नगा शांति वार्ता को फिर पटरी पर लना चाहती है मोदी सरकार, IB को मिली खास जिम्मेदारी

नगा शांति वार्ता को फिर पटरी पर लना चाहती है मोदी सरकार, IB को मिली खास जिम्मेदारी
नगा शांति वार्ता को फिर पटरी पर लना चाहती है मोदी सरकार

PMO की ओर से इंटेलिजेंस ब्यूरो (Intelligence Bureau) के निदेशक अरविंद कुमार और आईबी के विशेष निदेशक अक्षय कुमार मिश्रा को नगा शांति वार्ता (Naga Peace Talks) को पटरी पर लाने का काम सौंपा गया है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: August 18, 2020, 7:35 AM IST
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नई दिल्ली. नगा शांति वार्ता (Naga Peace Talks) को एक बार फिर पटरी पर लाने के लिए मोदी सरकार (Modi government) ने तैयारी शुरू कर दी है. हालांकि, विद्रोही समूहों और केंद्र के वार्ताकारों के बीच पिछले कई महीनों से चले आ रहे गतिरोध पर प्रधानमंत्री कार्यालय ने चिंता भी जताई है. इन सभी गतिरोध के बीच पीएमओ की ओर से इंटेलिजेंस ब्यूरो (Intelligence Bureau) के निदेशक अरविंद कुमार और आईबी के विशेष निदेशक अक्षय कुमार मिश्रा को नगा शांति वार्ता को फिर से शुरू करने का काम सौंपा गया है. बता दें कि अरविंद कुमार ने ही सरकार से नगा शांति वार्ता को फिर से शुरू करने की बात कही थी.

पीएमओ से जुड़े एक अधिकारी ने बताया कि पिछले 6 सालो में आरएन रवि वार्ताकार के रूप में अपने स्तर से नगा समूहों से बात कर रहे थे. हालांकि, पिछले 10 महीनों से जिस तरह से इस काम में प्रगति होनी चाहिए वह रुक सी गई है. बता दें कि आरएन रवि ने हाल ही में नगालैंड में निर्वाचित सरकार पर निशाना साधते हुए कहा था कि नागालैंड प्राकृतिक संसाधन से संपन्न क्षेत्र है. इसे दुर्भाग्य ही कहेंगे कि आज यह उत्तर-पूर्वी क्षेत्र देश में सबसे खराब प्रदर्शन कर रहा है.

गौरतलब है कि पूर्व प्रधानमंत्री एच डी देवेगौड़ा ने भी नगा समस्या का हल जल्द न निकल पाने पर चिंता जताई है. उन्होंने कहा कि केन्द्र सरकार और एनएससीएन (आईएम) के बीच चल रही वार्ता कठिन दौर में पहुंच चुकी है. ऐसे नाजुक वक्त में अविश्वास को किनारे रखकर जल्द से जल्द शांति समझौते को अंजाम तक पहुंचाया जाना चाहिए.



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हालांकि, नगा शांति वार्ता के मुद्दे पर केंद्र सरकार ने पीछे हटने से इनकार कर दिया है. इस पूरे मामले पर नजर रख रहे एक अधिकारी ने बताया कि सरकार को धमकी नहीं दी जा सकती है. पिछले 11 महीनों में आरएन रवि और विभिन्न नगा समूहों के बीच गतिरोध बढ़ता दिखाई दे रहा है. पछिले साल अक्टूबर में एक आम सहमति बनाई जानी थी लेकिन ऐसा नहीं हो सका. इसके बाद केंद्र ने एनएससीएन (आईएम) के कार्यकर्ताओं और नेताओं पर कार्रवाई करना शुरू कर दिया.

केंद्र का ये रवैया नगा नेताओं को परेशान करता है.सरकार के साथ शांति समझौत के प्रक्रिया को अंजाम दे रहे संगठन एनएससीएन-आईएम ने सात दशकों पुराने हिंसक आंदोलन का सम्मानजनक समाधान बिना झंडे और संविधान के मुमकिन नहीं है.
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