लद्दाख से लेकर जम्मू-कश्मीर तक संचार सुविधाओं को मजबूत करने का मास्टर प्लान

लद्दाख से लेकर जम्मू-कश्मीर तक संचार सुविधाओं को मजबूत करने का मास्टर प्लान
जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में संचार सुविधाओं को मजबूत करने का मोदी सरकार का मास्टर प्लान (सांकेतिक तस्वीर)

पीएम नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) की सरकार ने पहले कार्यकाल में ही ऐसी नीतियां बनानी शुरू कर दी थीं, ताकि कश्मीर से लेकर पूर्वोत्तर के राज्यों तक सड़क निर्माण से लेकर संचार की व्यवस्था सुचारू रूप से चले.

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नई दिल्ली. केंद्रीय संचार मंत्रालय (Union Ministry of Communications) के तहत काम करने वाले विभाग UNIVERSASL SERVICE OBLIGATION FUND (USOF) ने देश के रिमोट और दूर दराज के इलाकों में बसे 354 गांवों में संचार सुविधा देने की योजना को अमली जामा पहनाना शुरू कर दिया है. भारत सरकार का ये महत्वाकांक्षी प्रोजक्ट सीमा से लगे उन तमाम गांवों के लिए है, जहां अब तक संचार की सुविधा नहीं पहुंची है. पीएम नरेंद्र मोदी की सरकार ने पहले कार्यकाल में ही ऐसी नीतियां बनानी शुरू कर दी थीं, ताकि कश्मीर से लेकर पूर्वोत्तर के राज्यों तक सड़क निर्माण से लेकर संचार की व्यवस्था सुचारू रूप से चले. अब दुर्गम गलवान घाटी में चीन के साथ झड़प ने जता दिया है कि इन योजनाओं ने सेना की पोजीशन को सुदृढ करने में कितनी बड़ी भूमिका निभायी है

> इन 354 गांवों में 144 केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख और जम्मू-कश्मीर में हैं. इनमें से 87 जम्मू और कश्मीर और साथ ही 57 गांव लद्दाख में हैं.

> ये प्रोजेक्ट पूरा होने के बाद जम्मू-कश्मीर और लद्दाख इलाके मे रहने वाले 100 फीसदी निवासियों तक संचार की सुविधा पहुंच जाएगी.



> संचार मंत्रालय ने देश भर के रिमोट इलाकों में 812 DIGITAL SATELLITE PHONE TERMINAL ( DSPT) स्थापित करने की योजना बनायी है.
> इन DSPT में से 134 टर्मिनल लद्दाख के रिमोट इलाके में लगेंगे. लद्दाख के ये इलाके हैं-

1- गलवान घाटी

2- डीबीओ-दौलत बेग ओल्डी

3- डी सिंह पोस्ट

4- हॉट स्प्रींग्स

5- लुकुंग

6- ठाकुंग

7- चुशुल

दरअसल, लद्दाख के इन दूर दराज के सीमावर्ती इलाकों में संचार की मूलभूत सुविधाएं नहीं होने के कारण वहां होने वाले किसी भी मूवमेंट के बारे में जानकारी मिलने में वक्त लग जाता था. मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल में केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद के नेतृत्व में संचार मंत्रालय जल्द से जल्द इन सीमावर्ती इलाकों में इन सुविधाओं को पूरा करने में लगा है, ताकि आने वाले दिनों में न सिर्फ वहां रह रहे आम आदमी बल्कि सरकार और सेना को भी सूचना के आदान प्रदान में मुश्किलें नही झेलनी पड़े.
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