मोदी सरकार 2.0: पहले 100 दिन में ही दिखा विदेश नीति का दम

Shailendra Wangu | News18Hindi
Updated: September 7, 2019, 4:30 PM IST
मोदी सरकार 2.0: पहले 100 दिन में ही दिखा विदेश नीति का दम
मोदी सरकार 2.0 ने पहले 100 दिन में ही दिखा दिया विदेश नीति का दम

मोदी सरकार 2.0 (Modi Government 2.0) के पहले 100 दिनों में कश्मीर मुद्दा (Kashmir Issue) और अंतर्राष्ट्रीय मंच पर भारत (India) का मजबूती से अपनी बात रखना छाया रहा.

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नई दिल्ली. 2014 में पीएम नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) के शपथग्रहण समारोह में सभी सार्क देशों को न्यौता भेजा गया था, और उस वक्त के पाकिस्तान (Pakistan) के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ भी समारोह में शामिल हुए थे. पड़ोसी देशों को न्यौते से यह साफ था कि मोदी सरकार (Modi Government)  का विदेश नीति पर विशेष ध्यान रहेगा. 2019 में जब पीएम मोदी ने शपथ ली, उस वक्त भी पड़ोसी मुल्कों को न्यौता भेजा गया. लेकिन पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान (Imran Khan) को इस बार निमंत्रण नहीं भेजा गया. वजह साफ थी, पुलवामा आतंकी हमले के साये में यह दुनिया के सामने था कि पाक समर्थित आतंकवाद पर इमरान खान सरकार रोक नहीं लगा पाई.

मोदी सरकार के 100 दिन
मोदी सरकार 2.0 (Modi Government 2.0) के पहले 100 दिनों में कश्मीर मुद्दा (Kashmir Issue) और अंतर्राष्ट्रीय मंच पर भारत (India) का मजबूती से अपनी बात रखना छाया रहा. नतीजा: पूरी दुनिया यह मानती है कि संविधान में बदलाव और अनुच्छेद 370 (Article 370) हटाना भारत का अंदरूनी मामला है. साथ ही इस मुद्दे पर किसी तीसरे देश की मध्यस्थता की जरूरत नहीं है. कश्मीर पर 5 अगस्त को लिए गए फैलसे के बाद पाकिस्तान बौखला गया था. 370 को हटाने के ऐतिहासिक फैसले से पाक सरकार सकते में आ गई और कश्मीर मुद्दे को अंतर्राष्ट्रीय मंच पर उठाने की पुरजोर तैयारी करने लगी. लेकिन पाकिस्तान यह नहीं जानता था कि अंतरराष्ट्रीय मंच पर उसे मुंह की खानी पड़ेगी.

सुरक्षा परिषद में भारत को बड़ी सफलता

भारत के कदम से बोखलाए पाकिस्तान (Pakistan) ने अपने सबसे करीबी दोस्त चीन से मदद मांगी. इसके बाद बीजिंग कश्मीर मुद्दे को सुरक्षा परिषद में उठाने के लिए तैयार हो गया. लेकिन चीन-पाक की कोशिशों पर तब पानी फिर गया जब सुरक्षा परिषद के 15 में से 14 सदस्यों ने कश्मीर मुद्दे पर कोई बयान जारी करने से मना कर दिया. साथ ही इस मुद्दे पर सिर्फ अनऔपचारिक चर्चा हुई और UN सुरक्षा परिषद ने कश्मीर मुद्दे में दखल देने से इंकार कर दिया. भारत की इस कामयाबी के पीछे एक मजबूत रणनीति थी. भारत के रुख का दुनिया भर में इसलिए भी समर्थन हुआ, क्योंकि पिछले एक महीने में घाटी से किसी बड़ी हिंसक घटना या किसी नागरिक के हताहत होने की खबर नहीं आई. फैसले से पहले सुरक्षाबलों की तैनाती की वजह से कानून-व्यवस्था बनाये रखने में मोदी सरकार को पूरी कामयाबी मिली. जैसा कि विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने कहा, "पाकिस्तान को हिंसा फैलाने की कोशिशों के बावजूद न एक भी गोली चली, न ही किसी नागरिक की जान गई".

इमरान खान को अंतरराष्ट्रीय मंच पर मुंह की खानी पड़ी.
इमरान खान को अंतरराष्ट्रीय मंच पर मुंह की खानी पड़ी.


