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J&K: 'बाल्मीकि' समाज को बड़ा तोहफा देने की तैयारी, मोदी सरकार उठा सकती है बड़ा कदम

सरकार एक प्रस्ताव राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग को भेजेगी. (सांकेतिक तस्वीर)

सरकार एक प्रस्ताव राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग को भेजेगी. (सांकेतिक तस्वीर)

जम्मू और कश्मीर में 'बाल्मीकि' समुदाय को बड़ा तोहफा मिल सकता है. केंद्र सरकार 'बाल्मीकि' समुदाय को अनुसूचित जाति (Sched ...अधिक पढ़ें

हाइलाइट्स

सरकार 'बाल्मीकि' समुदाय को अनुसूचित जाति सूची में शामिल करने की योजना बना रही है.
सरकार एक प्रस्ताव राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग को भेजेगी.
हाल ही में अनुसूचित जनजातियों की सूची में 'पहाड़ी' समुदाय को शामिल किया गया था.

नई दिल्ली. केंद्र शासित प्रदेश में चुनाव होने के संकेत मिल रहे हैं. इस बीच खबर है कि केंद्र सरकार जम्मू और कश्मीर में ‘बाल्मीकि’ समुदाय को बड़ा तोहफा दे सकती है. सरकार ‘बाल्मीकि’ समुदाय को अनुसूचित जाति (Schedule Cast) सूची में शामिल करने की योजना बना रही है. यह प्रस्ताव सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय द्वारा दिया गया है. ‘वाल्मीकि’ नाम का एक समुदाय जो पहले से इस लिस्ट में शामिल है उससे इस समुदाय का नाम मिलता जुलता है, लेकिन दोनों में वर्तनी में भिन्नता है. दलित समूहों की मान्यता में अपनाई गई सख्ती को देखते हुए यह अंतर बाल्मीकि जाति के कई व्यक्तियों या परिवारों को आरक्षण और अन्य सकारात्मक लाभों से वंचित कर देता है.

TOI के अनुसार हाल ही में अनुसूचित जनजातियों की सूची में ‘पहाड़ी’ समुदाय जोकि एक भाषाई अल्पसंख्यक है को शामिल करने की घोषणा की गई थी. इससे समझा जा रहा है कि भाजपा जम्मू-कश्मीर में जाति वर्गीकरण पर एक तेज गति से चल रही है. लेकिन इधर एसटी सूची में शामिल गुर्जरों और बकरवालों ने प्रस्ताव के खिलाफ कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है और विरोध की धमकी दी है. जबकि गुर्जर और बकरवाल मुस्लिम हैं. प्रदर्शनकारियों का दावा है कि ‘पहाड़ी’ आदिवासी नहीं हैं, बल्कि मुख्यधारा की उच्च जातियों का हिस्सा हैं.

हालांकि ‘वाल्मीकि/बाल्मीकि’ का मामला उतना विवादास्पद नहीं है, क्योंकि यह समुदाय पूरे देश में एक प्रसिद्ध दलित समुदाय से आते हैं. सूत्रों ने कहा कि जम्मू-कश्मीर में सफाई कर्मचारियों (सफाई कर्मचारियों) की हड़ताल के मद्देनजर तत्कालीन राज्य प्रमुख द्वारा पंजाब के मुख्यमंत्री प्रताप सिंह कैरों को भेजे गए अनुरोध के बाद उक्त समुदाय के कुछ परिवार 1957-58 में पंजाब से जम्मू चले गए थे. यह मुख्य रूप से यह समूह है जो वर्तनी भिन्नता वाले समुदाय का हिस्सा है जिसे अनुसूचित जाति सूची में शामिल करने की मांग की जा रही है.

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मालूम हो कि सामाजिक न्याय मंत्रालय का प्रस्ताव राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग को उसकी राय के लिए भेजा जाएगा, जिसके बाद इसे केंद्रीय मंत्रिमंडल के समक्ष मंजूरी के लिए रखा जाएगा. इसके बाद इसे केंद्रीय मंत्रिमंडल के समक्ष मंजूरी के लिए रखा जाएगा. फिर, संसद में पारित होने के लिए एक विधेयक लाया जाएगा. केंद्र शासित प्रदेश में चुनाव जल्द ही होंगे यह संकेत जम्मू-कश्मीर के सामाजिक मोर्चे पर अति सक्रिय सरकार के वरिष्ठ मंत्रियों की टिप्पणियों से समझे जा सकते हैं. हालांकि प्रस्तावित चुनावों के सही समय पर अभी तक कोई स्पष्टता नहीं है.

Tags: Caste Reservation, Jammu and kashmir

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