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धर्म परिवर्तन पर सख्त हुई मोदी सरकार, अब विदेशी फंडिंग पाने वाले NGO को देनी होगी ये जानकारी

News18Hindi
Updated: September 17, 2019, 12:45 PM IST
धर्म परिवर्तन पर सख्त हुई मोदी सरकार, अब विदेशी फंडिंग पाने वाले NGO को देनी होगी ये जानकारी
गृह मंत्रालय ने विदेशी चंदा (नियमन) कानून (एफसीआरए) में बदलाव की घोषणा की है.

पिछले कुछ सालों से कई एनजीओ (NGO) जो कि विदेशों से फंड (Foreign Funding) ले रहे हैं, उसका कथित तौर पर गलत इस्तेमाल किया जा रहा है. ऐसे में गृह मंत्रालय (Ministry of Home Affairs) ने विदेशी चंदा (नियमन) कानून (एफसीआरए) में बदलाव की घोषणा की है.

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  • Last Updated: September 17, 2019, 12:45 PM IST
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नई दिल्ली. केंद्र सरकार के नियमों की अनदेखी कर विदेशों से भारी मात्रा में चंदा (Foreign Funding) लेने वाले एनजीओ (NGO)  यानी गैर-सरकारी संगठन केंद्रीय गृह मंत्रालय (Ministry of Home Affairs) के रडार पर आ गए हैं. गृह मंत्रालय ने विदेशी फंडिंग के नियमों में बदलाव किए हैं. इसके तहत ऐसे फंड प्राप्त करने वाले एनजीओ के पदाधिकारियों, मैनेजरों और सदस्यों को लिखित में घोषणा करनी होगी कि वे किसी व्यक्ति के धर्मांतरण में शामिल नहीं है. साथ ही एनजीओ पर धर्म परिवर्तन (Religious Conversion) के लिए न तो मुकदमा चलाया गया है और न ही उन्हें दोषी नहीं ठहराया गया है. यह कदम इसलिए उठाया गया है, क्योंकि कुछ जांच एजेंसियों से यह जानकारी मिली थी कि धर्मांतरण में एनजीओ शामिल रहे हैं.

बता दें कि पिछले कुछ सालों से कई एनजीओ जो कि विदेशों से फंड ले रहे हैं, उसका कथित तौर पर गलत इस्तेमाल किया जा रहा है. जांच में सामने आया था कि कुछ एनजीओ को मिले विदेशी पैसे से धर्मांतरण के काम भी किए जा रहे हैं. ऐसे कई मामले जम्मू-कश्मीर में भी सामने आए थे.

अधिसूचना में गृह मंत्रालय ने विदेशी चंदा (नियमन) कानून (एफसीआरए) में बदलाव की घोषणा की है. इसके तहत अब एक लाख रुपये तक के निजी उपहार प्राप्त करने वालों के लिए सरकार को लिखित जानकारी देनी होगी. इसके पहले ये राशि 25 हजार रुपये थी. गृह मंत्रालय के मुताबिक, एनजीओ के हर अहम सदस्य और पदाधिकारी को हलफनामा देना होगा.


एनजीओ के हर सदस्य को देनी होगी जानकारी

गृह मंत्रालय की अधिसूचना में लिखा है, 'एनजीओ के हर सदस्य, पदाधिकारी और मैनेजरों के लिए ये लिखित घोषणा करना अनिवार्य है कि वो किसी भी तरह के धर्म परिवर्तन से जुड़े कामों में लिप्त नहीं रहे हैं. न तो उन पर धर्म परिवर्तन का मुकदमा दर्ज हुआ है और न ही उन्हें दोषी ठहराया गया है.' इसके पहले FCRA 2010 में सिर्फ विदेश से फंडिंग पाने वाले एनजीओ के डायरेक्टर को ही ऐसी घोषणा करनी होती थी.

इसके साथ ही एनजीओ के पदाधिकारियों और सदस्यों को यह हलफनामा भी देना होगा कि वे विदेशी चंदे के दुरुपयोग या राष्ट्रद्रोह और हिंसा को बढ़ावा देने वाली गतिविधियों में शामिल नहीं रहे हैं. पहले ऐसा हलफनामा सिर्फ एनजीओ के लिए आवेदन करने वाले को देना होता था.


विदेश में इलाज के लिए भी देनी होगी जानकारी
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FCRA में बदलाव के मुताबिक, अब विदेश में इलाज कराने के लिए भी हलफनामा देना होगा. अगर किसी व्यक्ति को विदेश यात्रा के दौरान इमरजेंसी में इलाज की जरूरत होती है और वह किसी से विदेशी मदद प्राप्त करता है, तो उसे एक महीने के अंदर इसकी सूचना सरकार को देनी होगी. इस सूचना में फंडिंग का सोर्स, इंडियन करेंसी में उसकी वैल्यू और किस तरह उसका इस्तेमाल किया गया, इसका भी ब्योरा देना होगा. पहले यह काम दो माह में करना जरूरी था.

बता दें कि मोदी सरकार ने पिछले पांच साल में विदेशी चंदा प्राप्त करने और उसका उपयोग करने को लेकर नियम-कायदों को सख्त बनाया है. इसके तहत FCRA नियमों का उल्लंघन करने वाले करीब 18000 एनजीओ की विदेशी चंदा हासिल करने की अनुमति खत्म की गई है.

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First published: September 17, 2019, 11:58 AM IST
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