दुनियाभर में भारत के रुख को समर्थन इस लिए भी मिला, क्योंकि 5 अगस्त के बाद विदेश मंत्रालय ने न सिर्फ P5 देशों यानी अमेरिका, रूस, ब्रिटेन, फ्रांस और चीन को अपने फैसले की जानकारी दी, बल्कि इस्लामिक देशों को भी नई दिल्ली ने हालात से अवगत कराया.
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इस्लामिक देशों का मिला समर्थन
जो इस्लामिक देश कभी कश्मीर के मुद्दे पर पाकिस्तान के साथ खड़े नजर आते थे, आज वो भारत का मजबूती से समर्थन करते नजर आए. पीएम मोदी की विदेश यात्राओं से भारत और इस्लामिक वर्ल्ड की दूरियां और कम हुई. यही वजह है कि आज इस्लामिक देश भारत को एशिया में एक मजबूत देश मानते हैं. कश्मीर पर UAE ने सबसे पहले बयान में इसे भारत का अंदरूनी मामला बताया. वहीं, मालदीव ने भी भारत के रुख का समर्थन किया. प्रधानमंत्री मोदी के बहरीन दौरे पर भी वो देश भारत के साथ खड़ा नजर आया. इमरान खान की बेचैनी इस बात से भी साफ हो जाती है कि राष्ट्र के नाम अपने संदेश में पाक पीएम ने यह माना था कि अब वो दुनिया में अकेला पड़ गया है और आज इस्लामिक देश भी उसके साथ नहीं हैं.

कश्मीर पर ट्रंप का यू-टर्न
अमेरिका के बड़बोले राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इमरान खान से मुलाकात के दौरान एक ऐसा बयान दिया जिससे भारत समेत दुनिया भर में खलबली मच गई. उन्होंने दावा किया कि पीएम मोदी ने उनसे कश्मीर पर मध्यस्थता का अनुरोध किया था. बगल में बैठा इमरान खान इस बयान को पाकिस्तान बड़ी जीत के तौर पर देख रहा था. लेकिन भारत ने यह साफ कर दिया कि पीएम मोदी और ट्रंप की ओसका, जापान में हुई मुलाकात में ऐसे किसी प्रस्ताव पर चर्चा नहीं हुई थी. लेकिन फ्रांस में पीएम मोदी और ट्रंप की मुलाकात से पाक को फिर झटका लगा, जब ट्रंप ने कश्मीर को द्विपक्षीय मुद्दा बताकर कहा कि भारत-पाक को ही इस मुद्दे पर चर्चा करनी चाहिए.

ट्रंप के बयान से पाक को फिर झटका लगा
ट्रंप के बयान से पाक को फिर झटका लगा


बौखलाए पाक ने कश्मीर को अंतरराष्ट्रीय मंच पर उठाने की बार-बार कोशिश की. इमरान खान ने खुद को 'कश्मीर का राजदूत' घोषित किया. लेकिन अब दुनिया में पाकिस्तान अलग-थलग पड़ चुका है.

अब सबकी नजर सितंबर के अंत में होने वाले UN जनरल असेंबली पर होंगी, जहां इमरान खान फिर कश्मीर मुद्दे को उठाएंगे, वहीं पीएम मोदी भी पाक को संयुक्त राष्ट्र से करारा जवाब देंगे.

आतंक के आका पर प्रतिबंध
हालांकि यह 100 दिनों की सफलता नहीं, लेकिन चुनावी नतीजों से पहले भारत को एक बड़ी कामयाबी मिली थी. यह पिछले 5 सालों की आउटरीच का ही नतीजा है कि जैश के सरगना मौलाना मसूद अजहर पर 10 साल की कोशिशों के बाद सुरक्षा परिषद ने प्रतिबंध लगाया. अंतर्राष्ट्रीय दबाव में चीन को अपने अड़ियल रवैये से पीछे हटना पड़ा. और इस सफल रणनीति में अमेरिका, ब्रिटेन और फ्रांस ने भारत का साथ दिया.

संबंधों को मज़बूत करने पर पीएम को सम्मान
अन्य देशों के साथ भारत के रिश्तों को मज़बूत करने के लिए पीएम मोदी के योगदान को सराहा भी गया. UAE, बहरीन और रूस ने पीएम मोदी को सबसे बड़े नागरिक सम्मानों से नवाज़ा. पहले 100 दिनों में पीएम मोदी को UAE के ज़ायेद मैडल, बहरीन के किंग हमाद आर्डर और रूस के ऑर्डर ऑफ सेंट एंड्रयू द एपोस्टल से नवाज़ा गया है.

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First published: September 7, 2019, 4:27 PM IST
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