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DBT योजना के कारण 2014 से अब तक बचे 2.2 लाख करोड़ रुपये, मोदी सरकार का दावा

DBT योजना के कारण 2014 से अब तक बचे 2.2 लाख करोड़ रुपये, मोदी सरकार का दावा

डीबीटी योजना की वजह ये हुई पैसों की बचत. (File pic)

डीबीटी योजना की वजह ये हुई पैसों की बचत. (File pic)

DBT Scheme: दो दिन पहले 'आधार 2.0' सम्मेलन में बोलते हुए इलेक्‍ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के सचिव अजय प्रकाश साहनी ने कहा कि आधार ने कोरोना महामारी के दौरान एक रक्षक काम काम किया है. उनके अनुसार अप्रैल 2020 में मार्च 2020 के मुकाबले आधार आधारित डीबीटी भुगतान में 140 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है. इसके बाद यह मई 2021 में अप्रैल 2020 के स्‍तर के मुकाबले 200 फीसदी बढ़ा था. यह कोरोना महामारी के दौरान सरकार की ओर से किए गए डीबीटी भुगतान को दर्शाता है.

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नई दिल्‍ली. डायरेक्‍ट बेनेफिट ट्रांसफर यानी डीबीटी योजना (DBT Scheme) के जरिये बड़ी मात्रा में पैसे बचाने में मदद मिल रही है. केंद्र की मोदी सरकार (Modi Government) की ओर से दावा किया गया है कि 2014 से लेकर अब तक इस योजना की वजह से 2.2 लाख करोड़ रुपये की बचत हुई है. सरकार के अनुसार जब पिछले वित्‍त वर्ष के दौरान कोरोना महामारी (Coronavirus) फैली हुई थी, तब भी उस समय डीबीटी के कारण करीब 45 हजार करोड़ रुपये की बचत हुई थी.

ये आंकड़े News18 की ओर से अप्रैल 2020 से मार्च 2021 के बीच के सरकारी आंकड़ों की समीक्षा के बाद प्राप्‍त हुए हैं. अधिकारियों का कहना है कि यह लक्ष्‍य सरकारी योजनाओं में किसी भी लीकेज को कम करके, सरकारी योजनाओं के नकली या गैर-मौजूदा लाभार्थियों को बाहर निकालने और असल लाभर्थियों के आधार से लिंक बैंक अकाउंट में पैसा भेजकर हासिल किया गया. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस संबंध में पहले ही कह चुके हैं कि यह अतीत से आगे निकल जाने की बात है.

दो दिन पहले ‘आधार 2.0’ सम्मेलन में बोलते हुए इलेक्‍ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के सचिव अजय प्रकाश साहनी ने कहा कि आधार ने कोरोना महामारी के दौरान एक रक्षक काम काम किया है. उनके अनुसार अप्रैल 2020 में मार्च 2020 के मुकाबले आधार आधारित डीबीटी भुगतान में 140 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है. इसके बाद यह मई 2021 में अप्रैल 2020 के स्‍तर के मुकाबले 200 फीसदी बढ़ा था. यह कोरोना महामारी के दौरान सरकार की ओर से किए गए डीबीटी भुगतान को दर्शाता है.

News18 द्वारा समीक्षा किए गए आधिकारिक आंकड़े नकद में डीबीटी भुगतान में बड़ी वृद्धि की पुष्टि करते हैं, जिसके माध्यम से सरकार ने गरीबों को मुफ्त राशन जैसे लाभ भी दिए हैं. सरकार ने वित्तीय वर्ष 2020-21 में डीबीटी के माध्यम से लोगों को 5.5 लाख करोड़ रुपये भेजे हैं, जो वित्त वर्ष 2019-20 के मुकाबले 40 फीसदी अधिक है, जब डीबीटी के तहत कुल भुगतान 3.8 लाख करोड़ रुपये दिए गए थे. चालू वित्त वर्ष में अब तक 3.4 लाख करोड़ रुपये भेजे जा चुके हैं.

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सरकारी आंकड़े यह भी बताते हैं कि पिछले वित्तीय वर्ष में 98 करोड़ लोगों को डीबीटी के माध्यम से नकद लाभ मिला, जो अब तक का सबसे अधिक है. अजय साहनी ने गुरुवार को ‘आधार 2.0’ सम्मेलन में कहा कि महामारी के समय में आधार का उपयोग भी तेजी से बढ़ा है, क्योंकि आधार का उपयोग लोगों द्वारा अपनी पहचान साबित करने के लिए किया जा रहा है.

साहनी ने कहा, ‘वित्त वर्ष 2020-21 के दौरान लोगों द्वारा ऑनलाइन आधार प्रमाणीकरण के माध्यम से विभिन्न योजनाओं के तहत सेवाओं का लाभ उठाने के लिए लगभग 1400 करोड़ बार आधार दिया गया.’

डीबीटी के लिए सरकार
यह योजना यूपीए सरकार के दौरान 2013-14 में पायलट प्रोजेक्‍ट आधार पर शुरू की गई थी. इसके बाद मोदी सरकार ने इसे अपनाया और सभी सरकारी योजनाओं को कवर करने के लिए इसका विस्तार किया, जिसमें लोगों को नकद या उस तरह के लाभ दिए जाते हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पूर्व पीएम राजीव गांधी के बयान का हवाला देते हुए भी डीबीटी के लाभों के बारे में बताया है कि गरीबों और जरूरतमंदों के कल्याण के लिए भारत सरकार की ओर से जारी 100 पैसे में से केवल 15 पैसा लीकेज और भ्रष्‍टाचार के कारण लाभार्थियों तक पहुंचता है. पीएम मोदी ने डीबीटी के लिए जन धन बैंक खाता, आधार और मोबाइल का प्रचार किया.

पीएम-किसान, पीएम आवास योजना, आयुष्मान भारत, एलपीजी-पहल और मनरेगा जैसी 300 से अधिक केंद्र सरकार की योजनाएं वर्तमान में डीबीटी-आधार प्लेटफॉर्म पर हैं. वर्तमान में डीबीटी के तहत सबसे बड़ा भुगतान सार्वजनिक वितरण योजना (पीडीएस) के तहत है.

Tags: DBT scheme, Modi government, Narendra modi

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