तो ऐसे पारित हो सकता है राज्य सभा में ट्रिपल तलाक बिल

अभी राज्य सभा में बहुमत में नहीं है सरकार, लेकिन इसी सत्र में ट्रिपल तलाक बिल लाने की है तैयारी

Niraj Kumar | News18Hindi
Updated: July 29, 2019, 1:49 PM IST
तो ऐसे पारित हो सकता है राज्य सभा में ट्रिपल तलाक बिल
लोकसभा से ट्रिपल तलाक बिल पास कराने के बाद इसे राज्य सभा में इसी सत्र में लाए जाने के संकेत हैं (फाइल फोटो)
Niraj Kumar
Niraj Kumar | News18Hindi
Updated: July 29, 2019, 1:49 PM IST
लोकसभा में अपने बहुमत के दम पर आसानी से पारित करा चुकी ट्रिपल तलाक बिल पर एनडीए और बाकी विपक्ष की असली परीक्षा  राज्यसभा में होगी. राज्यसभा में न तो एनडीए और न ही यूपीए बहुमत में है, ऐसे में गैर एनडीए और गैरयूपीए पर बिल के पारित होने की निर्भरता काफी बढ़ जाती है. एनडीए के लिये चुनौती इसलिये भी बढ़ गई है की जेडीयू ने बिल को समर्थन न देने का फैसला किया है और आल इण्डिया अन्नाद्रमुक ने भी बिल पर सवाल खड़ा किया है. हालांकि इस बात की उम्मीद कम है की जेडीयू या अन्नाद्रमुक राज्यसभा में बिल के विरोध में मतदान करेंगे क्योंकि लोकसभा में जेडीयू ने वॉक आउट किया था और अन्नाद्रमुक ने विरोध नहीं किया था.

आँकड़ो का गणित !
राज्यसभा में आकड़ों की बात करें तो यूं तो कुल सदस्य संख्या सदन की 245 है लेकिन फिलहाल 4 रिक्तियों की वजह से वास्तविक सदस्य संख्या सदन की 241 है. एनडीए की संख्या 113 है जिसमें नामांकित सांसद भी शामिल हैं जबकि कांग्रेस समेत बाकी यूपीए के घटक दलों की संख्या 68 है. इसके अलावा दूसरे विपक्षी पार्टियों के पास राज्यसभा में 42 सांसद हैं. जबकि बाकी 18 न तो बीजेपी के साथ हैं न तो बीजेपी के खिलाफ .

वॉक आउट का भी मिलेगा फायदा!

भले ही एनडीए के पास राज्यसभा में बहुमत न हो लेकिन एनडीए का पलड़ा भारी है. इस बात की पूरी उम्मीद है की सरकार राज्यसभा में ट्रिपल तलाक बिल को पारित करा लेगी. एनडीए की सहयोगी और कुछ दूसरी पार्टियों ने बिल पर भले ही सवाल उठाया है लेकिन इस बात की पूरी सम्भावना है की वो राज्यसभा में बिल के खिलाफ मतदान नहीं करेंगी क्योंकि ऐसी पार्टियां या तो सदन से वॉक आउट या फिर बिल पर मतदान के दौरान अनुपस्थित रहेंगी.

बीजेडी के समर्थन का सरकार को भरोसा
राज्यसभा में बिल पर मतदान के दौरान बीजेडी के 7 सांसद बिल के समर्थन में वोट कर सकते हैं जिससे बिल को पारित कराने के लिये आवश्यक संख्या तक सरकार पहुंच जाएगी. भले है फिलहाल बिल को पारित कराने के लिये बहुमत का आँकड़ा 121 हो लेकिन जेडीयू के 6 सांसद बिल के दौरान अगर वॉक आउट करते हैं तो ये आँकड़ा 118 हो जायेगा जबकि बीजेडी के 7 सांसदों के समर्थन से बिल के पक्ष में एनडीए और बीजेडी समेत 119 सांसद हो जायेंगे. यही नहीं अगर अन्नाद्रमुक के 11 और टीआरएस के 6 और वाईएसआर के 2 सांसद अगर बिल पर वोटिंग के दौरान वॉक आउट या अनुपस्थित रहते हैं तो बिल को पारित कराने के लिये बहुमत का आँकड़ा और गिरेगा, लेकिन अन्नाद्रमुक की अनुपस्थिति से एनडीए की सदस्य संख्या भी घटकर 102 रह जाएगी. ऐसे में सरकार की नज़र एक एक पार्टी और एक एक सांसद पर है ताकी किसी तरह बहुमत के आँकड़े को हासिल किया जाये.
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लोकसभा से पारित हो चुका है बिल
ट्रिपल तलाक बिल लोकसभा से पारित हो चुका है और अब इंतज़ार राज्यसभा का है. हालांकि सरकार ने अध्यादेश के जरिये इस कानून को लागू कर रखा है क्योंकि मोदी सरकार के पहले कार्यकाल में ये बिल पारित नहीं हो सका था इसलिये सरकार ने अध्यादेश के जरिये बिल को लागू किया था. सरकार ने सत्रहवीं लोकसभा के पहले सत्र को 7 अगस्त तक बढाने का फैसला ताकी लम्बित विधेयक पारित हो सके, ऐसे में सरकार के लिये सबसे महत्वपूर्ण विधेयक ट्रिपल तलाक बिल को पारित कराना है.

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First published: July 29, 2019, 1:48 PM IST
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