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दिल्ली में प्रदूषण से निपटने के लिए मोदी सरकार ने ही शुरू किया अभियान

अमिताभ सिन्हा | News18India
Updated: November 5, 2019, 4:26 PM IST
दिल्ली में प्रदूषण से निपटने के लिए मोदी सरकार ने ही शुरू किया अभियान
दिल्ली में प्रदूषण से निपटने के लिए मोदी सरकार ने अभियान शुरू किया है. ( फाइल फोटो)

दिल्ली (Delhi) के मुख्यमंत्री (Chief Minister) अरविंद केजरीवाल ने ऑड-इवन (Odd-even) लागू कर सोचा था कि अब दिल्ली को प्रदूषण (Pollution) से छुटकारा मिल जाएगा लेकिन यहां भी कोई खास नजीते नहीं निकले.

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  • Last Updated: November 5, 2019, 4:26 PM IST
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नई दिल्ली. इस बार दिल्ली (Delhi) वालों ने दिवाली पर पटाखों (Firecrackers) नहीं फोड़े यह सोचकर कि उनको प्रदूषण (Pollution) से छुटकारा मिलेगा, लेकिन नतीजा वही का वही निकला. पंजाब (Punjab) और हरियाणा (Haryana) में जलाई जा रही पराली (Straw) ने दिल्ली का हवा (Air) को जहरीला बना दिया, जिससे लोगों को सांस लेने में भी परेशानी होने लगी.

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने ऑड-इवेन लागू कर सोचा था कि अब दिल्ली को प्रदुषण से छुटकारा मिल जाएगा लेकिन यहां भी कोई खास नजीते नहां निकले. केजरीवाल ने केन्द्र सरकार पर भी आरोप मढना शुरू कर दिया कि उन्होने आपात स्थिति से निपटने के लिए दिल्ली, पंजाब और हरियाणा की कोई बैठक तक नहीं बुलाई. सरकारी सूत्र बताते हैं कि केन्द्र सरकार सतर्क भी थी और मॉनिटरिंग प्रधानमंत्री कार्यालय से भी हो रही थी.

जावडेकर ने तीन राज्यों के मंत्रियों की बैठक बुलाई थी
सरकारी सूत्र बताते हैं कि पराली जलाने की घटनाएं यूपीए सरकार के दौर से ही चल रहीं थी. लेकिन इसके लिए जागरुकता बढायी केन्द्र की मोदी सरकार ने. 2015 में प्रकाश जावडेकर ने बतौर पर्यावरण मंत्री तीनों राज्यों की पहली समन्वय बैठक बुलायी थी. इस समस्या से निबटने के लिए एक केन्द्रीय तंत्र की रूपरेखा मौजूदा पर्यावरण मंत्री प्रकाश जावडेकर की ही देन है, जिसके तहत अधिकारियों के स्तर पर तीनों राज्यों के बीच लगातार संपर्क बना रहता है.

इसके अलावा केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड भी लगातार अपडेट्स से इसे रोकने और जागरुकता बढाने में खासा योगदान देता है. एयर क्वालटी इंडेक्स यानी एक्यूआई को जनता के सामने लाना मोदी सरकार की ही देन है. सरकारी सूत्र बताते हैं कि पराली जलाने की सैटेलाईट इमेज भी जागरूकता बढाने और इससे निजात पाने के उपाय ढूंढने के काम आ रही है जो कि मोदी सरकार के दौरान ही शुरू की गई है.

एनसीआर में पर्यावरण मंत्रियों की हुई नौ बैठक
सूत्र बताते हैं कि अब तक एनसीआर इलाके के सभी पर्यावरण मंत्रियों की 9 बैठकें पिछले चंद सालों में की जा चुकीं हैं. ताकि इस समस्या से हमेशा के लिए निजात पायी जा सके. इसके अलावा सचिव स्तर की बातचीत लगातार चलती रहती है. सरकारी सूत्रों के मुताबिक पंजाब और हरियाणा सरकार को पिछले कुछ सालों में 100 करोड़ रुपये दिए गए हैं ताकि वो किसानों को पराली जलाने से रोकने के लिए इंसेंटिव दे सकें. साथ ही किसानों को पराली जलाने से रोकने की मशीनें सस्ते मूल्यों पर उपलब्ध करायी जा सके.
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मॉनिटरिंग मशीनों की संख्या बढायी गयी
जब एनजीटी और दूसरी एजेंसियों ने लाल झंडी तक नहीं दिखायी थी. तब मोदी सरकार के दौरान ही हर दिन 24 घंटे काम करने वाली मॉनिटरिंग मशीनों को कई स्थानों पर लगाया गया. सूत्र बताते हैं कि लगभग 3000 उद्योगों की हर वक्त मॉनिटरिंग होती है. अगर इन फैक्ट्रियों में प्रदूषण का स्तर बढता है तो उन्हें तुरंत वैकल्पिक व्यवस्था पर काम करना शुरू करना पड़ता हैय.

ईंट-भट्ठों को सरकार बंद नहीं कर सकती
ये उद्योग दिल्ली और एनसीआर इलाके में काम कर रहे हैं. जैसे पंजाब, यूपी, हरियाणा के कुछ हिस्सों में ईंट - भट्ठों को सरकार बंद नहीं कर सकती है क्योंकि बहुत सारे लोगों को इन्होने रोजगार दिया हुआ है. लेकिन एक इसे दुरुस्त करने के लिए एक जीग-जैग तकनीकि का इस्तेमाल करने को सरकार ने इन इंट भंट्ठों को कहा है.

उधर मोदी सरकार ने अरसे से ढंढे बस्ते में पड़े ईस्ट वेस्ट कॉरीडोर को पूरा कर भी दिल्ली को खासी राहत दे दी है. हर रोज दिल्ली मं घुसते 60000 ट्रकों से जो प्रदुषण दिल्ली मे आता था उसकी भरपाई करना मुश्किल होता जा रहा था. अब सामान से भरे भारी ट्रक जिसे दिल्ली नही जाना हो वो दिल्ली से गुजरने के बजाए बाहर से बाहर ही निकल जा रहे हैं. दिल्ली को प्रदूषण से बचाने का ये बड़ा कदम था इस्ट-वेस्ट कॉरीडोर को पूरा करना.

कुल मिलाकर सरकार का यही संदेश है कि वो इस पराली और दमघोंटू प्रदूषण से बचने के उपाय भी लगातार ढूंढ रही है और फैसले भी ले रही है लेकिन इसके लिए पंजाब और हरियाणा के सहयोग की जरुरत है जहां के पराली जलाने की मार हल सब दिल्ली में झेल रहे हैं.

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First published: November 5, 2019, 4:19 PM IST
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