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टीम मोदी का हिस्सा बने रामविलास पासवान, सियासी हवा का रुख भांपने में हैं माहिर

News18Hindi
Updated: May 30, 2019, 8:16 PM IST

2014 की मोदी सरकार में केंद्रीय मंत्री रहे लोक जनशक्ति पार्टी प्रमुख राम विलास पासवान को इस बार भी मंत्रिमंडल में शामिल किया गया है.

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2014 की मोदी सरकार में मंत्री रहे लोक जनशक्ति पार्टी (एलजेपी) प्रमुख राम विलास पासवान को इस बार भी मंत्रिमंडल में शामिल किया गया है. पासवान मोदी कैबिनेट का अहम हिस्सा हैं और उन पर इस बार जिम्मेदारियां भी ज्यादा हैं. पासवान के पास 2014 में उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्रालय था.

इससे पहले कहा जा रहा था कि इस बार मोदी कैबिनेट में पासवान की जगह उनके बेटे चिराग पासवान को जगह मिल सकती है. लेकिन खुद चिराग पासवान ने ये साफ कर दिया था कि उनके पिता ही कैबिनेट का हिस्सा बनेंगे न की वो. बीजेपी की सहयोगी एलजेपी के नेता चिराग पासवान ने कहा था कि मेरे पिता रामविलास पासवान ही मोदी सरकार में मंत्री बनेंगे. इस बात का फैसला पार्टी की संसदीय बोर्ड की बैठक में लिया गया है. हालांकि इससे पहले रामविलास पासवान ने कहा था कि पार्टी चाहती है कि एलजेपी की तरफ से चिराग पासवान केंद्र सरकार में मंत्री बनें.

यूपीए व एनडीए की सरकार में रहे मंत्री
भारतीय राजनीति में रामविलास पासवान का कद काफी बड़ा है और वो यूपीए व एनडीए की सरकार में पहले भी मंत्री रह चुके हैं. पासवान का जन्‍म 5 जुलाई 1946 को बिहार के खगड़िया जिले में एक दलित परिवार में हुआ था. उन्होंने झांसी की बुंदेलखंड यूनिवर्सिटी से एमए किया. इसके बाद पटना यूनिवर्सिटी से एलएलबी किया था.



1969 में पासवान पहली बार बिहार से राज्‍यसभा सांसद बने. फिर 1977 में उन्होंने जनता पार्टी के टिकट पर लोकसभा चुनाव में जीत हासिल की. 1982 में भी पासवान ने जीत हासिल की और लगातार दूसरी बार लोकसभा सांसद बने. दलितों के उत्थान के लिए उन्होंने 1983 में दलित सेना का गठन किया. 1989, 1996 के लोकसभा चुनाव में भी पासवान ने जीत हासिल की. 2000 में पासवान ने जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) का साथ छोड़ा और लोकजनशक्‍ति पार्टी (एलजेपी) का गठन किया. एलजेपी भी एनडीए का हिस्सा बनी.

हवा का सही रुख भांपने का कौशलपासवान को लेकर अक्सर उनके विरोधी 'मौसम विज्ञानी' का तंज कसते हैं. लेकिन सही समय पर किस दिशा में आगे बढ़ना चाहिए ये उनका कौशल है. जिसकी वजह से आज तक वो राजनीति की दुनिया में कभी साइडलाइन नहीं हुए. 2002 में हुए गुजरात दंगों को लेकर पासवान सबसे पहले एनडीए से अलग हुए. 2004 के लोकसभा चुनाव में बहुत कम लोगों को उम्मीद थी कि यूपीए की सरकार बनेगी. लेकिन पासवान ने ये उलटफेर भांप लिया था. चुनाव से ठीक पहले उन्होंने सोनिया गांधी से मुलाकात की और एनडीए के खिलाफ मोर्चा खोल दिया था. एलजेपी, यूपीए का हिस्सा बनी और पासवान मनमोहन सरकार में मंत्री भी बने. हालांकि 2009 में उन्हें यूपीए से अलग होना भारी पड़ा और वो हाजीपुर के अपने गढ़ में ही चुनाव हार गए. लेकिन 2010 में आरजेडी प्रमुख लालू प्रसाद यादव ने पासवान को राज्यसभा में पहुंचाया.



ये समय उनके लिए काफी कठिन रहा. लेकिन पासवान ने फिर से वापसी की और बिहार सहित केंद्र में अपनी पकड़ मजबूत की. 2014 के चुनाव से पहले यूपीए और एनडीए दोनों ने ही गठबंधन के लिए उनसे बात की. ये लगभग तय हो गया था कि पासवान यूपीए का हिस्सा बनेंगे. लेकिन ऐन मौके पर सियासी हवा का रुख भांपते हुए पासवान एनडीए में शामिल हुए और 2014 में फिर से केंद्रीय मंत्री बने.

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First published: May 30, 2019, 6:00 AM IST
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