में रखने को कहा गया है.

स्थिति की भयावहता दिखा रहे हैं लगातार आने वाले आंकड़े
पिछले शुक्रवार को सामने आए सरकार आंकड़ों में बताया गया कि वित्तीय वर्ष 2018-19 में जनवरी से मार्च तक की तिमाही में भारत की आर्थिक वृद्धि दर बहुत कम होते हुए सिर्फ 5.8% रह गई थी. जबकि इसी दौरान चीन की आर्थिक वृद्धि दर 6.4% थी. यह पिछले साढ़े चार सालों में किसी तिमाही में भारत की सबसे कम वृद्धि दर थी. इसके अलावा दो सालों बाद यह पहली बार हुआ है कि भारत की वृद्धि दर चीन से कम रही हो.

पिछले हफ्ते सांख्यिकी मंत्रालय के जारी किए अलग-अलग आंकड़ों से पता चला कि वित्तीय वर्ष 2017-18 के दौरान बेरोजगारी दर बढ़कर 6.1% पर पहुंच गई थी जो कि भारत में पिछले 45 सालों में सबसे ज्यादा थी. ये आंकड़े साल की शुरुआत में कई अखबारों में छपे आंकड़ों से मेल खाते हैं जो सरकार के लिए आलोचना का सबब बने थे.

हालांकि सरकार ने कहा है कि नेशनल सैम्पल सर्वे के जारी किए आंकड़ों की पहले के आंकड़ों से तुलना नहीं की जानी चाहिए क्योंकि नए आंकड़े एक नई पद्धति पर आधारित हैं.

पिछले पूरे कार्यकाल में सिर्फ 6 कमेटियों का हुआ था गठन
अपने पहले कार्यकाल में प्रधानमंत्री मोदी ने कुल मिलाकर मंत्रियों के 6 पैनल बनाए थे. इसमें कैबिनेट को अप्वाइंट करने वाली कमेटी, कैबिनेट कमेटी ऑन एकोमडेशन, कैबिनेट कमेटी ऑन इकॉनमिक अफेयर्स, कैबिनेट कमेटी ऑन पार्लियामेंट्री अफेयर्स, कैबिनेट कमेटी ऑन पॉलिटिकल अफेयर्स और कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी शामिल थीं.

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First published: June 5, 2019, 5:42 PM IST
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